Urine Leakage Problem: 40 के बाद महिलाओं में क्यों होती है यूरिन लीकेज की समस्या? एक्सपर्ट ने बताए उपाय

Urine Leakage Problem: 40 के बाद महिलाओं में क्यों होती है यूरिन लीकेज की समस्या? एक्सपर्ट ने बताए उपाय

Urine Leakage Problem: महिलाओं के शरीर में उम्र बढ़ने के साथ कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनका असर उनकी सेहत पर साफ दिखाई देता है। खासतौर पर 40 साल के बाद कई महिलाएं पेरिमेनोपॉज (Perimenopause) के दौर में पहुंचने लगती हैं। यह वह समय होता है जब शरीर मेनोपॉज की ओर बढ़ रहा होता है और हार्मोन का स्तर तेजी से बदलता है। इस दौरान महिलाओं को मूड स्विंग्स, थकान, नींद की समस्या और कमजोरी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसके साथ ही कई महिलाओं को बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) होने लगता है या फिर यूरिन लीकेज यानी पेशाब पर कंट्रोल कम होने की समस्या भी देखने को मिलती है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसका मुख्य कारण शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का कम होना है। जब एस्ट्रोजन का स्तर गिरता है, तो योनि और यूरिनरी ट्रैक्ट की परत पतली और संवेदनशील हो जाती है। इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है और पेल्विक फ्लोर मांसपेशियां भी कमजोर हो सकती हैं। यही वजह है कि कई महिलाओं को खांसने, छींकने या हंसने पर भी यूरिन लीकेज महसूस होने लगता है।

क्यों बढ़ता है UTI का खतरा

पेरिमेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव यूरिनरी हेल्थ को प्रभावित करते हैं। जब यूरिनरी ट्रैक्ट की परत पतली हो जाती है, तो बैक्टीरिया आसानी से संक्रमण पैदा कर सकते हैं। इसी कारण 40 की उम्र के बाद कुछ महिलाओं में UTI का खतरा पहले की तुलना में ज्यादा हो जाता है।

पेल्विक मसल्स को मजबूत बनाना है जरूरी

इस समस्या से बचने के लिए डॉक्टर अक्सर कीगल एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं। यह एक्सरसाइज पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है, जिससे यूरिन को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। इसके अलावा सही खान-पान और कुछ हर्बल चीजें भी यूरिनरी हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।

हर्बल चाय भी हो सकती है फायदेमंद

न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार कुछ हर्बल चीजों से बनी चाय शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद कर सकती है। खासकर धनिया, सौंफ, शतावरी और कैमोमाइल से तैयार की गई हर्बल चाय यूरिनरी हेल्थ के लिए फायदेमंद मानी जाती है। धनिये के बीज प्राकृतिक रूप से ड्यूरेटिक की तरह काम करते हैं और पेशाब से जुड़ी जलन व संक्रमण को कम करने में मदद कर सकते हैं।शतावरी को आयुर्वेद में महिलाओं के हार्मोन संतुलन के लिए उपयोगी माना जाता है। यह पेल्विक मसल्स को मजबूत बनाने में भी सहायक हो सकती है। सौंफ के बीज यूरिनरी ट्रैक्ट की मांसपेशियों को आराम देने और सूजन कम करने में मदद करते हैं। कैमोमाइल नर्वस सिस्टम को शांत करने के साथ-साथ ब्लैडर से जुड़ी समस्याओं को कम करने में भी सहायक मानी जाती है।

हर्बल चाय बनाने का तरीका

इस चाय को बनाने के लिए एक पैन में एक बड़ा गिलास पानी डालें। इसमें 1-1 चम्मच धनिया और सौंफ के बीज डालें। इसके बाद थोड़ा सा शतावरी और 1 चम्मच कैमोमाइल टी मिलाएं। इसे तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए। फिर इसे छानकर गुनगुना पी सकते हैं। नियमित रूप से कुछ हफ्तों तक इसका सेवन करने से यूरिनरी हेल्थ को सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि, अगर UTI या यूरिन लीकेज की समस्या बार-बार हो रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सही इलाज और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इन समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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