पंजाब भाजपा के दिग्गज नेता रहे स्व: सतपाल गोसाईं का पोता अमित गोसाई भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कहकर शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। अमित गोसाईं को सुखबीर बादल ने अकाली दल में शामिल करवाया। सतपाल गोसाईं की मौत के बाद भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष गुरदेव शर्मा देबी उनके सेंट्रल हलके में एक्टिव हो गए। पार्टी ने उन्हें दो बार विधानसभा चुनाव लड़वा दिया। अमित गोसाईं उसके साथ ही सक्रिय राजनीति से दूर हो गए। अकाली दल ने उन्हें पार्टी में शामिल करके हलका सेंट्रल का इंचार्ज नियुक्त कर दिया। अमित गोसाईं ने शिअद में शामिल होकर हलका सेंटर का इंचार्ज बनने पर खुशी जाहिर की। अमित गोसाईं ने कहा कि वो अब शिअद में रहकर हलका सेंट्रल में अपने दादा स्व: सतपाल गोसाईं की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। अमित गोसाईं सक्रिय राजनीति में नहीं थे इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें प्रदेश प्रवक्ता नियुक्त किया था। इसके बावजूद वो पार्टी के कार्यक्रमों से लगातार दूर रहे। दरअसल वो लंबे समय से हलका सेंट्रल में सक्रिय होना चाहते थे लेकिन वहां पर कोषाध्यक्ष गुरदेव शर्मा देबी हलका इंचार्ज हैं। सेंट्रल हलके में हिंदू वोटर अकाली दल ने पिछले विधानसभा चुनाव में प्रीतपाल सिंह को उम्मीदवार बनाया। हलके में हिंदू वोटर्स ज्यादा होने के कारण अकाली दल इस हलके में हिंदू चेहरे को खड़ा करना चाहता है। सतपाल गोसाईं की लोकप्रियता को देखते हुए शिअद ने उनके पौते अमित गोसाईं को पार्टी में शामिल करते ही हलका इंचार्ज बना दिया। दादा ने भी छोड़ी थी एक दिन के लिए कांग्रेस सतपाल गोसाईं भारतीय जनता पार्टी के जमीनी स्तर से जुड़े नेता रहे हैं। वो आरएसएस के स्वयं सेवक भी रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी में रहते हुए शिअद भाजपा गठबंधन सरकार में वो डिप्टी स्पीकर और बाद में सेहत मंत्री भी रहे। जीवन के आखिरी काल में वो भाजपा से रूष्ट हुए और कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस में शामिल होने पर उनके समर्थकों ने भारी विरोध जताया और उसके बाद सतपाल गोसाईं ने फिर से भाजपा में वापसी की। एक दिन के लिए पार्टी बदलने के बाद से गोसाई परिवार की भाजपा में पकड़ हलकी होती गई। पब्लिक से जुड़े नेता था सतपाल गोसाईं सपताल गोसाईं जमीन से जुड़े नेता रहे और वो पब्लिक के लिए कहीं भी धरना देने से गुरेज नहीं करते थे। सपताल गोसाईं जब सामान्य कार्यकर्ता थे तब से एक दरी हर वक्त अपनी कार में रखते थे और जहां धरना लगाने की जरूरत पड़ती थी दरी बिछाकर बैठ जाते थे। मंत्री बनने तक भी दरी उनकी कार में रहती थी। शिअद को मिलेगा फायदा पार्टी में शामिल करते हुए सुखबीर बादल ने कहा कि सतपाल गोसाईं और प्रकाश सिंह बादल ने मिलकर काम किया है। उन्होंने कहा कि सतपाल गोसाईं एक जुझारू नेता रहे। अब उनके पौते शिअद में आ गए हैं इसका फायदा पार्टी को जरूर मिलेगा।


