सीतापुर में गौरक्षा और धार्मिक मुद्दों को लेकर निकाली जा रही गौ प्रतिष्ठा धर्म युद्ध यात्रा को लेकर सोमवार देर रात स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती नैमिषारण्य पहुंचे। मंगलवार सुबह यात्रा शुरू करने से पहले दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने उद्देश्य और यात्रा से जुड़े विवादों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का मुख्य लक्ष्य गौ माता की रक्षा करना है। अब जनता भी इस मुद्दे पर पूरी तरह जागरूक हो चुकी है। बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि देश में अब लोग स्पष्ट रूप से यह तय कर चुके हैं कि किसी भी परिस्थिति में गौ हत्या स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि यात्रा को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है और जगह-जगह लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। नैमिषारण्य के संतों से बातचीत को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने वहां के संतों से कोई संपर्क नहीं किया है, क्योंकि उनके अनुसार बहुत से संत भय के माहौल में हैं और वे उन्हें किसी विवाद या समस्या में नहीं डालना चाहते। उन्होंने कहा कि जो पहले से दबाव में हैं, उन्हें और परेशानी देना उचित नहीं है। शंकराचार्यों की संख्या को लेकर उठ रहे सवालों पर शंकराचार्य ने राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब असली शंकराचार्य उनके अनुसार राजनीतिक विचारों का समर्थन नहीं करते, तो “नकली शंकराचार्य” खड़े कर दिए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे असली शंकराचार्यों की गरिमा को जनता के बीच गिरा दिया जाए। आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों और यात्रा रोकने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि उनके विरोधी राजनीतिक लोगों द्वारा खड़े किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वह पहले ही गौ तस्करी के मामले में जेल जा चुके हैं तो वह क्यों गौ रक्षा की यात्रा को आगे बढ़ने देना चाहेंगे। शंकराचार्य ने आगे कहा कि कुछ राजनीतिक दल चाहते हैं कि देश के चारों शंकराचार्य उनके सुर में सुर मिलाएं, लेकिन जब ऐसा नहीं होता तो उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के प्रयास किए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ साजिश के तहत लोगों को आगे किया जा रहा है। देर रात नैमिषारण्य में सूर्यास्त के चलते शंकराचार्य ने मौन धारण किया था। इस दौरान उन्होंने ललिता देवी मंदिर और चक्रतीर्थ पर पूजन किया था। मंगलवार सुबह उनकी यात्रा फिर रवाना हो गई है। वही गौ प्रतिष्ठा धर्म युद्ध यात्रा को लेकर जहां समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है, वहीं विरोध और आरोप-प्रत्यारोप के चलते यह यात्रा राजनीतिक और धार्मिक बहस का विषय भी बनती जा रही है।


