‘विकास होगा, लेकिन धार्मिक परंपराओं से छेड़छाड़ नहीं’:गयाजी में विष्णुपद कॉरिडोर को लेकर मंथन; वेदियां रहेंगी जस की तस, पिंडदान की परंपरा भी नहीं बदलेगी

‘विकास होगा, लेकिन धार्मिक परंपराओं से छेड़छाड़ नहीं’:गयाजी में विष्णुपद कॉरिडोर को लेकर मंथन; वेदियां रहेंगी जस की तस, पिंडदान की परंपरा भी नहीं बदलेगी

विश्व प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर के आसपास प्रस्तावित विष्णुपद कॉरिडोर को लेकर सोमवार को जिला मुख्यालय में लंबी बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता डीएम शशांक शुभंकर ने की। इसमें नगर निगम, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पंडा-पुरोहित, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के लोग भी शामिल हुए। करीब दो घंटे तक चली चर्चा में एक बात साफ रही—विकास होगा, लेकिन सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। बैठक में सबसे पहले पिछली बैठक में लिए गए फैसलों की समीक्षा की गई। तय किया गया कि विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर स्थित 16 वेदियों को किसी भी हालत में नहीं हटाया जाएगा। ये वेदियां मंदिर की धार्मिक परंपरा का अहम हिस्सा हैं, इसलिए इन्हें यथावत रखा जाएगा। पिंडदान की व्यवस्था को लेकर लिया गया स्पष्ट निर्णय पिंडदान की व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट निर्णय लिया गया। कहा गया कि पिंडदान की सदियों पुरानी परंपरा फल्गु नदी के तट पर ही जारी रहेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के लिए वहां छायादार शेड और बेहतर इंतजाम किए जाएंगे, लेकिन कर्मकांड की मूल व्यवस्था नहीं बदलेगी। बैठक में मंदिर परिसर के विस्तार पर भी चर्चा हुई। जरूरत के अनुसार आसपास के इलाके को विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया। वहीं मंदिर के पास स्थित सिजुआर धर्मशाला को विरासत भवन के रूप में संरक्षित रखने की बात सामने आई। इसके साथ ही आसपास के अन्य पुराने भवनों की पहचान कर उन्हें भी हेरिटेज स्ट्रक्चर के रूप में सुरक्षित रखने का सुझाव दिया गया। मंदिर क्षेत्र के दुकानदारों को व्यवस्थित करने की योजना पर भी चर्चा कॉरिडोर के तहत मंदिर क्षेत्र के दुकानदारों और फेरीवालों को व्यवस्थित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। प्रशासन चाहता है कि श्रद्धालुओं को भीड़ और अव्यवस्था से राहत मिले, इसलिए दुकानों को तय व्यवस्था में शिफ्ट किया जाएगा। प्रस्तावित कॉरिडोर में कई आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी। इनमें कैस्केड लाइटिंग, शुद्ध पेयजल, शौचालय, चेंजिंग रूम, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, भूमिगत ड्रेनेज, सीसीटीवी निगरानी, पुलिस सहायता केंद्र, फायर स्टेशन, हेल्प डेस्क और पार्किंग की व्यवस्था शामिल है। साथ ही सीताकुंड, मंगलागौरी और अक्षयवट को भी इस परियोजना से जोड़ने पर सहमति बनी। फल्गु नदी के बीच में भगवान विष्णु की स्थापित होगी भव्य प्रतिमा बैठक में यह सुझाव भी आया कि फल्गु नदी के मध्य भाग में भगवान विष्णु की एक भव्य प्रतिमा स्थापित करने की संभावना पर विचार किया जाए। वहीं नदी के पानी को स्वच्छ बनाए रखने के लिए एरेटर लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया। चर्चा के दौरान पंडा-पुरोहितों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने कहा कि गया की पहचान पितृपक्ष और पिंडदान से जुड़ी है। इसलिए विकास के हर कदम में इस परंपरा की पवित्रता बनी रहनी चाहिए। प्रशासन ने भी भरोसा दिलाया कि विष्णुपद कॉरिडोर का निर्माण गया की धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए ही किया जाएगा। विश्व प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर के आसपास प्रस्तावित विष्णुपद कॉरिडोर को लेकर सोमवार को जिला मुख्यालय में लंबी बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता डीएम शशांक शुभंकर ने की। इसमें नगर निगम, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पंडा-पुरोहित, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के लोग भी शामिल हुए। करीब दो घंटे तक चली चर्चा में एक बात साफ रही—विकास होगा, लेकिन सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। बैठक में सबसे पहले पिछली बैठक में लिए गए फैसलों की समीक्षा की गई। तय किया गया कि विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर स्थित 16 वेदियों को किसी भी हालत में नहीं हटाया जाएगा। ये वेदियां मंदिर की धार्मिक परंपरा का अहम हिस्सा हैं, इसलिए इन्हें यथावत रखा जाएगा। पिंडदान की व्यवस्था को लेकर लिया गया स्पष्ट निर्णय पिंडदान की व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट निर्णय लिया गया। कहा गया कि पिंडदान की सदियों पुरानी परंपरा फल्गु नदी के तट पर ही जारी रहेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के लिए वहां छायादार शेड और बेहतर इंतजाम किए जाएंगे, लेकिन कर्मकांड की मूल व्यवस्था नहीं बदलेगी। बैठक में मंदिर परिसर के विस्तार पर भी चर्चा हुई। जरूरत के अनुसार आसपास के इलाके को विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया। वहीं मंदिर के पास स्थित सिजुआर धर्मशाला को विरासत भवन के रूप में संरक्षित रखने की बात सामने आई। इसके साथ ही आसपास के अन्य पुराने भवनों की पहचान कर उन्हें भी हेरिटेज स्ट्रक्चर के रूप में सुरक्षित रखने का सुझाव दिया गया। मंदिर क्षेत्र के दुकानदारों को व्यवस्थित करने की योजना पर भी चर्चा कॉरिडोर के तहत मंदिर क्षेत्र के दुकानदारों और फेरीवालों को व्यवस्थित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। प्रशासन चाहता है कि श्रद्धालुओं को भीड़ और अव्यवस्था से राहत मिले, इसलिए दुकानों को तय व्यवस्था में शिफ्ट किया जाएगा। प्रस्तावित कॉरिडोर में कई आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी। इनमें कैस्केड लाइटिंग, शुद्ध पेयजल, शौचालय, चेंजिंग रूम, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, भूमिगत ड्रेनेज, सीसीटीवी निगरानी, पुलिस सहायता केंद्र, फायर स्टेशन, हेल्प डेस्क और पार्किंग की व्यवस्था शामिल है। साथ ही सीताकुंड, मंगलागौरी और अक्षयवट को भी इस परियोजना से जोड़ने पर सहमति बनी। फल्गु नदी के बीच में भगवान विष्णु की स्थापित होगी भव्य प्रतिमा बैठक में यह सुझाव भी आया कि फल्गु नदी के मध्य भाग में भगवान विष्णु की एक भव्य प्रतिमा स्थापित करने की संभावना पर विचार किया जाए। वहीं नदी के पानी को स्वच्छ बनाए रखने के लिए एरेटर लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया। चर्चा के दौरान पंडा-पुरोहितों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने कहा कि गया की पहचान पितृपक्ष और पिंडदान से जुड़ी है। इसलिए विकास के हर कदम में इस परंपरा की पवित्रता बनी रहनी चाहिए। प्रशासन ने भी भरोसा दिलाया कि विष्णुपद कॉरिडोर का निर्माण गया की धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए ही किया जाएगा।  

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