सीमांचल-कोसी को लेकर सांसद पप्पू यादव का दावा:बोले- केंद्र शासित प्रदेश बनाने की साजिश चल रही है, नीतीश को साइडलाइन करना इसका हिस्सा

सीमांचल-कोसी को लेकर सांसद पप्पू यादव का दावा:बोले- केंद्र शासित प्रदेश बनाने की साजिश चल रही है, नीतीश को साइडलाइन करना इसका हिस्सा

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि सीमांचल-कोसी, झारखंड के 3 जिले और बंगाल के 6 जिलों को मिलकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की साजिश चल रही है। नीतीश कुमार को सीएम की कुर्सी से साइडलाइन करना भी इसका एक हिस्सा है। हाल के दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं, वे महज संयोग नहीं हो सकती। सीमांचल और कोसी क्षेत्र को लेकर कोई बड़ी राजनीतिक योजना बनाई जा रही है, जिसे लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिंहा उनकी बातों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जबकि कई घटनाएं ऐसी हुई हैं। होली के दिन सीएम को हटाने की चर्चा तेज हो गई पप्पू यादव ने कहा कि अब तक यह परंपरा रही है कि होली के दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी बहन से मिलने उनके घर जाते थे, लेकिन इस बार वे किसी भी पारिवारिक कार्यक्रम में नहीं गए। आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति बनी कि होली के दिन ही मुख्यमंत्री को पद से हटाने की चर्चा तेज हो गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमांचल क्षेत्र में लगातार तीन दिनों तक प्रवास किया। पिछले करीब 12 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी केंद्रीय मंत्री ने सीमांचल में तीन दिन का प्रवास किया हो। इस दौरे के दौरान क्षेत्र के विकास, विशेष पैकेज, मक्का-मखाना जैसे स्थानीय उत्पादों या आर्थिक मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हुई। बल्कि मुख्य रूप से घुसपैठ, सीमा के दस किलोमीटर क्षेत्र और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर ही बात की गई। सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए सांसद ने आगे कहा कि इन सभी घटनाओं के बाद अचानक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाने की चर्चा सामने आई, जिससे कई तरह के संदेह पैदा होते हैं। ऐसा लगता है कि सीएम नीतीश कुमार को कुर्सी से हटाने की स्क्रिप्ट पहले से तैयार थी और राजनीतिक घटनाक्रम उसी दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। सीमांचल और कोसी के सात जिलों के साथ झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों को मिलाकर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना है। अगर सीमांचल को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की कोशिश की जाती है तो केंद्र सरकार को उनकी लाश से गुजरना होगा। हालांकि अगर सीमांचल, कोसी और मिथिला को मिलाकर एक नया राज्य बनाया जाता है और उसमें स्थानीय लोगों का नेतृत्व होता है, तो वे इसका स्वागत करेंगे। बिहार को कमजोर करने या उसके हिस्सों को अलग करने की किसी भी कोशिश का वे आगे भी विरोध करेंगे। सरकार को इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि सीमांचल-कोसी, झारखंड के 3 जिले और बंगाल के 6 जिलों को मिलकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की साजिश चल रही है। नीतीश कुमार को सीएम की कुर्सी से साइडलाइन करना भी इसका एक हिस्सा है। हाल के दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं, वे महज संयोग नहीं हो सकती। सीमांचल और कोसी क्षेत्र को लेकर कोई बड़ी राजनीतिक योजना बनाई जा रही है, जिसे लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिंहा उनकी बातों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जबकि कई घटनाएं ऐसी हुई हैं। होली के दिन सीएम को हटाने की चर्चा तेज हो गई पप्पू यादव ने कहा कि अब तक यह परंपरा रही है कि होली के दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी बहन से मिलने उनके घर जाते थे, लेकिन इस बार वे किसी भी पारिवारिक कार्यक्रम में नहीं गए। आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति बनी कि होली के दिन ही मुख्यमंत्री को पद से हटाने की चर्चा तेज हो गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमांचल क्षेत्र में लगातार तीन दिनों तक प्रवास किया। पिछले करीब 12 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी केंद्रीय मंत्री ने सीमांचल में तीन दिन का प्रवास किया हो। इस दौरे के दौरान क्षेत्र के विकास, विशेष पैकेज, मक्का-मखाना जैसे स्थानीय उत्पादों या आर्थिक मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हुई। बल्कि मुख्य रूप से घुसपैठ, सीमा के दस किलोमीटर क्षेत्र और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर ही बात की गई। सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए सांसद ने आगे कहा कि इन सभी घटनाओं के बाद अचानक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाने की चर्चा सामने आई, जिससे कई तरह के संदेह पैदा होते हैं। ऐसा लगता है कि सीएम नीतीश कुमार को कुर्सी से हटाने की स्क्रिप्ट पहले से तैयार थी और राजनीतिक घटनाक्रम उसी दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। सीमांचल और कोसी के सात जिलों के साथ झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों को मिलाकर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना है। अगर सीमांचल को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की कोशिश की जाती है तो केंद्र सरकार को उनकी लाश से गुजरना होगा। हालांकि अगर सीमांचल, कोसी और मिथिला को मिलाकर एक नया राज्य बनाया जाता है और उसमें स्थानीय लोगों का नेतृत्व होता है, तो वे इसका स्वागत करेंगे। बिहार को कमजोर करने या उसके हिस्सों को अलग करने की किसी भी कोशिश का वे आगे भी विरोध करेंगे। सरकार को इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।  

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