राजस्थान में अब ‘एक राज्य, एक ग्रामीण बैंक’ की नीति पूरी तरह लागू हो गई है। प्रदेश में पहले से काम कर रहे ‘बड़ौदा राजस्थान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक’ और ‘राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक’ को आपस में मिला दिया गया है। इन दोनों के विलय से अब ‘राजस्थान ग्रामीण बैंक’ (RGB) अस्तित्व में आ गया है। इस नए बैंक ने 1 मई 2025 से अपना कामकाज भी शुरू कर दिया है। इससे अब पूरे प्रदेश में ग्रामीण बैंकिंग का एक बड़ा और मजबूत नेटवर्क तैयार हो गया है। उदयपुर सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत के सवाल पर वित्त मंत्रालय की ओर से राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने विस्तार से जानकारी दी है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण बैंकों के विलय से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं में भी बड़ा बदलाव आएगा। सांसद रावत ने सरकार से सरकार से ‘एक राज्य, एक ग्रामीण बैंक’ की नीति पर स्थिति पूछी थी। देशभर में 43 से घटकर 28 रह गए ग्रामीण बैंक
सांसद ने सदन में यह जानना चाहा था कि आखिर इस नीति का मकसद क्या है और अब तक कितने राज्यों में विलय हो चुका है। सरकार ने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत देशभर के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्रामीण बैंकों का विलय किया गया है। इनमें राजस्थान के अलावा आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इस बड़ी कवायद के बाद अब देश में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) की कुल संख्या 43 से घटकर मात्र 28 रह गई है। विलय से ग्रामीणों को क्या होगा फायदा?
विलय के बाद ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सरकार ने बताया कि बैंकों के आपस में मिलने से उनका पूंजी आधार (कैपिटल बेस) मजबूत होगा। इससे बैंक अब बड़े कर्ज देने और मंदी जैसी स्थितियों का सामना करने में सक्षम होंगे। इसके साथ ही, अब गांव के किसानों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को डिजिटल बैंकिंग की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि इस कदम से बैंकों के संचालन का खर्च कम होगा और वे नई तकनीक को आसानी से अपना सकेंगे, जिसका सीधा फायदा ग्राहकों को बेहतर सेवाओं के रूप में मिलेगा। कर्मचारियों की नौकरी रहेगी सुरक्षित
कर्मचारियों की नौकरी पर सरकार ने साफ किया है कि विलय होने वाले पुराने बैंकों के सभी कर्मचारियों की सेवा निरंतर जारी रहेगी। यानी किसी की नौकरी नहीं जाएगी, बल्कि उन्हें नए और बड़े बैंकिंग ढांचे में काम करने का बेहतर अवसर मिलेगा। कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों ने इस नीति पर अपने सुझाव भी दिए थे, जिसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने परामर्श के बाद ही यह फैसला लिया है। अब राजस्थान सहित अन्य राज्यों में ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था एक नए और आधुनिक स्वरूप में नजर आएगी।


