पटना के पहले अंतरराष्ट्रीय हॉकी ग्राउंड का निर्माण अंतिम चरण में है। इसमें नीदरलैंड से मंगाई गई पॉलीटेन ब्लू एस्ट्रोटर्फ लगाई जाएगी। पॉलीटेन ब्लू एस्ट्रोटर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर की सबसे लेटेस्ट टर्फ है। राजगीर के बाद अब राजधानी के हॉकी ग्राउंड में भी एस्ट्रोटर्फ लगाया जाएगा। इस पूरे ग्राउंड को 8.44 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है। यह बिहार का दूसरा इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का हॉकी मैदान होगा। इसका काम मार्च अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मैदान में स्प्रिंकलर सिस्टम लगना बाकी इसका निर्माण राजेंद्र नगर फिजिकल कॉलेज की खाली जमीन पर हो रहा है। यह ग्राउंड 99 मीटर लंबी और 60 मीटर चौड़ी है। अभी स्प्रिंकलर सिस्टम लगना बाकी है। इसमें फ्लडलाइट्स, खिलाड़ियों के लिए छात्रावास, चेंजिंग रूम, वार्म-अप क्षेत्र, और दर्शकों के बैठने के लिए स्टैंड होंगे। इसके बनने से खिलाड़ियों का नियमित अभ्यास शुरू हो सकेगा। हालांकि, अभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के आयोजन में एक साल से अधिक का समय लग सकता है। इस ग्राउंड तक पहुंचने के लिए फिलहाल सीधी सड़क नहीं है। दलदली जमीन पर बनाया जा रहा अंतरराष्ट्रीय हॉकी ग्राउंड जिस जमीन पर अंतरराष्ट्रीय हॉकी ग्राउंड बवननाया जा रहा है, पहले दलदली जमीन हुआ करती थी। यह लगभग 2 मीटर तक पानी में डूबा दलदली एरिया हुआ करता था। चारों ओर से लगातार पानी रिसाव, 3 मीटर तक ऊंची घास और दलदल की कई परतों के कारण यह मैदान वर्षों तक किसी भी खेल गतिविधि के लायक नहीं था। मैदान को खेलने योग्य बनाने के लिए हजारों ट्रॉली विशेष मिट्टी मंगाई गई है। दलदली पॉकेट्स को हटाने के लिए मशीनों से खुदाई कर रबल भरकर मैदान को स्थिर किया गया है। पटना के पहले अंतरराष्ट्रीय हॉकी ग्राउंड का निर्माण अंतिम चरण में है। इसमें नीदरलैंड से मंगाई गई पॉलीटेन ब्लू एस्ट्रोटर्फ लगाई जाएगी। पॉलीटेन ब्लू एस्ट्रोटर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर की सबसे लेटेस्ट टर्फ है। राजगीर के बाद अब राजधानी के हॉकी ग्राउंड में भी एस्ट्रोटर्फ लगाया जाएगा। इस पूरे ग्राउंड को 8.44 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है। यह बिहार का दूसरा इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का हॉकी मैदान होगा। इसका काम मार्च अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मैदान में स्प्रिंकलर सिस्टम लगना बाकी इसका निर्माण राजेंद्र नगर फिजिकल कॉलेज की खाली जमीन पर हो रहा है। यह ग्राउंड 99 मीटर लंबी और 60 मीटर चौड़ी है। अभी स्प्रिंकलर सिस्टम लगना बाकी है। इसमें फ्लडलाइट्स, खिलाड़ियों के लिए छात्रावास, चेंजिंग रूम, वार्म-अप क्षेत्र, और दर्शकों के बैठने के लिए स्टैंड होंगे। इसके बनने से खिलाड़ियों का नियमित अभ्यास शुरू हो सकेगा। हालांकि, अभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के आयोजन में एक साल से अधिक का समय लग सकता है। इस ग्राउंड तक पहुंचने के लिए फिलहाल सीधी सड़क नहीं है। दलदली जमीन पर बनाया जा रहा अंतरराष्ट्रीय हॉकी ग्राउंड जिस जमीन पर अंतरराष्ट्रीय हॉकी ग्राउंड बवननाया जा रहा है, पहले दलदली जमीन हुआ करती थी। यह लगभग 2 मीटर तक पानी में डूबा दलदली एरिया हुआ करता था। चारों ओर से लगातार पानी रिसाव, 3 मीटर तक ऊंची घास और दलदल की कई परतों के कारण यह मैदान वर्षों तक किसी भी खेल गतिविधि के लायक नहीं था। मैदान को खेलने योग्य बनाने के लिए हजारों ट्रॉली विशेष मिट्टी मंगाई गई है। दलदली पॉकेट्स को हटाने के लिए मशीनों से खुदाई कर रबल भरकर मैदान को स्थिर किया गया है।


