मुजफ्फरपुर की प्राची हनी को UPSC में 28वीं रैंक:3 बार प्रीलिम्स में फेल हुई थी; इंटरव्यू में ट्रैवलिंग-हॉबी पर पूछे गए सवाल

मुजफ्फरपुर की प्राची हनी को UPSC में 28वीं रैंक:3 बार प्रीलिम्स में फेल हुई थी; इंटरव्यू में ट्रैवलिंग-हॉबी पर पूछे गए सवाल

बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली प्राची हनी ने (UPSC) की परीक्षा में 28वां रैंक हासिल किया है। रविवार को प्राची मुजफ्फरपुर पहुंची, जहां परिवार और मोहल्ले वालों ने उनका ढ़ोल नगारे और फूलों से किया। प्राची मुजफ्फरपुर के पड़ाव पोखर लेन 4B की रहने वाली हैं। उनके पिता रजनीकांत वर्मा बोचहां के खालीकपुर मिडिल स्कूल में हेडमास्टर हैं, जबकि उनकी मां चेतना कुमारी तिरहुत एकेडमी में शिक्षिका हैं। प्राची दो बहनों में बड़ी हैं। बचपन से ही उनके पिता का सपना था कि उनकी बेटी एक दिन IAS अधिकारी बने, और इसी सपने को सच करने के लिए प्राची लगातार प्रयास करती रहीं। यूपीएससी में चौथे प्रयास में सफलता मिली प्राची को यूपीएससी में चौथे प्रयास में सफलता मिली है। इससे पहले 3 बार प्रीलिम्स में भी प्राची पास नहीं कर पाई थी। इस बीच प्राची ने बीपीएससी 69वीं की परीक्षा भी दी। जिसमें उन्हें 92वां स्थान प्राप्त हुआ। उनकी सफलता की इस पूरी जर्नी पर दैनिक भास्कर ने उनसे बात की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…. मुजफ्फरपुर से शुरू हुई शिक्षा की यात्रा प्राची की प्रारंभिक शिक्षा मुजफ्फरपुर से ही हुई। उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई DAV पब्लिक स्कूल से पूरी की। इसके बाद 12वीं की पढ़ाई होली क्रॉस पब्लिक स्कूल, मुजफ्फरपुर से पूरी की। स्कूल की पढ़ाई खत्म होने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली चली गईं। वहां उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज से भूगोल विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। ग्रेजुएशन के बाद से ही उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू कर दी। चौथे प्रयास में मिली सफलता प्राची ने बताया कि UPSC में यह उनका चौथा प्रयास था। पहले तीन प्रयासों में वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) भी पार नहीं कर सकी थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और तैयारी जारी रखी। चौथे प्रयास में उन्होंने पहली बार मेन्स और इंटरव्यू दिया और सीधे 28वां रैंक हासिल कर लिया। BPSC में भी मिला था 92वां रैंक UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने 69वीं BPSC परीक्षा भी दी थी, जिसमें उन्हें 92वां रैंक प्राप्त हुआ था। हालांकि उनके मन में शुरू से ही UPSC का लक्ष्य था, इसलिए उन्होंने BPSC की नौकरी ज्वाइन नहीं की और पूरी तरह UPSC की तैयारी में जुटी रहीं। मेंटर्स और परिवार से मिला हौसला लगातार असफलताओं के बावजूद प्राची का हौसला नहीं टूटा। वह बताती हैं कि उनके मेंटर्स उन्हें लगातार मोटिवेट करते थे। उनका कहना था कि प्राची की आंसर राइटिंग स्किल बहुत अच्छी है, बस एक बार अगर वह प्रीलिम्स का बैरियर पार कर लें तो सफलता निश्चित है। इस पूरी यात्रा में उनके माता-पिता और परिवार का सबसे बड़ा सहयोग रहा। इंटरव्यू में ट्रैवलिंग-हॉबी पर पूछे गए सवाल प्राची की हॉबी ट्रैवलिंग है, इसलिए इंटरव्यू में उनसे इसी से जुड़े सवाल पूछे गए। उनसे पूछा गया कि अगर भारत के बाहर किसी एक देश को चुनना पड़े तो वह किस देश को चुनेंगी। इस पर उन्होंने आइसलैंड का नाम लिया। इसके बाद उनसे पूछा गया कि आइसलैंड की ऐसी कौन-सी तीन चीजें हैं जिन्हें वह मुजफ्फरपुर में लागू करना चाहेंगी। प्राची के जवाब से इंटरव्यू बोर्ड काफी संतुष्ट हुआ। सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी UPSC की तैयारी के दौरान प्राची ने खुद को सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रखा। उन्होंने बताया कि वह किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नहीं थीं और फोन पर भी इंटरनेट का बहुत कम इस्तेमाल करती थीं। यहां तक कि BPSC का रिजल्ट आने के बाद ही उन्होंने व्हाट्सएप का इस्तेमाल शुरू किया। कोचिंग के साथ सेल्फ स्टडी पर दिया जोर प्राची बताती हैं कि उन्होंने दिल्ली में फाउंडेशन कोर्स और कोचिंग के साथ-साथ लगातार सेल्फ स्टडी की। उनका मानना है कि UPSC की तैयारी में आत्म-अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण होता है। अभ्यर्थियों को दिया यह संदेश UPSC की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्राची का संदेश है कि सबसे पहले सिलेबस को अच्छी तरह समझें और लगातार देखें कि UPSC क्या मांग कर रहा है। अगर अभ्यर्थी सिलेबस और परीक्षा के पैटर्न को ध्यान में रखकर तैयारी करेंगे तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली प्राची हनी ने (UPSC) की परीक्षा में 28वां रैंक हासिल किया है। रविवार को प्राची मुजफ्फरपुर पहुंची, जहां परिवार और मोहल्ले वालों ने उनका ढ़ोल नगारे और फूलों से किया। प्राची मुजफ्फरपुर के पड़ाव पोखर लेन 4B की रहने वाली हैं। उनके पिता रजनीकांत वर्मा बोचहां के खालीकपुर मिडिल स्कूल में हेडमास्टर हैं, जबकि उनकी मां चेतना कुमारी तिरहुत एकेडमी में शिक्षिका हैं। प्राची दो बहनों में बड़ी हैं। बचपन से ही उनके पिता का सपना था कि उनकी बेटी एक दिन IAS अधिकारी बने, और इसी सपने को सच करने के लिए प्राची लगातार प्रयास करती रहीं। यूपीएससी में चौथे प्रयास में सफलता मिली प्राची को यूपीएससी में चौथे प्रयास में सफलता मिली है। इससे पहले 3 बार प्रीलिम्स में भी प्राची पास नहीं कर पाई थी। इस बीच प्राची ने बीपीएससी 69वीं की परीक्षा भी दी। जिसमें उन्हें 92वां स्थान प्राप्त हुआ। उनकी सफलता की इस पूरी जर्नी पर दैनिक भास्कर ने उनसे बात की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…. मुजफ्फरपुर से शुरू हुई शिक्षा की यात्रा प्राची की प्रारंभिक शिक्षा मुजफ्फरपुर से ही हुई। उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई DAV पब्लिक स्कूल से पूरी की। इसके बाद 12वीं की पढ़ाई होली क्रॉस पब्लिक स्कूल, मुजफ्फरपुर से पूरी की। स्कूल की पढ़ाई खत्म होने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली चली गईं। वहां उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज से भूगोल विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। ग्रेजुएशन के बाद से ही उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू कर दी। चौथे प्रयास में मिली सफलता प्राची ने बताया कि UPSC में यह उनका चौथा प्रयास था। पहले तीन प्रयासों में वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) भी पार नहीं कर सकी थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और तैयारी जारी रखी। चौथे प्रयास में उन्होंने पहली बार मेन्स और इंटरव्यू दिया और सीधे 28वां रैंक हासिल कर लिया। BPSC में भी मिला था 92वां रैंक UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने 69वीं BPSC परीक्षा भी दी थी, जिसमें उन्हें 92वां रैंक प्राप्त हुआ था। हालांकि उनके मन में शुरू से ही UPSC का लक्ष्य था, इसलिए उन्होंने BPSC की नौकरी ज्वाइन नहीं की और पूरी तरह UPSC की तैयारी में जुटी रहीं। मेंटर्स और परिवार से मिला हौसला लगातार असफलताओं के बावजूद प्राची का हौसला नहीं टूटा। वह बताती हैं कि उनके मेंटर्स उन्हें लगातार मोटिवेट करते थे। उनका कहना था कि प्राची की आंसर राइटिंग स्किल बहुत अच्छी है, बस एक बार अगर वह प्रीलिम्स का बैरियर पार कर लें तो सफलता निश्चित है। इस पूरी यात्रा में उनके माता-पिता और परिवार का सबसे बड़ा सहयोग रहा। इंटरव्यू में ट्रैवलिंग-हॉबी पर पूछे गए सवाल प्राची की हॉबी ट्रैवलिंग है, इसलिए इंटरव्यू में उनसे इसी से जुड़े सवाल पूछे गए। उनसे पूछा गया कि अगर भारत के बाहर किसी एक देश को चुनना पड़े तो वह किस देश को चुनेंगी। इस पर उन्होंने आइसलैंड का नाम लिया। इसके बाद उनसे पूछा गया कि आइसलैंड की ऐसी कौन-सी तीन चीजें हैं जिन्हें वह मुजफ्फरपुर में लागू करना चाहेंगी। प्राची के जवाब से इंटरव्यू बोर्ड काफी संतुष्ट हुआ। सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी UPSC की तैयारी के दौरान प्राची ने खुद को सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रखा। उन्होंने बताया कि वह किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नहीं थीं और फोन पर भी इंटरनेट का बहुत कम इस्तेमाल करती थीं। यहां तक कि BPSC का रिजल्ट आने के बाद ही उन्होंने व्हाट्सएप का इस्तेमाल शुरू किया। कोचिंग के साथ सेल्फ स्टडी पर दिया जोर प्राची बताती हैं कि उन्होंने दिल्ली में फाउंडेशन कोर्स और कोचिंग के साथ-साथ लगातार सेल्फ स्टडी की। उनका मानना है कि UPSC की तैयारी में आत्म-अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण होता है। अभ्यर्थियों को दिया यह संदेश UPSC की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्राची का संदेश है कि सबसे पहले सिलेबस को अच्छी तरह समझें और लगातार देखें कि UPSC क्या मांग कर रहा है। अगर अभ्यर्थी सिलेबस और परीक्षा के पैटर्न को ध्यान में रखकर तैयारी करेंगे तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *