करनाल पशु मेले में चन्नो गाय बनी चैंपियन:77.977 किलो दूध देकर जीता खिताब,मुर्रा में भैंस बाणी ने 31.140 किलो दूध देकर पाया पहला स्थान

करनाल पशु मेले में चन्नो गाय बनी चैंपियन:77.977 किलो दूध देकर जीता खिताब,मुर्रा में भैंस बाणी ने 31.140 किलो दूध देकर पाया पहला स्थान

करनाल की राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) में आयोजित दुग्ध प्रतियोगिता में पशुपालकों ने अपने पशुओं की क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में झिंझाड़ी गांव के डेयरी फार्म की गाय चन्नो ने 24 घंटे में 77.977 किलोग्राम दूध देकर चैंपियन का खिताब हासिल किया। वहीं झज्जर जिले के सुंदरेठी गांव के पशुपालक अजय कुमार की मुर्रा नस्ल की भैंस बाणी ने 31.140 किलोग्राम दूध देकर अपनी श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता में अलग-अलग नस्लों के पशुओं ने हिस्सा लिया और दूध उत्पादन के आधार पर विजेताओं का चयन किया गया। झिंझाड़ी के पशुपालकों की मेहनत रंग लाई
झिंझाड़ी निवासी पशुपालक सुनील मेहला ने बताया कि उनके डेयरी फार्म का नाम सिल्लु और शैंकी डेयरी फार्म है। यहां करीब 200 पशु हैं और परिवार पिछले कई वर्षों से डेयरी व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि 2016 से उन्होंने डेयरी का काम शुरू किया और 2018 से अलग-अलग डेयरी मेलों में भाग लेना शुरू किया।
इस बार प्रतियोगिता में वे पांच गाय लेकर पहुंचे थे। इनमें से एक गाय ने करीब 78 लीटर दूध दिया, जबकि बाकी चार गायों ने 75 लीटर से अधिक दूध दिया। इन सभी गायों ने प्रतियोगिता में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया। पशुओं के खान-पान और आराम का रखते हैं पूरा ध्यान
सुनील मेहला ने बताया कि उनकी डेयरी में पशुओं की देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाता है। पशुओं को साइलेज, हरा चारा, फीड और तूड़ी दी जाती है। इसके अलावा गर्मी से बचाने के लिए भी विशेष इंतजाम किए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि मेले के दौरान भी गायों के पास कूलर लगाए जाते हैं ताकि वे आराम महसूस करें और सही तरीके से दूध दे सकें। डेयरी फार्म पर स्प्रिंकलर सिस्टम भी लगाया गया है और पशुओं को खुले में घूमने के लिए पर्याप्त जगह दी जाती है, जिससे वे अपनी इच्छा के अनुसार घूम सकें और तनाव मुक्त रहें। गायों को खरीदने के कई ऑफर आए, लेकिन बेचने का मन नहीं
सुनील मेहला ने बताया कि उनकी गायों के अच्छे प्रदर्शन के कारण कई बार उन्हें खरीदने के ऑफर भी मिल चुके हैं। इसके बावजूद वे इन गायों को बेचने के लिए तैयार नहीं होते।
उन्होंने कहा कि इन गायों की वजह से उनका और उनके गांव का नाम देशभर में रोशन हो रहा है। इसलिए वे इन पशुओं को परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं और उन्हें बेचने के बजाय उनकी बेहतर ब्रीडिंग और देखभाल पर ध्यान देते हैं। पिछले साल सोनी ने बनाया था एशिया का रिकॉर्ड
सुनील मेहला की डेयरी फार्म की ही गाय सोनी ने पिछले वर्ष 24 घंटे में 87 किलो 740 ग्राम दूध देकर एशिया में सबसे ज्यादा दूध देने वाली गाय का रिकॉर्ड बनाया था। यह उपलब्धि भी राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल में आयोजित डेयरी मेले के दौरान दर्ज की गई थी।
उस प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रहने वाली गाय ने 70 किलो 548 ग्राम दूध दिया था। खास बात यह रही कि दोनों गायें एक ही किसान सुनील मेहला की थीं और दोनों हॉल्स्टीन फ्रिसियन नस्ल की गायें थीं।
इस उपलब्धि को इसलिए भी खास माना गया क्योंकि उनकी डेयरी की गाय ने लगातार दूसरी बार अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इस बार दूध कम, फिर भी जीत हासिल
सुनील मेहला ने बताया कि इस बार उनकी गाय ने पिछले साल की तुलना में कम दूध दिया, लेकिन इसके बावजूद वह प्रतियोगिता में विजेता रही। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में कई अच्छे पशु आए थे, लेकिन उनकी गाय ने दूध उत्पादन के मामले में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। 2017 से प्रतियोगिताओं में बना रहे पहचान
सुनील ने बताया कि उनके दादा और पिता भी लंबे समय से पशुपालन के काम से जुड़े रहे हैं। परिवार की इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ग्रेजुएशन के बाद नौकरी करने के बजाय पशुपालन को ही अपना पेशा बना लिया।
उन्होंने वर्ष 2014 में खुद की ब्रीडिंग शुरू की और 2017 में पहली बार डेयरी प्रतियोगिताओं में भाग लेने का फैसला किया। इसके बाद से वे लगातार अलग-अलग मेलों में हिस्सा लेकर पुरस्कार जीतते आ रहे हैं। कुरुक्षेत्र के मेले में भी जीत चुके कई पुरस्कार
सुनील मेहला ने बताया कि कुरुक्षेत्र में लगने वाले डेयरी मेले में उन्होंने छह बार हिस्सा लिया है। हालांकि इस बार उन्होंने वहां हिस्सा नहीं लिया था।
पिछले छह मेलों में उनकी गाय एक बार दूसरे स्थान पर रही, जबकि पांच बार प्रथम स्थान हासिल कर चुकी है। इसी तरह एनडीआरआई में भी वे वर्ष 2017 से लगातार भाग लेते आ रहे हैं। यहां दो बार उनकी गाय दूसरे स्थान पर रही, लेकिन उसके बाद हर बार उनकी गायें प्रथम स्थान पर आती रही हैं।
हर साल पैदा होते हैं 30 से 35 बछड़े
सुनील के भाई शैंकी ने बताया कि उनके डेयरी फार्म पर हर साल करीब 30 से 35 बछड़े और बछड़ियां पैदा होती हैं। इनमें से 10 से 15 गायों को बेच दिया जाता है, लेकिन जो गायें रिकॉर्ड बनाती हैं या विशेष क्षमता रखती हैं, उन्हें किसी भी हालत में नहीं बेचा जाता।
उन्होंने बताया कि सोनी जैसी गायों की ब्रीडिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में दूध उत्पादन और भी ज्यादा बढ़ सके। डेयरी से अच्छी आमदनी, दूध नेस्ले को बेचते हैं
सुनील मेहला ने बताया कि उनके पास 100 से ज्यादा पशु हैं, जिनमें ज्यादातर हॉल्स्टीन फ्रिसियन नस्ल की गायें हैं। डेयरी में तैयार होने वाला दूध नेस्ले जैसी कंपनियों को बेचा जाता है।
उन्होंने बताया कि कंपनियां दूध को 38 से 40 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से खरीदती हैं। डेयरी से हर महीने अच्छी आमदनी हो जाती है, जिससे परिवार के खर्च भी निकल जाते हैं और बचत भी हो जाती है। पशुपालकों को दी सलाह, जानकारी लेकर ही करें शुरुआत
सुनील मेहला ने अन्य किसानों और पशुपालकों को सलाह दी कि यदि वे पशुपालन करना चाहते हैं तो सबसे पहले इसकी पूरी जानकारी हासिल करें।
उन्होंने कहा कि सही देखभाल, संतुलित आहार और अच्छी ब्रीडिंग से ही डेयरी व्यवसाय में सफलता मिलती है। अगर किसी तरह की समस्या आती है तो घबराने के बजाय विशेषज्ञों से सलाह लेकर समाधान ढूंढना चाहिए।

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