सिटी एंकर बोकारो स्टील सिटी रेलवे स्टेशन शीघ्र ही टर्मिनल बनेगा। टर्मिनल बनने के बाद बोकारो के यात्रियों को भी विशेष सुविधाएं मिलेगी। लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए बोकारो के लोगों को रांची व धनबाद जाना पड़ता है। लेकिन टर्मिनल बनने के बाद बोकारो के लोगों को दूसरे जिला जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अभी बोकारो रेलवे स्टेशन में मात्र तीन प्लेटफॉर्म है। इसके कारण चौथी ट्रेन को प्लेटफॉर्म के बाहर की खड़ा करना पड़ता है। इससे आए दिन ट्रेनों को देर होती है। टर्मिनल बनने के पहले प्लेटफॉर्म नंबर 04 और 05 का निर्माण वर्ष 2027 के मार्च महीने तक पूर्ण करने का प्रस्ताव है। इससे ट्रेनों के टर्मिनेशन और परिचालन हो सकेगी। इसे देखते हुए बोकारो-पुंदाग-जयपुर के बीच नई रेल लाइन बिछाने का काम मार्च के बाद शुरू किया जाएगा। इससे यहां की कनेक्टिविटी और बेहतर हो सकेगी। वर्तमान में बोकारो वासियों को लंबी दूरी की ट्रेनों में सीट के लिए दूसरे जिला से बुकिंग कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विदित हो कि दक्षिण-पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक एके मिश्रा ने लगभग 03 महीने पूर्व बोकारो टर्मिनल बनाने और नई ट्रेनों के विस्तार की संभावनाओं को रखा था। वाशिंग लाइन को बेहतर बनाने का संकेत दिया था। जिससे अन्य शहरों के लिए परिचालन और टर्मिनेशन कर पाए। प्लेट फॉर्म नंबर-4 और 5 का निर्माण अप्रैल से अभी 33.5 करोड़ रुपए की लागत से बोकारो रेलवे स्टेशन के सौंदर्यीकरण के पहले चरण का काम 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसी मार्च महीने तक 100 फीसदी पूरा कर लिया जाएगा। अप्रैल से प्लेटफॉर्म नंबर-4 और 5 के निर्माण का कार्य शुरू होगा। दो नए प्लेटफॉर्म बढ़ने के साथ ही डेढ़ वर्षों में टर्मिनल बनाने की प्रक्रिया पूरी करने की संभावना है। टर्मिनल के लिए प्लेटफॉर्म विस्तार व नई लाइनों का प्रस्ताव भेजा गया था। हमसफर या वंदे भारत स्लीपर ट्रेन प्रस्तावित है टैंकर के बगल में खड़ी यात्री ट्रेन। वर्तमान में केवल 3 प्लेटफॉर्म होने के कारण ट्रेनों को अक्सर आउटर पर रुकना पड़ता है। नए प्लेटफॉर्म 4 और 5 बनने के बाद बोकारो से अधिक ट्रेनें शुरू हो सकेगी। साथ ही लंबी दूरी के ट्रेनों का परिचालन भी यहीं से शुरू होकर यहीं समाप्त होगी। योजना के अनुसार, टर्मिनल बनने के बाद शहरों के लिए नई ट्रेनें शुरू होने या मौजूदा ट्रेनों के विस्तार की प्रबल संभावना है। वर्तमान में यात्रियों को अलेप्पी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के लिए धनबाद या टाटानगर का रुख करना पड़ता है। टर्मिनल बनने के बाद बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद के लिए सीधी साप्ताहिक या सुपरफास्ट ट्रेनों की परिचालन हो सकती है। राजधानी और पुरुषोत्तम एक्सप्रेस पर बढ़ते दबाव को देखते हुए बोकारो से नई दिल्ली के लिए एक हमसफर या वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भी प्रस्तावित है। बोकारो से एक समर्पित टर्मिनल ट्रेन दिल्ली के लिए शुरू की जा सकती है। इसके अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश के लिए भी नई ट्रेन की संभावना है। हाल ही में फरवरी 2026 में आसनसोल-बोकारो स्टील सिटी मेमू सेवा शुरू की गई है। जो दो स्टील हब के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करती है। पटना, लखनऊ और वाराणसी के बीच कई धार्मिक केंद्र होने के कारण बनारस के लिए अतिरिक्त इंटरसिटी या जनशताब्दी चल रही है। सिटी एंकर बोकारो स्टील सिटी रेलवे स्टेशन शीघ्र ही टर्मिनल बनेगा। टर्मिनल बनने के बाद बोकारो के यात्रियों को भी विशेष सुविधाएं मिलेगी। लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए बोकारो के लोगों को रांची व धनबाद जाना पड़ता है। लेकिन टर्मिनल बनने के बाद बोकारो के लोगों को दूसरे जिला जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अभी बोकारो रेलवे स्टेशन में मात्र तीन प्लेटफॉर्म है। इसके कारण चौथी ट्रेन को प्लेटफॉर्म के बाहर की खड़ा करना पड़ता है। इससे आए दिन ट्रेनों को देर होती है। टर्मिनल बनने के पहले प्लेटफॉर्म नंबर 04 और 05 का निर्माण वर्ष 2027 के मार्च महीने तक पूर्ण करने का प्रस्ताव है। इससे ट्रेनों के टर्मिनेशन और परिचालन हो सकेगी। इसे देखते हुए बोकारो-पुंदाग-जयपुर के बीच नई रेल लाइन बिछाने का काम मार्च के बाद शुरू किया जाएगा। इससे यहां की कनेक्टिविटी और बेहतर हो सकेगी। वर्तमान में बोकारो वासियों को लंबी दूरी की ट्रेनों में सीट के लिए दूसरे जिला से बुकिंग कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विदित हो कि दक्षिण-पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक एके मिश्रा ने लगभग 03 महीने पूर्व बोकारो टर्मिनल बनाने और नई ट्रेनों के विस्तार की संभावनाओं को रखा था। वाशिंग लाइन को बेहतर बनाने का संकेत दिया था। जिससे अन्य शहरों के लिए परिचालन और टर्मिनेशन कर पाए। प्लेट फॉर्म नंबर-4 और 5 का निर्माण अप्रैल से अभी 33.5 करोड़ रुपए की लागत से बोकारो रेलवे स्टेशन के सौंदर्यीकरण के पहले चरण का काम 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसी मार्च महीने तक 100 फीसदी पूरा कर लिया जाएगा। अप्रैल से प्लेटफॉर्म नंबर-4 और 5 के निर्माण का कार्य शुरू होगा। दो नए प्लेटफॉर्म बढ़ने के साथ ही डेढ़ वर्षों में टर्मिनल बनाने की प्रक्रिया पूरी करने की संभावना है। टर्मिनल के लिए प्लेटफॉर्म विस्तार व नई लाइनों का प्रस्ताव भेजा गया था। हमसफर या वंदे भारत स्लीपर ट्रेन प्रस्तावित है टैंकर के बगल में खड़ी यात्री ट्रेन। वर्तमान में केवल 3 प्लेटफॉर्म होने के कारण ट्रेनों को अक्सर आउटर पर रुकना पड़ता है। नए प्लेटफॉर्म 4 और 5 बनने के बाद बोकारो से अधिक ट्रेनें शुरू हो सकेगी। साथ ही लंबी दूरी के ट्रेनों का परिचालन भी यहीं से शुरू होकर यहीं समाप्त होगी। योजना के अनुसार, टर्मिनल बनने के बाद शहरों के लिए नई ट्रेनें शुरू होने या मौजूदा ट्रेनों के विस्तार की प्रबल संभावना है। वर्तमान में यात्रियों को अलेप्पी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के लिए धनबाद या टाटानगर का रुख करना पड़ता है। टर्मिनल बनने के बाद बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद के लिए सीधी साप्ताहिक या सुपरफास्ट ट्रेनों की परिचालन हो सकती है। राजधानी और पुरुषोत्तम एक्सप्रेस पर बढ़ते दबाव को देखते हुए बोकारो से नई दिल्ली के लिए एक हमसफर या वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भी प्रस्तावित है। बोकारो से एक समर्पित टर्मिनल ट्रेन दिल्ली के लिए शुरू की जा सकती है। इसके अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश के लिए भी नई ट्रेन की संभावना है। हाल ही में फरवरी 2026 में आसनसोल-बोकारो स्टील सिटी मेमू सेवा शुरू की गई है। जो दो स्टील हब के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करती है। पटना, लखनऊ और वाराणसी के बीच कई धार्मिक केंद्र होने के कारण बनारस के लिए अतिरिक्त इंटरसिटी या जनशताब्दी चल रही है।


