जयपुर के सांगानेर–बगरू क्षेत्र की 87 कॉलोनियों पर संभावित कार्रवाई की आशंका के बीच रविवार को हजारों कॉलोनीवासी सड़क पर उतर आए। लोगों ने शांति मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और राज्य सरकार से राहत देने की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और यज्ञ-हवन कर सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना भी की। दरअसल, हाल ही में राजस्थान हाई कोर्ट ने राजस्थान हाउसिंग बोर्ड को तीन सप्ताह के भीतर संबंधित जमीन खाली करवाने और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के बीच अपने घरों पर कार्रवाई या बुलडोजर चलने की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है। आज प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि अदालत के सामने कॉलोनियों की वास्तविक स्थिति पूरी तरह से नहीं रखी गई है। आज श्योपुर चौराहे से गुलाब विहार होते हुए पिंजरापोल गौशाला तक पैदल मार्च निकाला गया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। मार्च के दौरान कई स्थानों पर लोग सड़क पर बैठ गए, जिससे कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने समझाइश कर लोगों को सड़क से हटाया और यातायात सामान्य कराया। श्योपुर व्यापार मंडल के व्यापारियों ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया। व्यापारियों ने सुबह 10 से 12 बजे तक अपनी दुकानें बंद रखीं और रैली में शामिल होकर कॉलोनीवासियों के साथ एकजुटता दिखाई। इससे प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या और बढ़ गई। संघर्ष समिति के अध्यक्ष रघुनंदन सिंह हाड़ा और महासचिव परशुराम चौधरी ने कहा कि इन कॉलोनियों में पिछले 30 से 40 सालों से लोग रह रहे हैं। सरकार की ओर से यहां बिजली, पानी, सड़क, टेलीफोन और रोड लाइट जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई गई हैं। उन्होंने कहा कि लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर यहां मकान बनाए हैं, इसलिए वे अपने घर उजड़ने नहीं देंगे। आंदोलन से जुड़े लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो बड़े स्तर पर जन आंदोलन किया जाएगा। इसके साथ ही आगामी निकाय चुनाव में मतदान के बहिष्कार किया जा सकता है। संघर्ष समिति ने राज्य सरकार से मांग की है कि 19 मार्च 2026 को उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई के दौरान कॉलोनीवासियों का पक्ष मजबूती से रखा जाए। साथ ही लंबे समय से बसी इन कॉलोनियों को मानवीय और जनहित के आधार पर नियमित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि हजारों परिवारों के सामने खड़ा अनिश्चितता का संकट दूर हो सके।


