अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च को नवादा की सड़कों पर विभिन्न जनवादी संगठनों ने प्रदर्शन, सभा और रैली का आयोजन किया। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा), जनवादी नौजवान सभा, ट्रेड यूनियन सीटू, किसान सभा, एसएफआई, जनवादी लेखक संघ, प्रेरणा सांस्कृतिक मोर्चा और कर्मचारी महासंघ सहित कई संगठनों ने इसमें भाग लिया। यह प्रदर्शन कचहरी रोड स्थित श्री बाबू के स्मारक के पास से एडवा अध्यक्ष पुष्पा कुमार की देखरेख में शुरू हुआ। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों, लैंगिक भेदभाव से मुक्ति, हिंसा और भूख से आजादी, समान मजदूरी, रोजगार, न्याय, समानता और बराबरी की मांग करना था। रैली भगत सिंह चौक पर समाप्त हुई, जहां एक सभा का आयोजन किया गया। बीजेपी-RSS देश को सांप्रदायिक हाथों में सौंपना चाहती
सभा को संबोधित करते हुए एडवा अध्यक्ष पुष्पा कुमार ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मेहनतकश महिलाओं के संघर्षों का दिन है। उन्होंने जोर दिया कि आज महिलाओं को जो भी अधिकार मिले हैं, वे संघर्षों के बदौलत ही संभव हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘मनुवादी भाजपा-आरएसएस सरकार’ देश को सांप्रदायिक कॉर्पोरेट के हाथों में सौंपना चाहती है। मोदी सरकार धीरे-धीरे सभी अधिकार छीन रही
पुष्पा कुमार ने 1908 में न्यूयॉर्क की कपड़ा सिलने वाली महिला मजदूरों के संघर्ष को याद किया, जिन्होंने काम के घंटे, मजदूरी बढ़ाने और वोट के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने क्लारा जेटकिन और रोजा लक्जमबर्ग जैसी बहादुर महिलाओं के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज मोदी सरकार धीरे-धीरे सभी अधिकार छीन रही है। नीतियों के खिलाफ संघर्ष करने का आह्वान
उन्होंने सभी से एकजुट होकर इन नीतियों के खिलाफ संघर्ष करने का आह्वान किया। पुष्पा कुमार ने केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 24 मार्च को दिल्ली में आयोजित रैली में शामिल होकर उसे सफल बनाने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई और महिलाओं की सुरक्षा तथा उत्पीड़न पर सवाल उठाए गए। पुष्पा कुमार ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। इस रैली के माध्यम से महिलाओं को प्रेरित करने और एक बड़ा संदेश देने का प्रयास किया गया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च को नवादा की सड़कों पर विभिन्न जनवादी संगठनों ने प्रदर्शन, सभा और रैली का आयोजन किया। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा), जनवादी नौजवान सभा, ट्रेड यूनियन सीटू, किसान सभा, एसएफआई, जनवादी लेखक संघ, प्रेरणा सांस्कृतिक मोर्चा और कर्मचारी महासंघ सहित कई संगठनों ने इसमें भाग लिया। यह प्रदर्शन कचहरी रोड स्थित श्री बाबू के स्मारक के पास से एडवा अध्यक्ष पुष्पा कुमार की देखरेख में शुरू हुआ। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों, लैंगिक भेदभाव से मुक्ति, हिंसा और भूख से आजादी, समान मजदूरी, रोजगार, न्याय, समानता और बराबरी की मांग करना था। रैली भगत सिंह चौक पर समाप्त हुई, जहां एक सभा का आयोजन किया गया। बीजेपी-RSS देश को सांप्रदायिक हाथों में सौंपना चाहती
सभा को संबोधित करते हुए एडवा अध्यक्ष पुष्पा कुमार ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मेहनतकश महिलाओं के संघर्षों का दिन है। उन्होंने जोर दिया कि आज महिलाओं को जो भी अधिकार मिले हैं, वे संघर्षों के बदौलत ही संभव हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘मनुवादी भाजपा-आरएसएस सरकार’ देश को सांप्रदायिक कॉर्पोरेट के हाथों में सौंपना चाहती है। मोदी सरकार धीरे-धीरे सभी अधिकार छीन रही
पुष्पा कुमार ने 1908 में न्यूयॉर्क की कपड़ा सिलने वाली महिला मजदूरों के संघर्ष को याद किया, जिन्होंने काम के घंटे, मजदूरी बढ़ाने और वोट के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने क्लारा जेटकिन और रोजा लक्जमबर्ग जैसी बहादुर महिलाओं के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज मोदी सरकार धीरे-धीरे सभी अधिकार छीन रही है। नीतियों के खिलाफ संघर्ष करने का आह्वान
उन्होंने सभी से एकजुट होकर इन नीतियों के खिलाफ संघर्ष करने का आह्वान किया। पुष्पा कुमार ने केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 24 मार्च को दिल्ली में आयोजित रैली में शामिल होकर उसे सफल बनाने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई और महिलाओं की सुरक्षा तथा उत्पीड़न पर सवाल उठाए गए। पुष्पा कुमार ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। इस रैली के माध्यम से महिलाओं को प्रेरित करने और एक बड़ा संदेश देने का प्रयास किया गया।


