युवाओं ने सीएम योगी को खून से लिखा लेटर:टेढ़ी नदी में गिर रहे गंदे नाले के पानी को रोकने की मांग, डीएम को भी लिखा पत्र

युवाओं ने सीएम योगी को खून से लिखा लेटर:टेढ़ी नदी में गिर रहे गंदे नाले के पानी को रोकने की मांग, डीएम को भी लिखा पत्र

गोंडा जिले में आस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा एक मामला सामने आया है। कटरा बाजार क्षेत्र के युवाओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने खून से पत्र लिखा है। यह पत्र पवित्र टेढ़ी नदी को प्रदूषित होने से बचाने की अपील के साथ रविवार शाम करीब 6 बजे भेजा गया। विरोध का मुख्य कारण पड़ोसी जनपद बहराइच के ज्ञानापुर में बन रहा एक नया नाला है। युवाओं का नेतृत्व कर रहे सत्यम सिंह ने बताया कि पहले गांव और आसपास का गंदा पानी एक बड़े गड्ढे में जमा होता था, जिससे नदी का जल स्वच्छ रहता था। हाल ही में प्रशासन द्वारा एक नई व्यवस्था बनाई गई है, जिसके तहत इस गंदे नाले का पानी सीधे टेढ़ी नदी में मोड़ा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह निर्णय नदी के अस्तित्व और क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। टेढ़ी नदी केवल एक जलस्रोत नहीं है, बल्कि कटुआनाला, टेढ़ी और रायपुर जैसे दर्जनों गांवों की आस्था का केंद्र है। प्रतिवर्ष दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक आयोजनों पर प्रतिमाओं का विसर्जन इसी नदी में किया जाता है। गंदा पानी मिलने से नदी की शुद्धता और धार्मिक गरिमा नष्ट हो रही है। गांव के बच्चे इसी नदी में स्नान करते हैं, जिससे अब त्वचा रोगों और गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। जंगली पशु और ग्रामीण मवेशी भी इसी नदी पर निर्भर हैं, और दूषित जल उनके जीवन के लिए खतरा बन रहा है। युवाओं ने मुख्यमंत्री के साथ-साथ गोंडा और बहराइच के जिलाधिकारियों को भी पत्र लिखकर इस समस्या पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। ​ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर गोंडा और बहराइच के जिलाधिकारियों (DM) को कई बार लिखित प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन फाइलों की धूल के नीचे उनकी मांगें दबी रह गईं। अधिकारियों की इसी चुप्पी और संवेदनहीनता ने युवाओं को इतना विवश कर दिया कि उन्हें स्याही की जगह अपने रक्त का सहारा लेना पड़ा। ​ मुख्यमंत्री को भेजे गए इस रक्त-पत्र में युवाओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गंदे नाले का रुख नदी से नहीं मोड़ा गया, तो वे जल सत्याग्रह और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि क्या लखनऊ तक पहुँची यह ‘खून की पुकार’ प्रशासन की नींद तोड़ पाती है या नहीं।

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