अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में तृतीय वैश्विक विदुषी सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का विषय ‘शक्ति अपनी पूर्णकला में स्फुरित’ था। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय संस्कृत ग्लोबल फोरम के साथ नवयुग कन्या महाविद्यालय, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस राजकीय महाविद्यालय, नारी निकेतन महाविद्यालय और महिला महाविद्यालय डिग्री कॉलेज लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। उद्घाटन सत्र में महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर (राजस्थान) के कुलपति प्रोफेसर मनोज दीक्षित मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर हरिदत्त शर्मा ने की। आध्यात्मिक दृष्टि से शक्ति को ऐसी ऊर्जा माना गया है बीज वक्तव्य देते हुए प्रोफेसर मनु शर्मा ने बताया कि भारतीय चिंतन में नारी का स्वरूप सर्वत्र विद्यमान है। उन्होंने कहा कि दार्शनिक और आध्यात्मिक दृष्टि से शक्ति को ऐसी ऊर्जा माना गया है जो समस्त सृष्टि और सभी विधाओं में व्याप्त है। प्रोफेसर शर्मा ने यह भी उल्लेख किया कि आज हर क्षेत्र में नारी शक्ति अपनी पूर्ण क्षमता के साथ उभर रही है। मुख्य अतिथि प्रोफेसर मनोज दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा कि हमें यह समझना चाहिए कि भारत पहले इतना सशक्त क्यों था। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के आने से पहले देश की अर्थव्यवस्था मजबूत थी। प्रोफेसर दीक्षित ने भारतीय संस्कृति,पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक एकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि व्यक्ति से समष्टि तक की यात्रा में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और हमें अपने भारतीय होने पर गर्व होना चाहिए। 20 महिलाओं को सम्मानित किया कार्यक्रम के दौरान ग्लोबल संस्कृत फोरम के राष्ट्रीय सचिव डॉ राजेश मिश्र ने देश के विभिन्न राज्यों और जिलों से आईं 20 महिलाओं को सम्मानित किया। उन्हें प्राचीन ऋषिकाओं के नाम पर सम्मान पत्र प्रदान किए गए।अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर हरिदत्त शर्मा ने प्राचीन भारत में महिलाओं की सशक्त स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महिलाएं अपने पतियों के साथ युद्ध में भी जाती थीं।प्रोफेसर शर्मा ने ऋग्वेद का उदाहरण देते हुए कहा कि नारी के सम्मान और शक्ति का प्रतीक है।


