गोरखपुर AIIMS के कार्यालय अधीक्षक (ओएस) रामऔतार को गबन के आरोप में निलंबित किए जाने के बाद उनको मूल विभाग बरेली कॉलेज ऑफ बरेली भेजा गया था। लेकिन कॉलेज प्रशासन ने उनको वापस लेने से इनकार कर दिया है। AIIMS की ओर से भेजे गए पत्र में कमियां बताते हुए कॉलेज प्रशासन ने रामऔतार को कार्यभार ग्रहण नहीं कराया। इस पर रामऔतार ने AIIMS प्रशासन को पत्र लिखकर कहा है कि बरेली कॉलेज ऑफ बरेली 9 मार्च को खुलेगा। जब तक उन्हें वहां कार्यभार ग्रहण नहीं कराया जाता, तब तक वह AIIMS से ही संबद्ध रहेंगे और उनका वेतन व अन्य भत्ते देना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। रामऔतार का पत्र यहां जानिए पूरा मामला रामऔतार को बरेली कॉलेज ऑफ बरेली से प्रतिनियुक्ति पर गोरखपुर AIIMS में कार्यालय अधीक्षक के पद पर नियुक्त किया गया था। यह ग्रुप-बी का पद होता है। नवंबर 2024 में ओपीडी की नकदी के कथित दुरुपयोग के आरोप में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई थी। प्रारंभिक जांच में लगभग 3 लाख 21 हजार 319 रुपए के गबन का मामला सामने आया। इसके बाद 5 अक्टूबर 2025 को AIIMS थाने में गबन के आरोप में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इससे पहले 27 सितंबर 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया गया था। रामऔतार ने अपने निलंबन को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की है, जो वर्तमान में विचाराधीन है। 28 फरवरी को लिखा पत्र रामऔतार ने 27 फरवरी को कार्यकारी निदेशक (ईडी) को संबोधित पत्र में लिखा कि आपके आदेश के क्रम में 26 फरवरी को मैं मूल विभाग में कार्यभार ग्रहण करने जा रहा हूं। यदि किसी कारणवश मुझे वहां कार्यभार ग्रहण नहीं कराया जाता है तो मैं AIIMS गोरखपुर में ही कार्यालय अधीक्षक के पद पर रहूंगा और मेरा वेतन व अन्य भत्ते AIIMS से ही दिए जाएंगे। इसके बाद 28 फरवरी को AIIMS प्रशासन को लिखे गए पत्र में रामऔतार ने बताया कि बरेली कॉलेज ऑफ बरेली के प्राचार्य ने मौखिक रूप से कहा है कि AIIMS की ओर से भेजे गए पत्र में स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी कारण मामले को विचार के लिए कॉलेज के प्रबंध तंत्र के पास भेज दिया गया है।


