डॉ. आनंद श्रीवास्तव होली के मौके पर वाराणसी पहुंचे थे। वह कार से शहर में स्थित पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज की तरफ से गुजरे तो बिना कुछ सोचे सीधे गेट के अंदर प्रवेश कर गए। यहां के प्रिंसिपल सुमीत कुमार श्रीवास्तव से मुलाकात की और अपना परिचय बताया। दरअसल, डॉ. आनंद वर्ष 1983 में इसी स्कूल से पढ़कर निकले थे और लंदन के यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम में बाल रोग विभाग में प्राेफेसर हैं। करीब 35 बरस बाद जब अपने उसी स्कूल में पहुंचे तो उनकी पुरानी यादें ताजी हो गई। वह उस बिल्डिंग के पास पहुंचे जहां पर प्राणि शास्त्र विभाग का लैब हुआ करता था। लेकिन आज वह खंडहर के रूप में तब्दील हो चुका है। इस पर उन्होंने चिंता भी जाहिर की। बायोलॉजी के छात्रों के लिए प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्त किए जाने के लिए उन्होंने आर्थिक सहयोग करने की भी बात कही। डाॅक्टरी की पढ़ाई के लिए छात्रों को करेंगे मोटिवेट डॉ. आनंद ने प्रिंसिपल के साथ कॉलेज की लाइब्रेरी, क्लॉसरूम और नवनिर्मित एआई लैब में जाकर बदलते और हाईटेक हो रहे कॉलेज को देखा। उन्होंने कहा, यहां का सबसे पुराना कॉलेज है यह। इसी कॉलेज से निकलकर बड़ी संख्या में लोग उच्च पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि वह मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को पढ़ाते हैं। यहां के छात्रों के लिए भी वह ऑनलाइन क्लॉस लेंगे और डॉक्टरी की पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करेंगे। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को देख पहचान गए क्वींस कॉलेज में पहुंचने पर डॉ. आनंद की मुलाकात बिहारी लाल से हो जाती है। यह वही बिहारी लाल थे जो यहीं पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होते थे और अभी रिटायर होने के बाद भी अपने सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. आनंद ने पूछा, हमें पहचान रहे हैं आप? लंबा गैप होने के कारण वह पहचान नहीं सके। फिर डॉ. आनंद ने कहा, पढ़ाई के दिनों में लैब में आप हम छात्रों का बहुत सहयोग करते थे।


