भगवान के दर्शन से सम्यक दर्शन की प्राप्ति होती है: आचार्य श्री वर्धमान सागर, मोबाइल के दुष्परिणामों से सावधान रहने की दी सलाह

भगवान के दर्शन से सम्यक दर्शन की प्राप्ति होती है: आचार्य श्री वर्धमान सागर, मोबाइल के दुष्परिणामों से सावधान रहने की दी सलाह

जयपुर। वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज का जयपुर नगर की ओर मंगल विहार चल रहा है। शनिवार को प्रताप नगर स्थित सेक्टर-10 में 34 साधुओं के साथ उनका भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित रहे और धर्मसभा का आयोजन किया गया।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने कहा कि प्रताप नगर में पहली बार इतने बड़े संघ का प्रवेश हुआ है। उन्होंने कहा कि भगवान वितरागी होते हैं और उनके दर्शन से मन में सम्यक दर्शन की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि भगवान के दर्शन हमेशा विनयपूर्वक, शांत मन और एकाग्रता के साथ करने चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है और धर्म के प्रति श्रद्धा बढ़ती है।

आचार्य ने कहा कि आज के समय में लोग भौतिक सुख-सुविधाओं और विषय भोगों में उलझकर जैन धर्म और अपने गुरुओं को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से धर्म और संस्कारों से जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरुजन भी भगवान के अनुयायी हैं और उसी मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने प्रताप नगर के नाम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र महाराणा प्रताप के नाम पर है, इसलिए लोगों को अपने जीवन में भी प्रताप और साहस के गुण अपनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में अच्छे कर्म, संयम और तप के माध्यम से बुरे कर्मों को समाप्त किया जा सकता है। धर्म के मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बना सकता है।

आचार्य ने अपने प्रवचन में मोबाइल के बढ़ते उपयोग और उसके दुष्परिणामों के बारे में भी लोगों को सचेत किया। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग सीमित और सही तरीके से होना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान प्रतापनगर जैन समाज के अध्यक्ष धर्मचंद परानता, मंत्री महेश सेठी सहित समाज के कई लोग मौजूद रहे। जानकारी के अनुसार 8 मार्च को सुबह करीब पांच किलोमीटर का मंगल विहार प्रताप नगर से मालवीय नगर स्थित चंद्र प्रभ जिनालय तक होगा, जहां संघ की आहार चर्या भी होगी।

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