Share Market Tips: स्मार्ट निवेशक वे हैं, जो सिर्फ शेयर चुनने में ही माहिर नहीं होते, बल्कि टैक्स कैसे घटाएं और नेट प्रॉफिट कैसे बढ़ाएं, यह भी अच्छी तरह जानते हैं। इक्विटी में निवेश जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उसका टैक्सेशन समझना। फीफो (फर्स्ट-इन, फर्स्ट-आउट) जैसी रणनीतियों को सही तरीके से अपनाकर निवेशक अपनी टैक्स देनदारी कम कर सकते है और मुनाफा बढ़ा सकते हैं।
शेयरों से कमाई के दो जरिए
- कैपिटल गेन : जब आप शेयर बेचते हैं और आपको खरीद मूल्य से ज्यादा मिलता है, तो यह कैपिटल गेन (पूंजी लाभ) कहलाता है। एक साल के कम शेयर रखने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स 20% लगता है। 12 माह के बाद शेयर बेचने पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होता है। सालाना 1.25 लाख रुपए तक के लाभ पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता है।
- डिविडेंड : वहीं, जब आप किसी कंपनी के शेयर रखते हैं और कंपनी अपने मुनाफे का हिस्सा शेयरधारकों को बांटती हैं, तो उसे डिविडेंड कहते है। इस पर टैक्स स्लैब के हिसाब से लगता है। डिविडेंड पर आप ब्याज खर्च घटा सकते हैं। अगर आपने शेयर खरीदने के लिए लोन लिया था, तो उसकी ब्याज राशि का 20% ही घटा सकते है। ब्रोकरेज कमीशन आदि घटाने की अनुमति नहीं है।
फीफो नियम क्यों जरूरी है?
निवेशक कई बार एक ही कंपनी के शेयर अलग-अलग तारीखों पर खरीदते है। जब वे चाहें तभी कुछ शेयर बेच देते हैं। सेबी के नियम के अनुसार, जो शेयर सबसे पहले खरीदा गया, वही सबसे पहले बेचा हुआ माना जाएगा। यह कानून हैं।
इसे उदाहरण से समझें
मान लीजिए आपने एबीसी नाम की कंपनी के शेयर दो बार खरीदे। 1 फरवरी 2025 को 50 रुपये के भाव पर 2000 शेयर खरीदे और लागत 1,00,000 रुपए रही। फिर 1 अगस्त को 75 रुपए के भाव पर फिर 2000 शेयर खरीदे यानी लागत 1,50,000 रुपए रही। फिर आपने 27 दिसंबर 2025 को 2000 शेयर प्रति शेयर भाव 105 रुपये पर बेच दिए तो बिक्री मूल्य हुआ 2,10,000 रुपए।
कितना लगेगा टैक्स
अब फीफो नियम कहता है कि पहले आए हुए 2000 शेयर (यानी 11 फरवरी वाले) बेचे हुए माने जाएंगे। यानी लागत मूल्य 50 रुपए प्रति शेयर होगा। इस तरह कुल लाभ होगा (105-
50) x 2000 = 1,10,000 रुपए। चूंकि शेयर 12 महीने पूरे होने से पहले बेच दिए गए, इसलिए यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन है, तो टैक्स होगा 1.10 लाख रुपए का 20% यानी 22,000 रुपए।
तो फिर टैक्स बचाने का क्या उपाय है?
आपके सारे शेयर एक ही डीमैट में हैं, तो फीफो लागू होने से कभी-कभी अनजाने में पुराने, सस्ते और लंबे समय से रखे गए शेयर पहले बेच दिए जाते है। इससे लॉन्ग टर्म गेन खत्म हो सकता है।


