Azamgarh News :प्रदेश सरकार ने गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में उनके खिलाफ लगे आरोप सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।
जांच में सामने आया कि आजमगढ़ में तैनाती के दौरान उन्होंने नियमों के विपरीत एक बर्खास्त शिक्षिका को वेतन और पेंशन का भुगतान कराने की अनुमति दे दी थी। शासन के अनुसार यह फैसला विभागीय नियमों के खिलाफ था।
बताया जाता है कि मुबारकपुर निवासी शगुफ्ता बानो की नियुक्ति वर्ष 1982 में मदरसा बाबुल इल्म में शिक्षिका के रूप में हुई थी। वर्ष 1999-2000 में मुबारकपुर में शिया और सुन्नी समुदाय के बीच हुए दंगे के बाद उन्होंने खुद को खतरा बताते हुए विभाग से स्थानांतरण की मांग की थी। इसके बाद उन्हें जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया था।
जानिए पूरा मामला जिसमें शासन ने लिया एक्शन
इसी दौरान वर्ष 2002 में मदरसे के प्रबंधक ने शगुफ्ता बानो को सेवा से बर्खास्त कर दिया। बर्खास्तगी के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, जिस पर शुरुआती तौर पर अदालत से स्टे मिल गया था। हालांकि मदरसा प्रबंधन ने उन्हें दोबारा कार्यभार ग्रहण नहीं करने दिया। बाद में चार फरवरी 2020 को हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद दायर विशेष अपील को भी 16 जून 2020 को अदालत ने निरस्त कर दिया।
इसके बावजूद स्टे आदेश के आधार पर उन्हें वेतन का भुगतान होता रहा। जांच में पाया गया कि तत्कालीन रजिस्ट्रार रहे शेषनाथ पांडेय ने नियमों की अनदेखी करते हुए वेतन और पेंशन के भुगतान की अनुमति दी थी। इसी मामले में विभागीय कार्रवाई के बाद प्रदेश सरकार ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का फैसला लिया।


