इंटर मूल्यांकन से गायब 90 शिक्षकों पर गिरी गाज:डीईओ ने 24 घंटे में मांगा जवाब; बिहारशरीफ के छह केंद्रों पर कॉपियों की जांच

इंटर मूल्यांकन से गायब 90 शिक्षकों पर गिरी गाज:डीईओ ने 24 घंटे में मांगा जवाब; बिहारशरीफ के छह केंद्रों पर कॉपियों की जांच

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से आयोजित इंटर परीक्षा की कॉपियों की जांच में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। शहर के छह केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच चल रहे मूल्यांकन कार्य से नदारद रहने वाले जिले के 90 शिक्षकों को जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) आनंद विजय ने कारण बताओ नोटिस (शोकॉज) जारी किया है। इन सभी शिक्षकों से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है कि किन परिस्थितियों में उन्होंने केंद्र पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। विभाग की इस कार्रवाई से जिले के शैक्षणिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। दरअसल, इंटरमीडिएट की कॉपियों की जांच का काम 10 मार्च तक पूरा किया जाना है, जिसके लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की गई थी। इनमें कई ऐसे शिक्षक भी शामिल हैं, जिन्हें प्रधान परीक्षक और सह परीक्षक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थी। डीईओ आनंद विजय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि वरीय पदाधिकारियों के आदेश की अवहेलना और कर्तव्य के प्रति लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अनुपस्थित शिक्षकों को अब यह साबित करना होगा कि उनकी गैरमौजूदगी का ठोस कारण क्या था, अन्यथा उन पर कठोर विभागीय कार्रवाई की गाज गिरनी तय है। लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी मूल्यांकन केंद्रों से गायब रहने वाले शिक्षकों की सूची काफी लंबी है। एसएस बालिका मूल्यांकन केंद्र पर सबसे अधिक 24 शिक्षकों ने योगदान नहीं किया, जिनमें अंदी की अंजलि सिंह, अमरपुरा की अल्पना भारती और सोहसराय की प्रीति कुमारी जैसे नाम शामिल है। इसी तरह, सोगरा हाईस्कूल केंद्र से नई सराय की हेमलता कुमारी, ओकनावां की गार्गी कुमारी और विजयनगर के आदित्य कुमार मेहता सहित कई अन्य शिक्षक गायब पाए गए। पीएल साहु केंद्र पर भी नई सराय की नेहा, छोटी पहाड़ी की मनीषा कुमारी और राजगीर आवासीय विद्यालय की अर्चना झा ने अपनी ड्यूटी ज्वॉइन करना उचित नहीं समझा। यही हाल नालंदा कॉलेजिएट और टाउन हाई स्कूल केंद्रों का भी रहा। कॉलेजिएट केंद्र से प्रदीप कुमार, वंदना और डॉ. अभय कुमार जैसे अनुभवी शिक्षक नदारद रहे, जबकि टाउन हाईस्कूल में रंजीत कुमार और अंजलि सिन्हा जैसे शिक्षकों ने योगदान नहीं दिया। विभाग ने साफ कर दिया है कि समय सीमा के भीतर कॉपियों की जांच पूरी करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बरतने वाले को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल, सभी की नजरें इन 90 शिक्षकों की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से आयोजित इंटर परीक्षा की कॉपियों की जांच में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। शहर के छह केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच चल रहे मूल्यांकन कार्य से नदारद रहने वाले जिले के 90 शिक्षकों को जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) आनंद विजय ने कारण बताओ नोटिस (शोकॉज) जारी किया है। इन सभी शिक्षकों से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है कि किन परिस्थितियों में उन्होंने केंद्र पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। विभाग की इस कार्रवाई से जिले के शैक्षणिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। दरअसल, इंटरमीडिएट की कॉपियों की जांच का काम 10 मार्च तक पूरा किया जाना है, जिसके लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की गई थी। इनमें कई ऐसे शिक्षक भी शामिल हैं, जिन्हें प्रधान परीक्षक और सह परीक्षक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थी। डीईओ आनंद विजय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि वरीय पदाधिकारियों के आदेश की अवहेलना और कर्तव्य के प्रति लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अनुपस्थित शिक्षकों को अब यह साबित करना होगा कि उनकी गैरमौजूदगी का ठोस कारण क्या था, अन्यथा उन पर कठोर विभागीय कार्रवाई की गाज गिरनी तय है। लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी मूल्यांकन केंद्रों से गायब रहने वाले शिक्षकों की सूची काफी लंबी है। एसएस बालिका मूल्यांकन केंद्र पर सबसे अधिक 24 शिक्षकों ने योगदान नहीं किया, जिनमें अंदी की अंजलि सिंह, अमरपुरा की अल्पना भारती और सोहसराय की प्रीति कुमारी जैसे नाम शामिल है। इसी तरह, सोगरा हाईस्कूल केंद्र से नई सराय की हेमलता कुमारी, ओकनावां की गार्गी कुमारी और विजयनगर के आदित्य कुमार मेहता सहित कई अन्य शिक्षक गायब पाए गए। पीएल साहु केंद्र पर भी नई सराय की नेहा, छोटी पहाड़ी की मनीषा कुमारी और राजगीर आवासीय विद्यालय की अर्चना झा ने अपनी ड्यूटी ज्वॉइन करना उचित नहीं समझा। यही हाल नालंदा कॉलेजिएट और टाउन हाई स्कूल केंद्रों का भी रहा। कॉलेजिएट केंद्र से प्रदीप कुमार, वंदना और डॉ. अभय कुमार जैसे अनुभवी शिक्षक नदारद रहे, जबकि टाउन हाईस्कूल में रंजीत कुमार और अंजलि सिन्हा जैसे शिक्षकों ने योगदान नहीं दिया। विभाग ने साफ कर दिया है कि समय सीमा के भीतर कॉपियों की जांच पूरी करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बरतने वाले को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल, सभी की नजरें इन 90 शिक्षकों की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।  

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