करनाल के एक छोटे से गांव के साधारण परिवार के बेटे ने देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है। आर्थिक तंगी, बीमार माता-पिता और छोटे से घर में पढ़ाई जैसी चुनौतियों के बावजूद युवक ने हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में परीक्षा पास कर 488वीं रैंक हासिल कर ली। अब घर में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और पूरे गांव में खुशी का माहौल है। चौथे प्रयास में मिली सफलता
करनाल के गांव मुनक निवासी लवकेश ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 488वीं रैंक हासिल की है। यह उनकी चौथी कोशिश थी। इससे पहले तीन बार वे सफलता के करीब पहुंचकर भी चूक गए थे। हर असफलता ने उन्हें और मजबूत बनाया। चौथे प्रयास में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार तीनों चरण पार कर सफलता हासिल कर ली। करियाणा की दुकान से चलता है घर
लवकेश के पिता राजेश गांव में करियाणा की छोटी दुकान चलाते हैं। इसी दुकान से पूरे परिवार का गुजारा चलता है। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। कई बार दुकान पर पिता के साथ-साथ लवकेश, उनकी मां या बहनें भी बैठती थीं ताकि दुकान चलती रहे और घर का खर्च निकल सके। पढ़ाई के साथ-साथ लवकेश ने भी कई बार दुकान संभाली। छोटे कमरे में बैठकर की पढ़ाई
लवकेश का घर छोटा है और कमरे की दीवारों पर पलस्तर भी नहीं है। इसी छोटे से कमरे में बैठकर उन्होंने दिन-रात पढ़ाई की। उन्होंने दीवारों पर अपने लक्ष्य और विषय से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें लिख रखी थीं, ताकि पढ़ते समय उन्हें हमेशा अपना लक्ष्य याद रहे। इसी कमरे से उन्होंने अफसर बनने का सपना देखा और उसे सच भी कर दिखाया। परिवार की मुश्किलों ने नहीं तोड़ी हिम्मत
परिवार की आर्थिक हालत कमजोर थी। बेटे की पढ़ाई, परीक्षा और घर के खर्च के लिए पिता राजेश को कई बार कर्ज भी लेना पड़ा। कई बार फाइनेंस पर पैसे लेकर परीक्षा की तैयारी और फॉर्म भरने जैसे खर्च पूरे किए गए। इसके बावजूद परिवार ने कभी लवकेश को पढ़ाई छोड़ने के लिए नहीं कहा। पिता को अपने बेटे की मेहनत और लगन पर भरोसा था। चाचा ने बताई परिवार की स्थिति
लवकेश के चाचा कार्तिक ने बताया कि परिवार लंबे समय से कई परेशानियों से गुजर रहा है। लवकेश की मां नीरज अक्सर बीमार रहती हैं, जबकि पिता राजेश के दिल में छेद है। इसके बावजूद पूरे परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। करियाणा की दुकान से घर का खर्च चलता रहा और लवकेश ने लगातार मेहनत जारी रखी। बहनों को भी भाई पर गर्व
लवकेश की दो छोटी बहनें भी अपने भाई की सफलता से बेहद खुश हैं। बहन काजल ने बताया कि उनके भाई ने हमेशा मेहनत की और कभी हार नहीं मानी। परिवार के सभी सदस्य उसकी पढ़ाई में सहयोग करते रहे। आज उसकी सफलता से पूरे परिवार को गर्व है। मां बोलीं-बेटा अफसर बने, यही सपना था
लवकेश की मां नीरज ने बताया कि उनका सपना था कि उनका बेटा अफसर बने। उन्होंने कहा कि बेटे ने हमेशा मेहनत की और पढ़ाई में पूरी लगन दिखाई। आज उसकी मेहनत रंग लाई है और वह सफल हुआ है। बेटे की सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। कविता लिखने का भी शौक
लवकेश को पढ़ाई के साथ-साथ कविता लिखने का भी शौक है। वे कहते हैं कि उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि अगर इंसान मेहनत करना जानता है तो पैसे की कमी उसे रोक नहीं सकती। उन्होंने युवाओं से कहा कि संघर्ष से घबराना नहीं चाहिए और लगातार मेहनत करते रहना चाहिए। आगे भी जारी रहेगी तैयारी
लवकेश का लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना है। 488वीं रैंक के आधार पर उन्हें भारतीय राजस्व सेवा मिलने की संभावना है। हालांकि उनका कहना है कि वे अभी भी पढ़ाई जारी रखेंगे और दोबारा परीक्षा देकर भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने की कोशिश करेंगे। लवकेश की सफलता से गांव मुनक में जश्न जैसा माहौल है। रिश्तेदारों, पड़ोसियों और गांव के लोगों का उनके घर पर आना-जाना लगा हुआ है। छोटे से घर और सीमित साधनों से निकलकर हासिल की गई यह सफलता आज पूरे इलाके के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।


