ई-कॉमर्स सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। देश की प्रमुख ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी फ्लिपकार्ट ने हाल ही में अपने वार्षिक परफॉर्मेंस रिव्यू के बाद करीब 400 से 500 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया है। मौजूद जानकारी के अनुसार यह संख्या कंपनी के कुल कर्मचारियों का लगभग 3 से 4 प्रतिशत बताई जा रही है।
मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक फ्लिपकार्ट हर साल परफॉर्मेंस के आधार पर कुछ कर्मचारियों को बाहर करने की प्रक्रिया अपनाता है, लेकिन इस बार यह संख्या सामान्य से थोड़ी ज्यादा बताई जा रही है। आमतौर पर कंपनी 1-2 प्रतिशत कर्मचारियों को ही इस प्रक्रिया के तहत हटाती रही है।
बताया जा रहा है कि इस बार की छंटनी ऑपरेशन, इंजीनियरिंग और मार्केटिंग जैसे कई विभागों में की गई है। कई कर्मचारियों को वार्षिक मूल्यांकन में कम रेटिंग मिलने के बाद परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान यानी पीआईपी में रखा गया था, जिसके बाद उन्हें संगठन से अलग होने को कहा गया।
कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि फ्लिपकार्ट नियमित रूप से परफॉर्मेंस रिव्यू की प्रक्रिया अपनाती है, जो तय मानकों और अपेक्षाओं के अनुसार होती है। इसी प्रक्रिया के तहत कुछ कर्मचारी संगठन से बाहर भी जाते हैं और उन्हें ट्रांजिशन के दौरान सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब फ्लिपकार्ट ने कर्मचारियों की संख्या घटाई है। इससे पहले साल 2023 में कंपनी ने करीब 1000 से 1200 कर्मचारियों को बाहर किया था। वहीं साल 2024 में भी कंपनी ने अपने कर्मचारियों की संख्या में करीब 5 से 7 प्रतिशत तक कटौती की थी।
बता दें कि वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट में फिलहाल करीब 18 हजार से 20 हजार कर्मचारी काम करते हैं। कंपनी पिछले कुछ समय से अपने मैनेजमेंट स्ट्रक्चर और लागत को संतुलित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार कंपनी अपने सीनियर लीडरशिप ढांचे में भी बदलाव कर रही है। पहले जहां करीब 18 सीनियर वाइस प्रेसिडेंट थे, अब उनकी संख्या घटाकर एक दर्जन से भी कम कर दी गई।
इस बीच फ्लिपकार्ट की ओर से भारत में पब्लिक लिस्टिंग यानी आईपीओ की तैयारी भी की जा रही है। इसी प्रक्रिया के तहत कंपनी अपने मुख्यालय को सिंगापुर से वापस भारत स्थानांतरित करने की दिशा में भी कदम उठा रही है। बताया जा रहा है कि इसके लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण से मंजूरी भी मिल चुकी है।
गौरतलब है कि ई-कॉमर्स सेक्टर में हाल के महीनों में कई कंपनियों ने लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटाने के कदम उठाए हैं। फ्लिपकार्ट की प्रतिस्पर्धी कंपनी अमेज़न ने भी इसी साल जनवरी में वैश्विक स्तर पर छंटनी की थी, जिसमें हजारों कर्मचारियों की नौकरी प्रभावित हुई थी।
उधर फ्लिपकार्ट अपने नए कारोबार को भी तेजी से बढ़ाने में लगी है। कंपनी ने पिछले साल अगस्त में अपनी क्विक कॉमर्स सेवा फ्लिपकार्ट मिनट्स शुरू की थी, जिसे देश के कई शहरों में तेजी से विस्तार दिया जा रहा है।
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो फ्लिपकार्ट इंटरनेट, जो कंपनी का मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म संचालित करता है, ने वित्त वर्ष 2025 में लगभग 20,493 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया है। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 14 प्रतिशत की वृद्धि है, जबकि इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध घाटा घटकर लगभग 1,494 करोड़ रुपये रह गया है।


