आकाशवाणी लखनऊ में ‘शक्ति रूपेण संस्थिता’ कार्यक्रम:अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति के विभिन्न आयामों पर चर्चा

आकाशवाणी लखनऊ में ‘शक्ति रूपेण संस्थिता’ कार्यक्रम:अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति के विभिन्न आयामों पर चर्चा

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आकाशवाणी लखनऊ में ‘शक्ति रूपेण संस्थिता’ नामक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आकाशवाणी परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में आमंत्रित श्रोताओं की उपस्थिति में नारी शक्ति के विभिन्न आयामों पर चर्चा की गई और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। कार्यक्रम का शुभारंभ बिरजू महाराज कथक संस्थान, लखनऊ की अध्यक्ष और मुख्य अतिथि डॉ. कुमकुम धर ने किया। उनके साथ विशिष्ट अतिथि साहित्यकार डॉ. विद्या बिंदु सिंह, आकाशवाणी लखनऊ के केंद्राध्यक्ष आरबी सिंह और कार्यक्रम प्रमुख सुमोना पांडेय सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित किया। महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी भूमिका का निर्वहन कर रही मुख्य अतिथि डॉ. कुमकुम धर ने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी भूमिका का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं और उनका आर्थिक रूप से सशक्त होना बेहद आवश्यक है। साहित्यकार डॉ. विद्या बिंदु सिंह ने महिला-पुरुष के बीच प्रतिस्पर्धा की बजाय पारस्परिक सहयोग को आवश्यक बताया। कार्यक्रम के ‘स्वयंसिद्धाः संकल्प से सफलता’ सत्र में कई हस्तियों ने अपने अनुभव साझा किए। इनमें पूर्व एथलीट व शूटर रचना गोविल, पाककला विशेषज्ञ अलका सिंह तोमर, योग प्रशिक्षिका प्राची जैन, एडवोकेट पूनम पांडेय, फिल्म व थिएटर कलाकार अर्चना शुक्ला और व्यवसायी तनुश्री गुप्ता शामिल थीं। कलाकारों ने मधुर गीतों की प्रस्तुति दी ‘किस्सागोई’ सत्र में वरिष्ठ पत्रकार अरशाना अज़मत ने स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना ऊदा देवी के शौर्य और बलिदान की प्रेरक कथा सुनाई।कार्यक्रम के अंतिम सत्र ‘राग संग बरसे रंग’ में आकाशवाणी के कलाकारों ने मधुर गीतों की प्रस्तुति दी। स्नेहिल श्रीवास्तव और उनके साथियों द्वारा प्रस्तुत होली गीत “मोरी चुनर में पड़ गए दाग…” और “हो नंदलाल मारे जाए…” ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम प्रमुख सुमोना पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि महिलाओं की उपलब्धियों और चुनौतियों को समझने तथा समाज में लैंगिक समानता के लिए संवाद बढ़ाने का अवसर है। कार्यक्रम का संचालन रूपाली चन्द्रा ने किया।

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