JH के पूर्व अधीक्षक की संदिग्ध मौत का मामला:परिजनों ने साथी डॉक्टरों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया, न्यायिक जांच की मांग

JH के पूर्व अधीक्षक की संदिग्ध मौत का मामला:परिजनों ने साथी डॉक्टरों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया, न्यायिक जांच की मांग

ग्वालियर में जयारोग्य चिकित्सालय समूह के पूर्व अधीक्षक डॉ. जगदीश सिंह सिकरवार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में नया मोड़ आया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि डॉ. सिकरवार ने साथी डॉक्टरों की प्रताड़ना के कारण ही आत्मघाती कदम उठाया। उन्होंने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। डॉ. जगदीश सिंह सिकरवार का शव 25 जनवरी को दोपहर 12 बजे विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के रेलवे ट्रैक किनारे मिला था। पुलिस ने शव को निगरानी में लेकर पोस्टमार्टम कराया और परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। पैथोलॉजी के साझेदारों से हुआ विवाद परिजनों ने अपनी पड़ताल में बताया कि 23 जनवरी को डॉ. सिकरवार एक निजी पैथोलॉजी गए थे। वहां उनका पैथोलॉजी के साझेदारों से हिसाब-किताब को लेकर विवाद हो गया था। परिजनों का आरोप है कि वहां मौजूद साझेदारों ने पैथोलॉजी स्टाफ के सामने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें धमकी भी दी, जिससे डॉ. सिकरवार काफी आहत हुए थे। परिजनों ने विशेष रूप से आरोप लगाया है कि निजी पैथोलॉजी में उनके साझेदार डॉ. रमेश प्रकाश गुप्ता, उनके भाई ललित गुप्ता और पुत्र सुधांशु गुप्ता ने डॉ. सिकरवार को धमकी दी और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। इसी प्रताड़ना के चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। पार्टनर की हरकतों से तंग आकर की आत्महत्या डॉ. सिकरवार की बहू अंतिमा सिंह ने अपने बयान में कहा था कि उनके ससुर ने अपने पार्टनर डॉ. रमेश प्रकाश गुप्ता की हरकतों से तंग आकर आत्महत्या की थी। ससुर और पार्टनर रमेश ने पैथोलॉजी में करीब 9 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की थी। जिसका हिसाब डॉ. जगदीश अपने पार्टनर रमेश से मांग रहे थे। हिसाब मांगने पर उन्हें बेइज्जत किया गया, जिसे वे बर्दाश्त नहीं कर पाए और आत्महत्या कर ली। इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की जाए और संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।

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