Mohan Bhagwat: सोनार किले की गलियों में बुलेटप्रूफ गाड़ी छोड़ ई-रिक्शा पर निकले मोहन भागवत, 871 साल बाद रचा जा रहा इतिहास

Mohan Bhagwat: सोनार किले की गलियों में बुलेटप्रूफ गाड़ी छोड़ ई-रिक्शा पर निकले मोहन भागवत, 871 साल बाद रचा जा रहा इतिहास

Mohan Bhagwat Visit to Jaisalmer: जैसलमेर की स्वर्ण नगरी शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संगम की साक्षी बनी। जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ‘चादर महोत्सव’ का शंखनाद करने सोनार किले की प्राचीर के भीतर पहुंचे।

बता दें कि करीब 871 साल के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हो रहे इस ‘महासंगम’ ने न केवल श्रद्धा का सैलाब उमड़ाया है। बल्कि सादगी की एक ऐसी तस्वीर पेश की, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है।

RSS Chief Mohan Bhagwat Visits Jaisalmer Fort for Historic Chadar Mahotsav Rides E-Rickshaw

बुलेटप्रूफ गाड़ी छोड़ ई-रिक्शा में सवार हुए भागवत

जैसलमेर के विश्व प्रसिद्ध सोनार किले की संकरी और घुमावदार गलियों में जब डॉ. मोहन भागवत का काफिला पहुंचा, तो सुरक्षा के कड़े घेरे के बावजूद दृश्य बेहद सामान्य और सादगी भरा था। वे किसी भारी-भरकम बुलेटप्रूफ गाड़ी के बजाय एक ई-रिक्शा में सवार होकर निकले।

किले के दशहरा चौक से लेकर पार्श्वनाथ जैन मंदिर तक की उनकी यह छोटी सी यात्रा सादगी का बड़ा संदेश दे गई। स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए संघ प्रमुख को इस अंदाज में देखना किसी सुखद आश्चर्य से कम नहीं था।

RSS Chief Mohan Bhagwat Visits Jaisalmer Fort for Historic Chadar Mahotsav Rides E-Rickshaw

871 साल पुरानी ‘अमर’ चादर के किए दर्शन

ई-रिक्शा से सीधे पार्श्वनाथ जैन मंदिर के मुख्य द्वार पहुंचे डॉ. भागवत ने मंदिर के गर्भगृह यानी ‘मूल गम्भारा’ में भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में माथा टेका और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। दर्शन के उपरांत वे ऐतिहासिक ‘जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार’ पहुंचे, जहां उन्होंने 11वीं सदी की उस अलौकिक ‘अमर चादर’ के दर्शन किए, जिसका इतिहास चमत्कारों से भरा है।

क्या है ऐतिहासिक संदर्भ

मान्यता है कि 11वीं सदी के महान आचार्य जिनदत्त सूरी के अग्नि-संस्कार के दौरान यह चादर अग्नि की लपटों के बीच भी सुरक्षित रही थी। 871 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अब पहली बार इस पावन चादर का विधिवत अभिषेक किया जा रहा है।

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कल बनेगा विश्व रिकॉर्ड: 1 करोड़ से अधिक श्रद्धालु करेंगे महापाठ

यह चादर महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक वैश्विक कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में बढ़ता कदम है। 7 मार्च को मोहन भागवत की गरिमामयी उपस्थिति में जैसलमेर से विश्व शांति का संदेश दिया जाएगा। इस दौरान दुनिया भर के 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालु एक साथ ‘दादागुरु इकतीसा’ का पाठ करेंगे।

इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए विशेष डाक टिकट और सिक्के जारी किए जाएंगे। फिलहाल, स्वर्ण नगरी में 400 से अधिक जैन संतों और 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा हुआ है।

अनुभव पंजी में दर्ज किए शब्द

दर्शन और पूजन के पश्चात ‘श्री जैसलमेर लोद्रवपुर पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर ट्रस्ट’ द्वारा डॉ. भागवत का भव्य बहुमान किया गया। संघ प्रमुख ने मंदिर की ‘विजिटर बुक’ (अनुभव पंजी) में अपने श्रद्धापूर्ण विचार भी साझा किए।

किले के कार्यक्रमों को संपन्न करने के बाद वे पुनः ई-रिक्शा के माध्यम से ही दशहरा चौक लौटे और वहां से देदांसर मेला ग्राउंड के लिए प्रस्थान कर गए। तीन दिवसीय इस चादर महोत्सव का भव्य समापन 8 मार्च को होगा, जो जैसलमेर के इतिहास में भक्ति और शक्ति के अनूठे मेल के रूप में दर्ज होगा।

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