Rent Vs buy Home: प्राइवेट सेक्टर में जॉब के लिए अक्सर अपना घर छोड़ना होता है। करोड़ों लोग अपने घर से दूर दिल्ली, मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में रहकर जॉब कर रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों के सामने यह सवाल आता है कि रेंट पर रहें या घर खरीद लें। दरअसल, इसका जवाब सभी के लिए एक जैसा नहीं है। सही फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस शहर में रहते हैं, वहां कितने समय तक रहने की योजना है, आपकी नौकरी कितनी स्टेबल है और आप फ्लेक्सिबिलिटी ज्यादा चाहते हैं या घर का मालिक बनना। महंगे महानगरों में अक्सर किराए पर रहना ज्यादा समझदारी भरा फैसला होता है। वहीं छोटे शहरों में घर खरीदना लंबे समय में बेहतर विकल्प हो सकता है।
मुंबई: ज्यादातर लोगों के लिए किराए पर रहना बेहतर
मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें भारत में सबसे ज्यादा हैं, जबकि किराये से मिलने वाला रिटर्न आमतौर पर 2-3% के आसपास रहता है। यहां घर खरीदने के लिए बहुत बड़ी शुरुआती पूंजी चाहिए। ईएमआई अक्सर किराए से काफी ज्यादा होती है। कीमतों में बढ़ोतरी होती है, लेकिन एंट्री कॉस्ट के मुकाबले धीमी हो सकती है। यदि आप 10 साल से ज्यादा समय तक रहने की योजना नहीं बना रहे हैं या आय बहुत स्टबल नहीं है, तो मुंबई में किराए पर रहना आमतौर पर बेहतर कैश फ्लो देता है।
दिल्ली-एनसीआर: मुंबई जैसा ही है हाल
दिल्ली-एनसीआर की स्थिति भी कई मायनों में मुंबई जैसी है। अच्छी प्रॉपर्टी के लिए कीमत काफी अधिक है। किराये से मिलने वाला रिटर्न लगभग 2 से 4 फीसदी है। अलग-अलग माइक्रो मार्केट में कीमतों की बढ़ोतरी अलग-अलग है। यदि आपकी नौकरी में बार-बार शहर बदलने की संभावना है, तो किराए पर रहना ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देता है। घर खरीदना तभी बेहतर है जब आप लंबे समय के लिए बस चुके हों।
बेंगलुरु: 5 साल से ज्यादा रुकना हो, तो ही खरीदें
आईटी सेक्टर की वजह से बेंगलुरु में प्रॉपर्टी की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। आईटी वर्कफोर्स के कारण किराए की भी मजबूत डिमांड है। नए इलाकों में कीमत बढ़ने की संभावना ज्यादा रहती है। यहां ईएमआई और किराए का अंतर मुंबई जितना बड़ा नहीं है।
अगर आप 4 से 8 साल या उससे ज्यादा समय तक रहने की योजना बना रहे हैं, तो घर खरीदना बेहतर हो सकता है, क्योंकि इससे आपको कीमत बढ़ने का फायदा भी मिलता है।
हैदराबाद और पुणे: बैलेंस्ड अपॉर्च्युनिटी
ये तेजी से बढ़ते शहर निवेश और रहने दोनों के लिए बैलेंस्ड अपॉर्च्युनिटी देते हैं। यहां मुंबई और दिल्ली की तुलना में प्रॉपर्टी की कम कीमत है। यहां इंफ्रास्ट्रक्चर और आईटी पार्क तेजी से डेवलप हो रहा है। यहां मीडियम टर्म में कीमत बढ़ने की अच्छी संभावना रहती है।
यदि आपकी नौकरी स्टेबल है और 20% या उससे ज्यादा डाउन पेमेंट दे सकते हैं, तो यहां घर खरीदना आर्थिक और भावनात्मक दोनों रूप से सही फैसला हो सकता है।
टियर-2 और टियर-3 सिटीज: घर खरीदना ज्यादा सही
इंदौर, कोयंबटूर या जयपुर जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें अपेक्षाकृत कम है। कई बार ईएमआई किराए के बराबर या उससे थोड़ी ज्यादा होती है। कीमतों में उतार-चढ़ाव भी अपेक्षाकृत कम है। यदि आप लंबे समय तक बसने की योजना बना रहे हैं, तो इन शहरों में घर खरीदना वेल्थ बनाने का अच्छा तरीका हो सकता है।
रेंट पर कब रहना चाहिए:
- आप 5-7 साल से कम समय तक रहने वाले हों।
- आपकी इनकम स्टेबल नहीं रहती हो।
- आपके ऊपर पहले से ज्यादा ब्याज वाला कर्ज हो।
- नौकरी या शहर बदलने की संभावना हो।
घर खरीदना कब है फायदेमंद:
- जब आप 20% या उससे ज्यादा डाउन पेमेंट दे सकते हों।
- ईएमआई आपकी आय के 30 से 35% से कम हो।
- आप लंबे समय तक एक ही शहर में रहना चाहते हो।
- इससे आपके पास एक बड़ा एसेट तैयार हो जाएदा।


