जयपुर: जलदाय विभाग के आला अफसरों का रवैया ऐसा है, मानो पेयजल उपभोक्ता जाएं भाड़ में, विभाग को तो सिर्फ अपनी सहूलियत देखनी है। स्थिति यह है कि शहर में बिलिंग सिस्टम और जल कनेक्शन की व्यवस्था को केन्द्रीयकृत कर दिया गया है और इसका खामियाजा शहर के पेयजल उपभोक्ता भुगत रहे हैं।
पानी के बिलों की डिवीजनवार व्यवस्था की जगह केन्द्रीयकृत व्यवस्था शहर के पांच लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं के लिए नासूर बन गई है। समय पर टेंडर नहीं होने से इस बार भी उपभोक्ताओं पर एक साथ चार महीने के बिल थोपे जाएंगे और उन्हें आर्थिक बोझ के पहाड़ का सामना करना पड़ेगा।
अन्य जिलों में डिवीजनवार, यहां एक फर्म को ही टेंडर
प्रदेश के अन्य जिलों में बिल वितरण की डिवीजनवार व्यवस्था है। ऐसे में वहां कभी भी पानी के बिलों को लेकर दिक्कत नहीं आती। लेकिन जयपुर शहर में विभाग के आला अफसरों ने कुछ फर्मों के पक्ष में लॉबिंग कर एक ही फर्म को बिलिंग का टेंडर देने की परंपरा शुरू कर दी। इसके बाद से ही पानी के बिलों को लेकर उपभोक्ताओं की समस्याएं बढ़ गई हैं और उन पर एक साथ चार से छह महीने के बिल थोपे जा रहे हैं।
उच्च अधिकारी मौन
इंजीनियरों ने जल कनेक्शन की व्यवस्था को भी अपने हिसाब से तय किया और एक जिले में एक ही फर्म को टेंडर देने की नई व्यवस्था लागू कर दी। लेकिन जयपुर शहर में यह व्यवस्था एक-एक जल कनेक्शन पर ‘ऊपर की कमाई’ के खेल में फंस गई है।
झोटवाड़ा के करधनी सब-डिवीजन में तो सेवा शुल्क नहीं देने पर दो से तीन महीने तक कनेक्शन जारी नहीं करने की शिकायतें स्थानीय लोग उच्च अधिकारियों तक कर चुके हैं, लेकिन उच्च अधिकारी पूरी तरह मौन साधे हुए हैं।


