जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की ओर से 6 से 8 मार्च तक डेडानसर मेला मैदान में दादा गुरुदेव जिनदत्त सूरि चादर महोत्सव आयोजित होगा। 872 वर्ष प्राचीन पावन वस्त्रों की आराधना के लिए देशभर से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
आयोजन में शताधिक साधु-साध्वी भगवंतों का सानिध्य रहेगा। जैन परंपरा के अनुसार विक्रम संवत 1132 में गुजरात के धोलका में जन्मे सोमचंद ने अल्पायु में दीक्षा लेकर आगे चलकर जिनदत्त सूरि के रूप में ख्याति प्राप्त की। विक्रम संवत 1211 में उनके देवलोक गमन के समय अग्नि संस्कार के दौरान धारण किए वस्त्र अक्षुण्ण रहे। यह घटना आस्था का प्रतीक बनी। बाद में ये वस्त्र पाटन संघ के संरक्षण में रहे। विक्रम संवत 1945 में जैसलमेर में उपद्रव शांत करने के लिए इन्हें यहां लाया गया। मान्यता है कि वस्त्रों से स्पर्शित जल के छिड़काव से संकट टला।
संघ प्रवक्ता पवन कोठारी के अनुसार आचार्य जिन मनोज्ञसूरि की प्रेरणा से महोत्सव का निर्णय हुआ। छह मार्च को मोहन भागवत विशिष्ट अतिथि रहेंगे। सात मार्च को शोभायात्रा निकलेगी तथा विश्वभर में एक करोड़ आठ लाख गुरु इकतीसा पाठ का जाप होगा। आठ मार्च को पूजन-विधान और विविध पदारोहण समारोह संपन्न होंगे।


