होली का त्योंहार पुरे जिले में धूमधाम से मनाया जा रहा है। जिले में होलिका दहन तो सभी स्थानों पर अलग अलग मुहूर्त के हिसाब से 2 मार्च को ही होलिका दहन किया गया था। लेकिन चंद्र ग्रहण के कारण कई क्षेत्रों में धुलण्डी पर होने वाले कार्यक्रम आज भी भी हो रहे हैं। नागौर शहर के कई इलाकों में आज डांडिया का आयोजन किया जायेगा। इस बार जिले में कई ग्रामीण क्षेत्रों में होली पर सामाजिक सरोकार के निर्णय लिए गए हैं। जिनमें सामाजिक कुप्रथाओं पर रोक के कई अहम फैसले जिले के कईं गांवों में लिए गए हैं। जिनमें शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची, दहेज़,मायरा, मृत्युभोज, पैरावणी की प्रथाओं से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए हैं।
जिले के मूंडवा ब्लॉक के करीब एक दर्जन गांवों में ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से सामाजिक कुरीतियों का बहिष्कार करने का लिया निर्णय, संखवास, सिलगांव, आमंडा की ढाणी, बलाया, भाकरोद, कुरकुड़ा खुर्द, नोखा चंदावता, खेरवाड़, फोरीजपुर सहित कई गांव में मौसर प्रथा तथा शादियों में फिजूल खर्ची रोकने की ग्रामीणों ने ली शपथ, ग्रामीणों के कुरीतियों को दूर करने के निर्णय लिए गए हैं।
नागौर जिले में इस बार होली का त्यौहार सामाजिक परिवर्तन की नई लहर लेकर आया है। जिले के विभिन्न गांवों और समाजों ने एकजुट होकर मृत्युभोज, दहेज और शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची जैसी कुप्रथाओं को जड़ से मिटाने के ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। मूंडवा ब्लॉक: एक दर्जन गांवों ने ली शपथ मूंडवा ब्लॉक के संखवास, सिलगांव, आमंडा, बलाया, भाकरोद और नोखा चंदावता सहित करीब 12 गांवों के ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से कुरीतियों के बहिष्कार का संकल्प लिया है। मृत्यु पर नियम: वृद्धजन के निधन पर मृत्युभोज बंद कर केवल एक मिठाई और साधारण भोजन की व्यवस्था रहेगी। शोक के 12 दिनों में मेहमानों को केवल चाय-सुपारी दी जाएगी। हरिद्वार जाने पर गुड़ बांटना और रिश्तेदारों को बुलाना प्रतिबंधित रहेगा। शादी-विवाह: पड़ला में 5 तोला से अधिक सोना और आधा किलो से अधिक चांदी नहीं ले जा सकेंगे। बारात में डीजे पूरी तरह बंद रहेगा, केवल बैंड-बाजा बजेगा। जाट समाज (जेजासनी और संखवास): कड़े प्रतिबंध लागू जेजासनी और संखवास के जाट समाज ने समाज सुधार के लिए लिखित प्रस्ताव पारित किए हैं। दिखावे पर रोक: गीत गाते समय बर्तन बांटना, मकर संक्रांति पर तेरुन्डा बांटना और पोता-पोती होने पर थाली बांटने जैसी परंपराएं बंद की गई हैं। आर्थिक दंड: नियमों का उल्लंघन करने पर सामाजिक बहिष्कार या आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। उपहार: मायरा और पैरावणी में कपड़ों (बेस) के स्थान पर नगद राशि (न्यूनतम 200 रुपये) देने को प्राथमिकता दी गई है। केरिया माकड़ा और कुचेरा: समाज की पहल केरिया माकड़ा ग्राम पंचायत में आयोजित राम-श्यामा बैठक में सर्व समाज ने सादगी अपनाने का संकल्प लिया। कुचेरा के मिर्धा परिवार ने भी बैठक कर मृत्यु के बाद किए जाने वाले श्राद्ध और तेहरवें दिन के ब्राह्मण भोज को बंद करने का निर्णय लिया है। विवाह में हल्दी-मेहंदी की रस्मों और अनावश्यक सामूहिक भोज पर भी रोक लगा दी गई है। कितलसर और गोटन: हाथ में गंगाजल लेकर लिया संकल्प कितलसर (डेगाना): मेघवाल समाज ने बाबा रामदेव सेवा समिति की अगुवाई में मौसर प्रथा को पूर्णतः बंद कर दिया है। समाज ने समय और धन की बचत के लिए अस्थि विसर्जन हेतु हरिद्वार के स्थान पर पुष्कर जाने का निर्णय लिया है। गोटन: खोखरों के बास में खोखर समाज के लोगों ने हाथ में गंगाजल लेकर कुरीतियों को समाप्त करने की शपथ ली। समाज ने स्पष्ट किया है कि नियमों को न मानने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्य निर्णयों पर एक नजर:
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