Nhaan Lokotsav 2026: कोटा जिले के सांगीद कस्बे में बुधवार को घुघरी की पारंपरिक रस्म के साथ न्हाण लोकोत्सव का आगाज़ हो गया। इसके साथ ही पांच दिन तक चलने वाले इस ऐतिहासिक उत्सव में श्रद्धा, परंपरा और उत्साह का संगम देखने को मिलेगा। 9 मार्च तक चलने वाले इस आयोजन में पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक उमड़े। शोभायात्रा में स्वांग कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुति से आकर्षण बढ़ाया।
5 मार्च को न्हाण अखाड़ा चौधरी पाड़ा की बारह भाले की सवारी के साथ पांच दिवसीय कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत होगी। शाम 4 बजे लुहारों के चौक से बारह भाले की सवारी निकाली जाएगी। 6 मार्च को सुबह चार बजे भवानी की सवारी निकलेगी, जिसमें देव विमानों को परंपरागत मार्गों से घुमाया जाएगा। इसी दिन शाम को लुहारों के चौक से बादशाह की सवारी धूमधाम से निकलेगी।
7 मार्च को पड़त (अवकाश) रहेगा। इसके बाद 8 मार्च को खाड़ा पक्ष की बारह भाले की सवारी निकलेगी। 9 मार्च को सुबह भवानी की सवारी और शाम को राजसी ठाठ-बाट के साथ हाथी पर बादशाह की शाही सवारी निकाली जाएगी। रात में महफिल आयोजन के साथ लोकोत्सव का भव्य समापन होगा।
शाही ठाट-बाट में उमराव
न्हाण उत्सव की खास पहचान छोटे-छोटे बच्चों का उमराव बनकर अश्वों पर सवार होना है। राजसी वेशभूषा में सजे ये नन्हें उमराव शोभायात्रा की भव्यता को कई गुना बढ़ा देते हैं। बच्चों में उमराव बनने को लेकर खासा उत्साह रहता है और दर्शकों की निगाहें भी उन पर टिकी रहती हैं। यह परंपरा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का माध्यम बन रही है।
किन्नरों की रंगीन प्रस्तुति
महोत्सव के दौरान दूर-दराज से आने वाले किन्नर भी आयोजन की रौनक बढ़ाते हैं। बादशाह की सवारी के आगे उनका नृत्य माहौल को जीवंत बना देता है। खासकर युवा वर्ग इन प्रस्तुतियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में जुटता है।
सेव-जलेबी की बहार
पांचों दिन बाजारों में उत्सव जैसा माहौल रहता है, लेकिन अंतिम दिन खाड़ा पक्ष की बारह भाले की सवारी के दौरान सेव-जलेबी की बिक्री चरम पर पहुंच जाती है। दुकानदार कई दिन पहले से तैयारी में जुट जाते हैं और गली-मोहल्लों में मिठाइयों की खुशबू फैल जाती है।
रिश्तों को जोड़ने का पर्व
न्हाण केवल धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप का भी बड़ा मंच है। खाड़े के न्हाण के दौरान कई परिवार शादी-ब्याह के संभावित रिश्तों पर चर्चा करने यहां पहुंचते हैं। इन दिनों अधिकांश घर मेहमानों से भरे रहते हैं और कई नए रिश्ते तय होते हैं, जो आगे चलकर मजबूत पारिवारिक संबंधों में बदल जाते हैं।


