आजकल पेरेंट्स अपने बच्चों को व्यस्त रखने के लिए उनके हाथों में स्मार्टफोन पकड़ा देते हैं, जिसमें बच्चा घंटो स्मार्टफोन चलाता रहता है। यदि आप भी अपने बच्चे को इसी तरह से मोबाइल हाथ में देकर उसे स्क्रीन का आदि बना रहे हैं तो सावधान हो जाएं। कहीं ऐसा न हो कि बच्चा स्क्रीन मायोपिया का शिकार हो जाए, क्योंकि इन दिनों जोधपुर के मथुरादास माथुर हॉस्पिटल की OPD में इसी तरह के मरीज पहुंच रहे हैं।
हॉस्पिटल की डॉक्टर सिमरन ने बताया कि आजकल OPD में यहां पर बहुत सारे बच्चे आ रहे हैं जिनकी आंखों से पानी आ रहा है , या आंखे धुंधली हो रही है। ऐसे बच्चों की कम उम्र में देखने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इसके पीछे के प्रमुख कारणों की बात की जाए तो आजकल माता पिता अपने बच्चों को व्यस्त रखने के लिए उन्हें मोबाइल हाथ में पकड़ा देते हैं। इसके चलते बच्चा मोबाइल पर कई घंटों तक गेम्स, कार्टून या वीडियो आदि देखता रहता है। इसकी वजह से उनकी आँखें खराब हो रही है, आंखों से पानी आना, धुंधला दिखाई देना आदि इसके प्रमुख कारण है। मेडिकल की भाषा में इसे मायोपिया कहा जाता है। जिसमें बच्चे लगातार स्क्रीन देखते हैं, जिससे आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं। मोबाइल की नीली रोशनी (ब्लू लाइट) रेटिना को नुकसान पहुंचाती है। नतीजा- आंखों का आकार बढ़ना और दूर की चीजें धुंधली दिखने लग जाती है। मोबाइल नहीं दें हाथ में इससे बचने के लिए पेरेंट्स अपने बच्चों को मोबाइल देने के बजाय उनसे फिजिकल एक्टिविटी वाले गेम्स खिलाएं। बजाय मोबाइल देने के उन्हें समझाएं कि इसका उनके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। यदि मोबाइल देना भी पड़े तो उसका स्क्रीन टाइम सेट करें, ब्लू लाइट फिल्टर लगाएं। इसके अलावा समय समय पर उनकी आंखों की जांच करवाते रहें।।


