कैग ने दिखाए सड़कों में ‘सिस्टम के गड्ढे’:20% अनिवार्य सामग्री का परीक्षण नहीं, अधूरे काम के बावजूद जारी किए प्रमाण पत्र

कैग ने दिखाए सड़कों में ‘सिस्टम के गड्ढे’:20% अनिवार्य सामग्री का परीक्षण नहीं, अधूरे काम के बावजूद जारी किए प्रमाण पत्र

कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (कैग) की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट-7 ने इंदौर की सड़कों को भी बेनकाब किया है। रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर जिले और संभाग में बनी सड़कों पर सरकारी पैसा तो खूब खर्च हुआ, लेकिन योजना, गुणवत्ता और निगरानी तीनों मोर्चों पर गंभीर कमियां सामने आई हैं। इंदौर-उज्जैन संभाग की कई सड़कों को लेकर सीधे तौर पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। जिन सड़कों को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और विकास की रीढ़ माना गया, वही सड़कें डिजाइन, लागत और गुणवत्ता के मामले में सवालों के घेरे में हैं। रिपोर्ट में इंदौर संभाग को पीडब्ल्यूडी वेस्ट जोन, इंदौर के तहत ऑडिट कवरेज में लिया गया। इंदौर डिवीजन-I में बनी कई एमडीआर (मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड) और ओडीआर (अदर डिस्ट्रिक्ट रोड) के लिए टेंडर प्रक्रिया के बावजूद सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा। इन सड़कों के टेंडर निगेटिव प्रतिशत पर स्वीकृत हुए थे। अनुमान (एस्टीमेट) अव्यावहारिक था, जिससे बाद में अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा। क्वालिटी कंट्रोल की निगरानी नहीं इंदौर संभाग में सड़कों पर ये अनियमितता हुई नेशनल और स्टेट कनेक्टिविटी का दावा, लेकिन प्लानिंग अधूरी
इंदौर की कई एमडीआर/ओडीआर सड़कों को नेशनल और स्टेट हाईवे से जोड़ने के लिए बनाया। कैग ने पाया कि इन प्रोजेक्ट के लिए बेनीफिट कास्ट रेशो का आकलन ही नहीं किया गया। यानी यह तय ही नहीं हुआ कि सड़क पर किया गया खर्च कितना वाजिब है। डीपीआर में तकनीकी विवरण तो था, लेकिन आर्थिक औचित्य नहीं दर्शाया गया।

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