जहानाबाद में नमाज के बाद सड़कों पर उतरे लोग:ईरान मुद्दे पर अमेरिका-इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन, काले झंडों के साथ नारेबाजी की

जहानाबाद में नमाज के बाद सड़कों पर उतरे लोग:ईरान मुद्दे पर अमेरिका-इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन, काले झंडों के साथ नारेबाजी की

जहानाबाद जिले के अली नगर पाली में शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन ईरान पर कथित हमले और सैयद अली खमनाई की मौत के विरोध में आयोजित किया गया था। जुमा की नमाज के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और एक जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां और काले झंडे थे, जिन पर ‘अमेरिका मुर्दाबाद’, ‘इजरायल मुर्दाबाद’, ‘ईरान जिंदाबाद’ और ‘खामनाई जिंदाबाद’ जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारियों ने 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर शुरू किए गए कथित युद्ध में सैयद अली खमनाई की मौत का विरोध किया। उनका कहना था कि इस घटना के बाद से शिया और सुन्नी समुदाय के लोग जगह-जगह अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं। शहादत को कयामत तक याद रखने की बात कही
इस अवसर पर हाफिज जुबेर अहमद ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने 86 वर्षीय सैयद अली खमनाई की हत्या की है, लेकिन उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैयद अली खमनाई बेबस, लाचार और जुल्म के खिलाफ हमेशा लड़ते रहे। अमेरिका चाहता था कि खमनाई झुक जाएं, लेकिन कर्बला के अनुयायी होने के नाते उन्होंने कभी बातिल के सामने सर नहीं झुकाया और मरना पसंद किया। शिया जामा मस्जिद के इमाम सैयद कल्बे हुसैन जाफरी ने भी इमाम खमनाई की शहादत को कयामत तक याद रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि खमनाई ने इस उम्र में भी जिस ताकत का प्रदर्शन किया, वह हमारे युवाओं में जोश भरने का काम करता है। शहादत पूरी दुनिया में एक इंकलाब पैदा कर रही
जुलूस में शामिल सैयद मुबारक हसन उर्फ छोटन ने कहा कि सैयद अली खमनाई की शहादत पूरी दुनिया में एक इंकलाब पैदा कर रही है और लोग उन्हें कयामत तक याद रखेंगे। इस विरोध प्रदर्शन में संजर इमाम, अरमान, साबिर कुरेशी, मोहम्मद मिस्टर, शाहनवाज हैदर, सज्जू हैदर, अली इमाम अकील काजमी, मो. राशिद, मो. आरिफ, मो. अरशद सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे। जहानाबाद जिले के अली नगर पाली में शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन ईरान पर कथित हमले और सैयद अली खमनाई की मौत के विरोध में आयोजित किया गया था। जुमा की नमाज के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और एक जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां और काले झंडे थे, जिन पर ‘अमेरिका मुर्दाबाद’, ‘इजरायल मुर्दाबाद’, ‘ईरान जिंदाबाद’ और ‘खामनाई जिंदाबाद’ जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारियों ने 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर शुरू किए गए कथित युद्ध में सैयद अली खमनाई की मौत का विरोध किया। उनका कहना था कि इस घटना के बाद से शिया और सुन्नी समुदाय के लोग जगह-जगह अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं। शहादत को कयामत तक याद रखने की बात कही
इस अवसर पर हाफिज जुबेर अहमद ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने 86 वर्षीय सैयद अली खमनाई की हत्या की है, लेकिन उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैयद अली खमनाई बेबस, लाचार और जुल्म के खिलाफ हमेशा लड़ते रहे। अमेरिका चाहता था कि खमनाई झुक जाएं, लेकिन कर्बला के अनुयायी होने के नाते उन्होंने कभी बातिल के सामने सर नहीं झुकाया और मरना पसंद किया। शिया जामा मस्जिद के इमाम सैयद कल्बे हुसैन जाफरी ने भी इमाम खमनाई की शहादत को कयामत तक याद रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि खमनाई ने इस उम्र में भी जिस ताकत का प्रदर्शन किया, वह हमारे युवाओं में जोश भरने का काम करता है। शहादत पूरी दुनिया में एक इंकलाब पैदा कर रही
जुलूस में शामिल सैयद मुबारक हसन उर्फ छोटन ने कहा कि सैयद अली खमनाई की शहादत पूरी दुनिया में एक इंकलाब पैदा कर रही है और लोग उन्हें कयामत तक याद रखेंगे। इस विरोध प्रदर्शन में संजर इमाम, अरमान, साबिर कुरेशी, मोहम्मद मिस्टर, शाहनवाज हैदर, सज्जू हैदर, अली इमाम अकील काजमी, मो. राशिद, मो. आरिफ, मो. अरशद सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।  

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