IG एम सुनील नायक 5 मार्च को जाएंगे आंध्र प्रदेश:कोर्सिव एक्शन पर रोक, 9 मार्च को सुनवाई; वकील बोले- जबरन उनको आंध्र पुलिस ले जा रही थी

IG एम सुनील नायक 5 मार्च को जाएंगे आंध्र प्रदेश:कोर्सिव एक्शन पर रोक, 9 मार्च को सुनवाई; वकील बोले- जबरन उनको आंध्र पुलिस ले जा रही थी

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने बिहार कैडर के आईपीएस आईजीएम सुनील नायक के खिलाफ आंध्र पुलिस को कोर्सिव एक्शन लेने पर रोक लगा दी है। अब आंध्र पुलिस सुनील नायक के साथ सख्ती नहीं बरत सकती है। मंगलवार को अधिवक्ता कुणाल तिवारी ने बताया कि आईजीएम नायक की ओर से हम लोगों ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में एंटीसिपेटरी बेल की अर्जी लगाई थी। सनी के दौरान एक अलग से हम लोगों ने इंटिरिम प्रोटेक्शन के लिए भी फाइल किया था। इस दौरान आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से भी प्रॉसिक्यूटर और इनफॉर्मेंट के वकील भी मौजूद रहे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सुनील नायक को इन्वेस्टिगेशन के दौरान कॉर्पोरेट करने का आदेश दिया। साथ ही साथ आंध्र प्रदेश पुलिस को स्ट्रिक्टली अकॉर्डिंग टू लॉ स्टेटमेंट रिकॉर्ड कीजिए। इन्वेस्टिगेशन कीजिए। लेकिन इस दौरान कोअर्सिव एक्शन नहीं लेंगे। कोर्ट ने अगले 5 मार्च को केस के आईओ के सामने आईजीएम सुनील नायक को उपस्थित होकर अपना स्टेटमेंट रिकॉर्ड कराने का निर्देश दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी। एक सप्ताह पहले पुलिस ने किया जबरन अरेस्ट अधिवक्ता कुणाल तिवारी ने बताया एक सप्ताह पहले आंध्र पुलिस ने आईजीएम सुनील नायक के खिलाफ आधे अधूरी डॉक्यूमेंट के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी थी। महज एक उनका स्टेटमेंट रिकॉर्ड करने के लिए बिना वारंट उन्हें अरेस्ट करके अपने साथ ले जाना चाहती थी। सुबह के वक्त पुलिस उनकी सरकारी आवास पर पहुंची थी इसमें बहुत सारे लूपहोल्स पाए गए थे। यहां तक कि लोकल शास्त्री नगर थाने को भी इसके बारे में इन्फॉर्म नहीं किया गया था। अचानक सुबह के वक्त आईजीएम सुनील नायक ने मुझे अपनी आवाज पर बुलाया और आंध्र पुलिस को सहयोग करते हुए सिर्फ यह कहा कि डॉक्युमेंट्स इन लोगों का देख लीजिए। इनके पास क्या है। मैं जब इन्वेस्टिगेशन पदाधिकारी से वारंट के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि इसमें वारंट की जरूरत नहीं है। बिना दस्तावेज आंध्र पुलिस सुनील नायक को साथ ले जाना चाहती थी जब मैंने पूछा कि क्या इसके बारे में लोकल पुलिस को जानकारी है, तो उन्होंने कहा कि बात लीक हो जाएगी। इसीलिए नहीं इन्फॉर्म किया गया है। यानी बगैर किसी वैलिड डॉक्युमेंट्स के आंध्र पुलिस सुनील नायक को अरेस्ट करके अपने साथ ले जाना चाहती थी। इसके बाद हम लोगों ने न्यायालय का रुख किया और कोर्ट ने सुनवाई के बाद ट्रांजिट रिमांड की अर्जी आंध्र पुलिस की रिफ्यूज कर दी। जबकि आईजीएम सुनील नायक ने कभी अपना स्टेटमेंट रिकॉर्ड कराने से नहीं मना किया। पूरी तरह से सहयोग कर रहे थे। आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने बिहार कैडर के आईपीएस आईजीएम सुनील नायक के खिलाफ आंध्र पुलिस को कोर्सिव एक्शन लेने पर रोक लगा दी है। अब आंध्र पुलिस सुनील नायक के साथ सख्ती नहीं बरत सकती है। मंगलवार को अधिवक्ता कुणाल तिवारी ने बताया कि आईजीएम नायक की ओर से हम लोगों ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में एंटीसिपेटरी बेल की अर्जी लगाई थी। सनी के दौरान एक अलग से हम लोगों ने इंटिरिम प्रोटेक्शन के लिए भी फाइल किया था। इस दौरान आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से भी प्रॉसिक्यूटर और इनफॉर्मेंट के वकील भी मौजूद रहे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सुनील नायक को इन्वेस्टिगेशन के दौरान कॉर्पोरेट करने का आदेश दिया। साथ ही साथ आंध्र प्रदेश पुलिस को स्ट्रिक्टली अकॉर्डिंग टू लॉ स्टेटमेंट रिकॉर्ड कीजिए। इन्वेस्टिगेशन कीजिए। लेकिन इस दौरान कोअर्सिव एक्शन नहीं लेंगे। कोर्ट ने अगले 5 मार्च को केस के आईओ के सामने आईजीएम सुनील नायक को उपस्थित होकर अपना स्टेटमेंट रिकॉर्ड कराने का निर्देश दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी। एक सप्ताह पहले पुलिस ने किया जबरन अरेस्ट अधिवक्ता कुणाल तिवारी ने बताया एक सप्ताह पहले आंध्र पुलिस ने आईजीएम सुनील नायक के खिलाफ आधे अधूरी डॉक्यूमेंट के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी थी। महज एक उनका स्टेटमेंट रिकॉर्ड करने के लिए बिना वारंट उन्हें अरेस्ट करके अपने साथ ले जाना चाहती थी। सुबह के वक्त पुलिस उनकी सरकारी आवास पर पहुंची थी इसमें बहुत सारे लूपहोल्स पाए गए थे। यहां तक कि लोकल शास्त्री नगर थाने को भी इसके बारे में इन्फॉर्म नहीं किया गया था। अचानक सुबह के वक्त आईजीएम सुनील नायक ने मुझे अपनी आवाज पर बुलाया और आंध्र पुलिस को सहयोग करते हुए सिर्फ यह कहा कि डॉक्युमेंट्स इन लोगों का देख लीजिए। इनके पास क्या है। मैं जब इन्वेस्टिगेशन पदाधिकारी से वारंट के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि इसमें वारंट की जरूरत नहीं है। बिना दस्तावेज आंध्र पुलिस सुनील नायक को साथ ले जाना चाहती थी जब मैंने पूछा कि क्या इसके बारे में लोकल पुलिस को जानकारी है, तो उन्होंने कहा कि बात लीक हो जाएगी। इसीलिए नहीं इन्फॉर्म किया गया है। यानी बगैर किसी वैलिड डॉक्युमेंट्स के आंध्र पुलिस सुनील नायक को अरेस्ट करके अपने साथ ले जाना चाहती थी। इसके बाद हम लोगों ने न्यायालय का रुख किया और कोर्ट ने सुनवाई के बाद ट्रांजिट रिमांड की अर्जी आंध्र पुलिस की रिफ्यूज कर दी। जबकि आईजीएम सुनील नायक ने कभी अपना स्टेटमेंट रिकॉर्ड कराने से नहीं मना किया। पूरी तरह से सहयोग कर रहे थे।  

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