इस्कॉन मंदिर में आज चैतन्य महाप्रभु का प्राकट्य दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सुमधुर कीर्तन का आयोजन किया गया। भगवान का महाभिषेक सहस्र तीर्थ जल से किया गया। वहीं, भगवान को 108 पकवानों का महाभोग लगाया गया। इस अवसर पर इस्कॉन मंदिर को देश-विदेश से मंगाए गए रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक लाइटिंग से भव्य रूप से सजाया गया। राधा-कृष्ण का भव्य श्रृंगार किया गया राधा-कृष्ण का भव्य श्रृंगार और फूलों की सुगंधित सजावट ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। पूजा के बाद महा आरती भी की गई। टेम्पल मैनेजमेंट काउंसिल के को-चेयरमैन रमन मनोहर दास ने कहा कि चैतन्य महाप्रभु कुछ और नहीं, राधाकृष्ण के युगल अवतार हैं। कलिकाल में उनका अवतरण हरिनाम को प्रसिद्ध करने के लिए ही हुआ है। भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया इस्कॉन मैनेजमेंट काउंसिल के सदस्य राधापति चरण दास ने अपने वक्तव्य में कहा कि श्री चैतन्य महाप्रभु को हरिनाम बहुत ही पसंद है। गोरा-गोरा अंग होने के कारण उन्हें गौरांग भी कहा गया है। महाप्रभु ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि एक समय ऐसा आएगा कि गांव-गांव और नगर-नगर में हरिनाम का प्रचार-प्रसार बहुत ही जोरों से होगा। पूजा के बाद भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। इस्कॉन मंदिर में आज चैतन्य महाप्रभु का प्राकट्य दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सुमधुर कीर्तन का आयोजन किया गया। भगवान का महाभिषेक सहस्र तीर्थ जल से किया गया। वहीं, भगवान को 108 पकवानों का महाभोग लगाया गया। इस अवसर पर इस्कॉन मंदिर को देश-विदेश से मंगाए गए रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक लाइटिंग से भव्य रूप से सजाया गया। राधा-कृष्ण का भव्य श्रृंगार किया गया राधा-कृष्ण का भव्य श्रृंगार और फूलों की सुगंधित सजावट ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। पूजा के बाद महा आरती भी की गई। टेम्पल मैनेजमेंट काउंसिल के को-चेयरमैन रमन मनोहर दास ने कहा कि चैतन्य महाप्रभु कुछ और नहीं, राधाकृष्ण के युगल अवतार हैं। कलिकाल में उनका अवतरण हरिनाम को प्रसिद्ध करने के लिए ही हुआ है। भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया इस्कॉन मैनेजमेंट काउंसिल के सदस्य राधापति चरण दास ने अपने वक्तव्य में कहा कि श्री चैतन्य महाप्रभु को हरिनाम बहुत ही पसंद है। गोरा-गोरा अंग होने के कारण उन्हें गौरांग भी कहा गया है। महाप्रभु ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि एक समय ऐसा आएगा कि गांव-गांव और नगर-नगर में हरिनाम का प्रचार-प्रसार बहुत ही जोरों से होगा। पूजा के बाद भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।


