भागलपुर में होली का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। जहां शहरी क्षेत्रों में रंग-गुलाल की धूम है, वहीं ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक फगुआ गीतों की गूंज सुनाई दे रही है। गांवों में ढोल की थाप पर लोग झूमते नजर आ रहे हैं। जिले के पीरपेंती इलाके में होली की विशेष रौनक देखने को मिल रही है। यहां बुजुर्गों और युवाओं ने एक साथ बैठकर पारंपरिक फगुआ गीत गाए और भाईचारे के साथ पर्व मनाया। गांव की चौपाल पर ढोल-मंजीरे की धुन के साथ होली के धार्मिक और सांस्कृतिक गीत गूंजते रहे। पूर्वजों की परंपरा को जीवित रखा इस अवसर पर सरपंच वरुण गोस्वामी, गुड्डू और रितेश सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि फगुआ गीतों के माध्यम से वे अपने पूर्वजों की परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा पर्व है। ग्रामीणों के अनुसार, फगुआ गीतों में देवी-देवताओं की स्तुति, पौराणिक कथाएं और सामाजिक संदेश समाहित होते हैं। यह आधुनिकता के दौर में भी अपनी परंपराओं को न भूलने का प्रतीक है। हर वर्ष होली के अवसर पर गांव में सामूहिक रूप से फगुआ गाया जाता है, जिससे आपसी प्रेम, एकता और सौहार्द मजबूत होता है। भागलपुर के ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक अंदाज में मनाई जा रही यह होली सांस्कृतिक विरासत की जीवंत मिसाल पेश कर रही है। भागलपुर में होली का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। जहां शहरी क्षेत्रों में रंग-गुलाल की धूम है, वहीं ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक फगुआ गीतों की गूंज सुनाई दे रही है। गांवों में ढोल की थाप पर लोग झूमते नजर आ रहे हैं। जिले के पीरपेंती इलाके में होली की विशेष रौनक देखने को मिल रही है। यहां बुजुर्गों और युवाओं ने एक साथ बैठकर पारंपरिक फगुआ गीत गाए और भाईचारे के साथ पर्व मनाया। गांव की चौपाल पर ढोल-मंजीरे की धुन के साथ होली के धार्मिक और सांस्कृतिक गीत गूंजते रहे। पूर्वजों की परंपरा को जीवित रखा इस अवसर पर सरपंच वरुण गोस्वामी, गुड्डू और रितेश सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि फगुआ गीतों के माध्यम से वे अपने पूर्वजों की परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा पर्व है। ग्रामीणों के अनुसार, फगुआ गीतों में देवी-देवताओं की स्तुति, पौराणिक कथाएं और सामाजिक संदेश समाहित होते हैं। यह आधुनिकता के दौर में भी अपनी परंपराओं को न भूलने का प्रतीक है। हर वर्ष होली के अवसर पर गांव में सामूहिक रूप से फगुआ गाया जाता है, जिससे आपसी प्रेम, एकता और सौहार्द मजबूत होता है। भागलपुर के ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक अंदाज में मनाई जा रही यह होली सांस्कृतिक विरासत की जीवंत मिसाल पेश कर रही है।


