होली से ठीक पहले मंगलवार को लगने वाले चंद्र ग्रहण को लेकर शहर में विशेष धार्मिक सतर्कता देखी जा रही है। सूतक काल प्रारंभ होते ही सुबह 6:20 बजे से ही शहर के सभी छोटे-बड़े मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और नियमित पूजा-अर्चना अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई है। शहर के प्रमुख मंदिरों—मनकामेश्वर, कैलाश, रावली, राजेश्वर और लंगड़े की चौकी सहित अन्य प्रमुख देवालयों के कपाट भी सूतक लगते ही बंद कर दिए गए। मंदिरों में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों को विधि-विधान से ढक दिया गया है और ग्रहण काल तक किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान नहीं किए जा रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित सुभाष शास्त्री के अनुसार ग्रहण का स्पर्श अपराह्न 3:20 बजे होगा और मोक्ष शाम 6:47 बजे है। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट रहेगी। उन्होंने बताया कि चंद्र ग्रहण से पूर्व तीन पहर यानी लगभग 9 घंटे पहले भोजन त्याग करना शुभ माना जाता है। हालांकि बालक, वृद्ध और रोगियों को इस नियम में छूट दी गई है। ग्रहण के प्रभाव से बचाव के लिए भोजन में कुशा या तुलसी दल डालने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में घर के भीतर रहकर भजन-कीर्तन करने की सलाह दी गई है। सामर्थ्य अनुसार चावल, दूध और चांदी जैसी श्वेत वस्तुओं का दान पुण्यदायी माना गया है। ग्रहण मोक्ष के समय शाम 6:47 बजे सभी मंदिरों के कपाट खोले जाएंगे। इसके बाद मंदिरों में विधिवत साफ-सफाई और धुलाई की जाएगी तथा शुद्धिकरण के पश्चात ही नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन की व्यवस्था पुनः शुरू की जाएगी।


