होली की छुटि्यों में लोग घर लौट रहे हैं। इस वजह से ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ ज्यादा है। जनरल कोच में जिन यात्रियों को जगह नहीं मिल रही है वे बिना रिजर्वेशन स्लीपर और एसी कोच में घूस रहे हैं। चाहे उन्हें बैठने की जगह मिले या न मिले। वे खड़े होकर यात्रा कर रहे हैं। इस वजह से जो रिजर्वेशन वाले यात्री हैं उन्हें परेशानी हो जाती है। कई बार यात्रियों के बीच कहासुनी हो जाती है। यात्रियों का कहना है कि हम दिल्ली से पटना धक्के खाकर पहुंचे हैं। भास्कर की टीम पटना जंक्शन पहुंची तो क्या हालात थे, यात्रियों की क्या नाराजगी रही, रेलवे की क्या व्यवस्था थी पढ़िए रिपोर्ट…
सबसे पहले कुछ तस्वीरें देखें… अब सिलसिलेबार पढ़िए यात्रियों ने क्या कहा… बच्चों के साथ सफर करना मुश्किल हो गया नई दिल्ली से पूरे परिवार के साथ पटना पहुंचे प्रेम कुमार ने कहा, जनरल और स्लीपर में कोई फर्क नहीं दिखा। भीड़ इतनी थी कि वॉशरूम जाने का रास्ता भी नहीं था। बच्चों के साथ सफर करना मुश्किल हो गया था। रेलवे सिर्फ दावे करता है, जमीनी हकीकत कुछ और है।
ट्रेन में व्यवस्था नाम की चीज ही नहीं उड़ीसा से पटना घूमने पहुंचे एक परिवार ने बताया कि भीड़ का अंदाजा मुझे बिहार पहुंचने से करीब 30 किलोमीटर पहले ही हो गया था। लोग बिना रिजर्वेशन 3rd AC में घुस गए। ऐसा लग रहा था जैसे जनरल कोच में सफर कर रहे हों। ट्रेन में व्यवस्था नाम की चीज नहीं थी।
बच्चों के साथ ट्रेन में चढ़ना मुश्किल हो गया था दिल्ली के फरीदाबाद से होली मनाने पटना पहुंचे गोपाल पासवान ने बताया कि जंक्शन पर हालात इतने खराब थे कि परिवार और बच्चों के साथ ट्रेन में चढ़ पाना मुश्किल हो गया। दो ट्रेनें छूट गईं। 5 घंटे प्लेटफॉर्म पर इंतजार करना पड़ा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी। धक्के खाकर पटना पहुंचा हूं।
स्लीपर में इतनी भीड़, लग रहा था कि जनरल कोच में हूं नई दिल्ली से आए रमेश राम ने कहा, दिल्ली से किसी तरह धक्के खाकर पटना पहुंचा हूं। ट्रेन में जगह बनाने के लिए दौड़ लगानी पड़ रही थी। मुकेश शर्मा, जो दिल्ली में फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। उन्होंने कहा कि भेड़-बकरी की तरह धक्के खाते हुए आया हूं। एसी और स्लीपर में भीड़ देखकर लगा कि जनरल में सफर कर रहे हैं।
ट्रेन में चढ़ने-उतरने के लिए धक्का-मुक्की करनी पड़ी पटना जंक्शन पर सोमवार को प्लेटफार्म नंबर-1 पर यात्रियों की भीड़ ज्यादा थी। दिल्ली, मुंबई, हरियाणा, सूरत और पंजाब से आने वाली ट्रेनों में ज्यादा क्राउड था। सुबह से ही प्लेटफॉर्म पर यात्रियों का हुजूम उमड़ने लगा था। लोकल ट्रेनों में सामान्य दिनों के मुकाबले लगभग 25 प्रतिशत अधिक यात्री यात्रा कर रहे थे। गयाजी, नवादा, आरा, बिहिया, सहरसा, बख्तियारपुर और मोकामा जाने वाली ट्रेनों में पैर रखने की भी जगह नहीं थी। जनरल बोगियों के साथ-साथ स्लीपर और एसी कोच भी भीड़ से भरे हुए थे। कई यात्री ट्रेनों के गेट पर लटककर यात्रा करने को मजबूर दिखे। प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर ट्रेनों के पहुंचने पर स्थिति और बिगड़ गई। उतरने और चढ़ने वाले यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की होने लगी। सामान के बीच बच्चों को संभालती महिलाओं के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण थी।
रेल पुलिस सक्रिय नहीं दिखी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए न तो पर्याप्त आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) और न ही जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) के जवान सक्रिय दिखे। यात्रियों ने आरोप लगाया कि व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दी गई थी। लंबी दूरी की ट्रेनों में भी यात्रियों का हाल बेहाल था। विक्रमशिला एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस, आनंद विहार से आने वाली ट्रेनों के साथ-साथ हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस और अमृतसर-हावड़ा एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से बड़ी संख्या में यात्री पटना पहुंचे। जिन यात्रियों के पास आरक्षण नहीं था, वे भी किसी तरह कोच में घुस गए।
होल्डिंग एरिया का दावा फेल
रेलवे ने पर्व-त्योहार के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए होल्डिंग एरिया बनाने की घोषणा की थी, लेकिन पटना जंक्शन पर इसका कोई असर नहीं दिखा। यदि यात्रियों को चरणबद्ध तरीके से प्लेटफॉर्म पर भेजा जाता, तो भीड़ नियंत्रित हो सकती थी, लेकिन कई ट्रेनों के यात्री एक साथ प्लेटफॉर्म पर पहुंच गए, जिससे भीड़ अनियंत्रित दिखी और ट्रेनों में सफर करना मुश्किल हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होल्डिंग एरिया, अतिरिक्त टिकट चेकिंग स्टाफ और प्लेटफॉर्म पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था से हालात सुधर सकते थे। लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसी कोई तैयारी नजर नहीं आई। हर कदम पर संघर्ष करना पड़ रहा
रेलवे का दावा है कि त्योहारों को देखते हुए अतिरिक्त कोच जोड़े गए हैं और विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है, लेकिन पटना जंक्शन पर दिखी तस्वीर इन दावों से मेल नहीं खाती। यात्रियों की मानें तो ट्रेन में चढ़ने से लेकर प्लेटफॉर्म से बाहर निकलने तक हर कदम पर संघर्ष करना पड़ रहा है। होली पर घर लौटने की खुशी जरूर चेहरों पर दिखी, लेकिन सफर की पीड़ा उससे कहीं ज्यादा भारी पड़ी।
हालांकि पूर्व मध्य रेलवे (ECR) ने यात्रियों की सुविधा के लिए 58 स्पेशल ट्रेनें चलाने की घोषणा कर दी है। इन ट्रेनों का परिचालन पटना, दानापुर, बरौनी, दरभंगा, रक्सौल, सहरसा, समस्तीपुर, मधुबनी, धनबाद, शेखपुरा, जयनगर, झंझारपुर , मानसी सहित अन्य स्टेशनों से किया जाएगा।
विभिन्न शहरों तक स्पेशल ट्रेन
यह विशेष ट्रेन नई दिल्ली, आनंद विहार, मुंबई (लोकमान्य तिलक टर्मिनल) पुणे, अहमदाबाद, उधना, वलसाड, बेगलुरु, चेन्नई, अर्नाकुलम, हुबली, अमृतसर, श्रीगंगानगर, सरहिंद, हावड़ा, सियालदाह, भुनेश्वर, रांची, गोरखपुर, शकूरबस्ती और कोटा जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ेगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार कुछ स्पेशल ट्रेनें रोज चलेगी, जबकि कुछ साप्ताहिक या विशेष तिथियों को संचालित होगी। होली की छुटि्यों में लोग घर लौट रहे हैं। इस वजह से ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ ज्यादा है। जनरल कोच में जिन यात्रियों को जगह नहीं मिल रही है वे बिना रिजर्वेशन स्लीपर और एसी कोच में घूस रहे हैं। चाहे उन्हें बैठने की जगह मिले या न मिले। वे खड़े होकर यात्रा कर रहे हैं। इस वजह से जो रिजर्वेशन वाले यात्री हैं उन्हें परेशानी हो जाती है। कई बार यात्रियों के बीच कहासुनी हो जाती है। यात्रियों का कहना है कि हम दिल्ली से पटना धक्के खाकर पहुंचे हैं। भास्कर की टीम पटना जंक्शन पहुंची तो क्या हालात थे, यात्रियों की क्या नाराजगी रही, रेलवे की क्या व्यवस्था थी पढ़िए रिपोर्ट…
सबसे पहले कुछ तस्वीरें देखें… अब सिलसिलेबार पढ़िए यात्रियों ने क्या कहा… बच्चों के साथ सफर करना मुश्किल हो गया नई दिल्ली से पूरे परिवार के साथ पटना पहुंचे प्रेम कुमार ने कहा, जनरल और स्लीपर में कोई फर्क नहीं दिखा। भीड़ इतनी थी कि वॉशरूम जाने का रास्ता भी नहीं था। बच्चों के साथ सफर करना मुश्किल हो गया था। रेलवे सिर्फ दावे करता है, जमीनी हकीकत कुछ और है।
ट्रेन में व्यवस्था नाम की चीज ही नहीं उड़ीसा से पटना घूमने पहुंचे एक परिवार ने बताया कि भीड़ का अंदाजा मुझे बिहार पहुंचने से करीब 30 किलोमीटर पहले ही हो गया था। लोग बिना रिजर्वेशन 3rd AC में घुस गए। ऐसा लग रहा था जैसे जनरल कोच में सफर कर रहे हों। ट्रेन में व्यवस्था नाम की चीज नहीं थी।
बच्चों के साथ ट्रेन में चढ़ना मुश्किल हो गया था दिल्ली के फरीदाबाद से होली मनाने पटना पहुंचे गोपाल पासवान ने बताया कि जंक्शन पर हालात इतने खराब थे कि परिवार और बच्चों के साथ ट्रेन में चढ़ पाना मुश्किल हो गया। दो ट्रेनें छूट गईं। 5 घंटे प्लेटफॉर्म पर इंतजार करना पड़ा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी। धक्के खाकर पटना पहुंचा हूं।
स्लीपर में इतनी भीड़, लग रहा था कि जनरल कोच में हूं नई दिल्ली से आए रमेश राम ने कहा, दिल्ली से किसी तरह धक्के खाकर पटना पहुंचा हूं। ट्रेन में जगह बनाने के लिए दौड़ लगानी पड़ रही थी। मुकेश शर्मा, जो दिल्ली में फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। उन्होंने कहा कि भेड़-बकरी की तरह धक्के खाते हुए आया हूं। एसी और स्लीपर में भीड़ देखकर लगा कि जनरल में सफर कर रहे हैं।
ट्रेन में चढ़ने-उतरने के लिए धक्का-मुक्की करनी पड़ी पटना जंक्शन पर सोमवार को प्लेटफार्म नंबर-1 पर यात्रियों की भीड़ ज्यादा थी। दिल्ली, मुंबई, हरियाणा, सूरत और पंजाब से आने वाली ट्रेनों में ज्यादा क्राउड था। सुबह से ही प्लेटफॉर्म पर यात्रियों का हुजूम उमड़ने लगा था। लोकल ट्रेनों में सामान्य दिनों के मुकाबले लगभग 25 प्रतिशत अधिक यात्री यात्रा कर रहे थे। गयाजी, नवादा, आरा, बिहिया, सहरसा, बख्तियारपुर और मोकामा जाने वाली ट्रेनों में पैर रखने की भी जगह नहीं थी। जनरल बोगियों के साथ-साथ स्लीपर और एसी कोच भी भीड़ से भरे हुए थे। कई यात्री ट्रेनों के गेट पर लटककर यात्रा करने को मजबूर दिखे। प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर ट्रेनों के पहुंचने पर स्थिति और बिगड़ गई। उतरने और चढ़ने वाले यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की होने लगी। सामान के बीच बच्चों को संभालती महिलाओं के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण थी।
रेल पुलिस सक्रिय नहीं दिखी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए न तो पर्याप्त आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) और न ही जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) के जवान सक्रिय दिखे। यात्रियों ने आरोप लगाया कि व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दी गई थी। लंबी दूरी की ट्रेनों में भी यात्रियों का हाल बेहाल था। विक्रमशिला एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस, आनंद विहार से आने वाली ट्रेनों के साथ-साथ हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस और अमृतसर-हावड़ा एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से बड़ी संख्या में यात्री पटना पहुंचे। जिन यात्रियों के पास आरक्षण नहीं था, वे भी किसी तरह कोच में घुस गए।
होल्डिंग एरिया का दावा फेल
रेलवे ने पर्व-त्योहार के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए होल्डिंग एरिया बनाने की घोषणा की थी, लेकिन पटना जंक्शन पर इसका कोई असर नहीं दिखा। यदि यात्रियों को चरणबद्ध तरीके से प्लेटफॉर्म पर भेजा जाता, तो भीड़ नियंत्रित हो सकती थी, लेकिन कई ट्रेनों के यात्री एक साथ प्लेटफॉर्म पर पहुंच गए, जिससे भीड़ अनियंत्रित दिखी और ट्रेनों में सफर करना मुश्किल हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होल्डिंग एरिया, अतिरिक्त टिकट चेकिंग स्टाफ और प्लेटफॉर्म पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था से हालात सुधर सकते थे। लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसी कोई तैयारी नजर नहीं आई। हर कदम पर संघर्ष करना पड़ रहा
रेलवे का दावा है कि त्योहारों को देखते हुए अतिरिक्त कोच जोड़े गए हैं और विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है, लेकिन पटना जंक्शन पर दिखी तस्वीर इन दावों से मेल नहीं खाती। यात्रियों की मानें तो ट्रेन में चढ़ने से लेकर प्लेटफॉर्म से बाहर निकलने तक हर कदम पर संघर्ष करना पड़ रहा है। होली पर घर लौटने की खुशी जरूर चेहरों पर दिखी, लेकिन सफर की पीड़ा उससे कहीं ज्यादा भारी पड़ी।
हालांकि पूर्व मध्य रेलवे (ECR) ने यात्रियों की सुविधा के लिए 58 स्पेशल ट्रेनें चलाने की घोषणा कर दी है। इन ट्रेनों का परिचालन पटना, दानापुर, बरौनी, दरभंगा, रक्सौल, सहरसा, समस्तीपुर, मधुबनी, धनबाद, शेखपुरा, जयनगर, झंझारपुर , मानसी सहित अन्य स्टेशनों से किया जाएगा।
विभिन्न शहरों तक स्पेशल ट्रेन
यह विशेष ट्रेन नई दिल्ली, आनंद विहार, मुंबई (लोकमान्य तिलक टर्मिनल) पुणे, अहमदाबाद, उधना, वलसाड, बेगलुरु, चेन्नई, अर्नाकुलम, हुबली, अमृतसर, श्रीगंगानगर, सरहिंद, हावड़ा, सियालदाह, भुनेश्वर, रांची, गोरखपुर, शकूरबस्ती और कोटा जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ेगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार कुछ स्पेशल ट्रेनें रोज चलेगी, जबकि कुछ साप्ताहिक या विशेष तिथियों को संचालित होगी।


