भोजपुर जिले में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होलिका पूजन और दहन सोमवार देर रात पारंपरिक आस्था-उत्साह के साथ संपन्न हुआ। शहर के गोपाली चौक, शीश महल चौक, शहीद भवन, चारखंभा गली, शिवगंज समेत कई प्रमुख स्थानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, जहां निर्धारित मुहूर्त के अनुसार रात 11 बजकर 22 मिनट पर होलिका दहन किया गया। महिलाएं अपने बच्चों के साथ एकत्रित होकर विधि-विधान से होलिका की पूजा करती नजर आईं। लोगों ने परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की, वहीं नए गेहूं की बालियों को अग्नि में भूनकर पारंपरिक रीति निभाई गई। होली पर भाईचारे का संदेश होलिका दहन के बाद लोगों ने कंडे के बल्ले डालकर ‘होली का तापी’ लिया और पवित्र अग्नि अपने घर ले जाकर नए आरंभ का प्रतीक माना। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने मुहूर्त से पहले ही होलिका दहन कर दिया, लेकिन अधिकतर जगहों पर पंडितों के निर्देशानुसार शुभ समय का पालन किया गया। इस दौरान पूरा शहर होली के रंग में सराबोर नजर आया और लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए भाईचारे का संदेश दिया। पंडित राकेश पांडेय के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन भद्रा काल समाप्त होने के बाद किया गया, जो शास्त्रों के अनुसार शुभ माना जाता है। होलिका के दिन अग्नि की पूजा का विशेष महत्व होता है और इस अग्नि की परिक्रमा कर लोग अपने जीवन से नकारात्मकता दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की कामना करते हैं। पूर्णिमा तिथि पर स्नान-दान का विशेष महत्व होने के कारण इस वर्ष 4 मार्च, बुधवार को रंगों की होली खेली जाएगी।
शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होलिका दहन को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद दिखा। शहर के संवेदनशील और प्रमुख स्थानों पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। साथ ही अग्नि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फायर ब्रिगेड की टीमों को भी अलर्ट मोड में रखा गया था। प्रशासन की सतर्कता के कारण पूरे जिले में होलिका दहन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश होलिका दहन का धार्मिक महत्व नारद पुराण में वर्णित प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ा है, जिसमें भक्त प्रह्लाद की विष्णु भक्ति के सामने अहंकार का प्रतीक होलिका जलकर नष्ट हो जाती है। इसी परंपरा को निभाते हुए आज भी लोग होलिका दहन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश समाज तक पहुंचाते हैं। भोजपुर में भी इस परंपरा को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया गया, जिससे त्योहार का रंग और अधिक गहरा हो गया। भोजपुर जिले में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होलिका पूजन और दहन सोमवार देर रात पारंपरिक आस्था-उत्साह के साथ संपन्न हुआ। शहर के गोपाली चौक, शीश महल चौक, शहीद भवन, चारखंभा गली, शिवगंज समेत कई प्रमुख स्थानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, जहां निर्धारित मुहूर्त के अनुसार रात 11 बजकर 22 मिनट पर होलिका दहन किया गया। महिलाएं अपने बच्चों के साथ एकत्रित होकर विधि-विधान से होलिका की पूजा करती नजर आईं। लोगों ने परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की, वहीं नए गेहूं की बालियों को अग्नि में भूनकर पारंपरिक रीति निभाई गई। होली पर भाईचारे का संदेश होलिका दहन के बाद लोगों ने कंडे के बल्ले डालकर ‘होली का तापी’ लिया और पवित्र अग्नि अपने घर ले जाकर नए आरंभ का प्रतीक माना। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने मुहूर्त से पहले ही होलिका दहन कर दिया, लेकिन अधिकतर जगहों पर पंडितों के निर्देशानुसार शुभ समय का पालन किया गया। इस दौरान पूरा शहर होली के रंग में सराबोर नजर आया और लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए भाईचारे का संदेश दिया। पंडित राकेश पांडेय के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन भद्रा काल समाप्त होने के बाद किया गया, जो शास्त्रों के अनुसार शुभ माना जाता है। होलिका के दिन अग्नि की पूजा का विशेष महत्व होता है और इस अग्नि की परिक्रमा कर लोग अपने जीवन से नकारात्मकता दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की कामना करते हैं। पूर्णिमा तिथि पर स्नान-दान का विशेष महत्व होने के कारण इस वर्ष 4 मार्च, बुधवार को रंगों की होली खेली जाएगी।
शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होलिका दहन को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद दिखा। शहर के संवेदनशील और प्रमुख स्थानों पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। साथ ही अग्नि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फायर ब्रिगेड की टीमों को भी अलर्ट मोड में रखा गया था। प्रशासन की सतर्कता के कारण पूरे जिले में होलिका दहन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश होलिका दहन का धार्मिक महत्व नारद पुराण में वर्णित प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ा है, जिसमें भक्त प्रह्लाद की विष्णु भक्ति के सामने अहंकार का प्रतीक होलिका जलकर नष्ट हो जाती है। इसी परंपरा को निभाते हुए आज भी लोग होलिका दहन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश समाज तक पहुंचाते हैं। भोजपुर में भी इस परंपरा को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया गया, जिससे त्योहार का रंग और अधिक गहरा हो गया।


