राजधानी लखनऊ में इस बार होली पर्यावरण संरक्षण और सनातन गौरव का संदेश लेकर आई है। शहर के सुप्रसिद्ध श्री मनकामेश्वर मठ मंदिर में आध्यात्मिक गुरु महंत देव्या गिरि के नेतृत्व में इको-फ्रेंडली होली मनाने की अनूठी पहल की गई है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस वर्ष होलिका का निर्माण लकड़ी की जगह गाय के गोबर से बने कंडों (गोमय) से किया गया है। इसका उद्देश्य पेड़ों की कटाई रोकना और प्रकृति संरक्षण का संदेश देना है। मंदिर परिसर में तैयार की गई यह गोमय होलिका श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। गोमती आरती’ का भव्य आयोजन किया गया महंत देव्या गिरि ने विधि-विधान से गोमय होलिका और मूर्ति का पूजन व आरती की। इसके बाद आदि गंगा गोमती नदी के तट पर ‘गमा गोमती आरती’ का भव्य आयोजन किया गया। सैकड़ों दीपों की रोशनी में मां गोमती के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। महंत देव्या गिरि ने जनमानस से ‘संस्कारयुक्त’ और ‘इको-फ्रेंडली’ होली मनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि गोमय के कंडों का दहन वातावरण को शुद्ध करता है और हानिकारक कीटाणुओं का नाश करता है। यह लकड़ी के दहन की तुलना में अधिक सुरक्षित और पर्यावरण हितैषी है। होलिका भस्म का तिलक शांति का प्रतीक महंत देव्या गिरि ने होलिका पूजन की विधि भी बताई। उन्होंने कहा कि पूजन में जल, रोली, अक्षत, पुष्प, गुलाल और कच्चे सूत का प्रयोग करें। होलिका की परिक्रमा संकल्पों की शुद्धि का प्रतीक है। उन्होंने यह भी बताया कि होलिका की अग्नि हमारे भीतर के अहंकार और ईर्ष्या रूपी असुरों को भस्म करने का माध्यम है। इसकी भस्म का तिलक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।


