झुंझुनूं में सोमवार शाम आस्था और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। शहर के ऐतिहासिक छावनी बाजार में सदियों पुरानी परंपरा को निभाते हुए ‘तिवाड़ियों की होली’ का दहन किया गया। जैसे ही शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित हुई, पूरा क्षेत्र ‘होली माता’ के जयकारों से गूंज उठा। सदियों पुरानी परंपरा को भद्रा काल में निभाया गया। शाम ढलने से पहले ही तिवाड़ियों की होली पर महिलाओं का पहुंचना शुरू हो गया था। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने टोली बनाकर होली की परिक्रमा की। हाथों में जल का कलश, रोली, चावल, फूल और बड़कुल्ले (गोबर से बनी मालाएं) लेकर महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से दर्शन और पूजा कर सकें। मंगल गीतों की गूंज होली दहन के इस मौके पर मारवाड़ी और शेखावाटी संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। महिलाओं ने “लो जी थारो पूजन आई…” जैसे पारंपरिक होली गीत गाकर माहौल को उत्सवमयी बना दिया। बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि यह होली केवल लकड़ी का ढेर नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जिसे हम पीढ़ियों से सहेजते आ रहे हैं। शानदार नजारा: जब प्रज्वलित हुई ‘होली’ सोमवार शाम जैसे ही दहन का समय हुआ, बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और युवा वहां एकत्र हो गए। ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच जैसे ही होली की लपटें आसमान की ओर उठीं, दृश्य अत्यंत भव्य हो गया। लोगों ने जलती हुई होली की अग्नि की लौ देखकर आने वाले साल के शकुन और फसलों की स्थिति का अनुमान भी लगाया। सामूहिक पूजा: सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने एक साथ पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की मन्नत मांगी। ऐतिहासिक जुड़ाव: झुंझुनूं में तिवाड़ियों की होली को शहर की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित होलियों में गिना जाता है। अबीर-गुलाल का आगाज: दहन के साथ ही लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली पर्व की बधाई दी।


