5.9 किलो का बच्चा जन्म से ही वायरल, जानें क्या है Fetal Macrosomia और क्यों जन्म के समय बढ़ जाता है वजन

5.9 किलो का बच्चा जन्म से ही वायरल, जानें क्या है Fetal Macrosomia और क्यों जन्म के समय बढ़ जाता है वजन

Fetal Macrosomia Causes: अमेरिका के New York में एक महिला उस समय हैरान रह गई, जब उसने जिस बच्चे को जन्म दिया उसका वजन करीब 5.9 किलो (लगभग 13 पाउंड) निकला। यह वजन सामान्य नवजात शिशुओं से लगभग दोगुना है। आमतौर पर बच्चे का वजन 2.5 से 4 किलो के बीच होता है, लेकिन यह बच्चा जन्म से ही इतना बड़ा था कि वह 3-6 महीने के बच्चों वाले कपड़े पहन रहा है।

डॉक्टरों का कहना है कि इतना भारी बच्चा पैदा होने की वजह फीटल मैक्रोसोमिया नाम की स्थिति हो सकती है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

फीटल मैक्रोसोमिया क्या होता है?

जब कोई बच्चा जन्म के समय 4 किलो या उससे ज्यादा वजन का होता है, तो डॉक्टर उसे मैक्रोसोमिया कहते हैं। अगर वजन 4.5 किलो से भी ज्यादा हो जाए, तो डिलीवरी के दौरान जटिलताएं बढ़ सकती हैं। यह कोई बीमारी नहीं है, लेकिन ऐसी स्थिति है जिससे मां और बच्चे दोनों के लिए डिलीवरी थोड़ी मुश्किल हो सकती है।

बड़ा बच्चा होने के कारण क्या हैं?

कुछ कारण ऐसे होते हैं जो बच्चे का वजन ज्यादा होने का जोखिम बढ़ा देते हैं, जैसे-

  • गर्भावस्था में डायबिटीज या पहले से डायबिटीज होना
  • मां का ज्यादा वजन या प्रेग्नेंसी में जरूरत से ज्यादा वजन बढ़ना
  • पहले भी बड़ा बच्चा पैदा होना
  • ड्यू डेट के बाद डिलीवरी होना
  • लड़का होना (लड़कों का वजन थोड़ा ज्यादा होता है)

इनमें सबसे आम कारण गर्भावस्था के दौरान बढ़ा हुआ ब्लड शुगर माना जाता है। ज्यादा शुगर की वजह से बच्चे का शरीर ज्यादा तेजी से बढ़ सकता है।

क्या बड़ा बच्चा होना खतरनाक है?

डॉक्टर बताते हैं कि कई बार बड़े बच्चे भी पूरी तरह स्वस्थ पैदा होते हैं। लेकिन कुछ मामलों में जोखिम बढ़ जाता है। मां के लिए लंबी और कठिन डिलीवरी, ज्यादा ब्लीडिंग, सी-सेक्शन की जरूरत होती है। बच्चे के लिए डिलीवरी के समय कंधा फंसना, जन्म के बाद लो ब्लड शुगर आगे चलकर मोटापा या टाइप 2 डायबिटीज का खतरा हो सकता है। Johns Hopkins Medicine के अनुसार, बहुत ज्यादा वजन वाले बच्चों की डिलीवरी में खास निगरानी जरूरी होती है।

क्या इससे बचाव संभव है?

पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, क्योंकि जेनेटिक्स भी भूमिका निभाते हैं। लेकिन कुछ सावधानियां जोखिम कम कर सकती हैं-

  • प्रेग्नेंसी में ब्लड शुगर कंट्रोल रखना
  • वजन संतुलित रखना
  • नियमित चेकअप कराना
  • अगर गर्भावधि डायबिटीज हो तो सही इलाज और डाइट फॉलो करना

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