Drone Strike : इज़राइल-ईरान युद्ध ने मध्य पूर्व को और अधिक खतरनाक (Iran Israel War) बना दिया है, जहां अब सऊदी अरब की प्रमुख ऑयल रिफाइनरी भी निशाने पर आ गई है। 2 मार्च 2026 को सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको (Saudi Aramco Attack) की रास तनुरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमला (Ras Tanura Refinery Fire) हुआ, जिसके बाद वहां आग लग गई और रिफाइनरी को एहतियातन बंद कर दिया गया। यह रिफाइनरी मध्य पूर्व की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है, जिसकी क्षमता लगभग 550,000 बैरल प्रति दिन है और यह सऊदी क्रूड ऑयल के निर्यात के लिए महत्वपूर्ण टर्मिनल भी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने यह हमला Shahed-136 ड्रोन से किया, जो अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हालिया हमलों का जवाब माना जा रहा है। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे। हमले के बाद रिफाइनरी में छोटी और अलग-थलग आग लगी, जिस पर जल्द ही काबू पा लिया गया। कोई हताहत होने की खबर नहीं है, और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने सूत्रों के हवाले से इसकी पुष्टि की है। अरामको ने अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन रिफाइनरी को एहतियाती कार्रवाई (precautionary measure) के तौर पर बंद किया गया।
ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन प्रभावित किया
इस घटना से पहले ईरान ने क्षेत्र भर में जवाबी हमले किए थे, जिसमें गल्फ देशों जैसे दुबई, अबू धाबी, दोहा, मनामा और अन्य स्थानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शामिल हैं। इन हमलों ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, खासकर होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, और बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
अमेरिकी विमान ईरान के खिलाफ ऑपरेशंस में शामिल थे (US Jet Crash Kuwait)
इस बीच, कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने ऐलान किया कि अमेरिका के कई फाइटर जेट क्रैश हो गए। मंत्रालय के अनुसार, सभी क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं और उन्हें अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया। यह घटना ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान हुई, जहां अमेरिकी विमान ईरान के खिलाफ ऑपरेशंस में शामिल थे। कुछ रिपोर्ट्स में वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें जेट क्रैश होते और पायलट पैराशूट से उतरते दिखे। हालांकि, क्रैश का सटीक कारण जांच के अधीन है।
वैश्विक तेल आपूर्ति में बड़ा व्यवधान (Middle East Escalation)
यह हमला इज़राइल-ईरान युद्ध को और विस्तार देता है, जिसमें अब सऊदी अरब जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश भी प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष जारी रहा तो वैश्विक तेल आपूर्ति में बड़ा व्यवधान आ सकता है, जिससे ऊर्जा संकट गहरा सकता है। ईरान के हमलों को अमेरिका-इज़राइल की कार्रवाई का प्रत्यक्ष जवाब बताया जा रहा है, और क्षेत्रीय तनाव चरम पर है।


