MP में गो भक्त की ‘अनोखी’ शादी, समाज के लिए बनी मिसाल, देखें तस्वीरें

MP में गो भक्त की ‘अनोखी’ शादी, समाज के लिए बनी मिसाल, देखें तस्वीरें

Cow Devotee Unique Wedding: रायसेन के बेगमगंज में 24 वर्षीय आयुष यादव ने अपनी शादी से समाज के लिए एक संदेश दिया है। आयुष ने बिना दहेज लिए विवाह कर समाज में एक मिशाल पेश की, बल्कि विवाह समारोह से एक दिन पहले गायों के लिए अलग से भंडारा किया। आयुष के पिता अनिल यादव, यादव महासभा के जिलाध्यक्ष भी हैं, वह समाज में यह संदेश देना चाहते थे कि बिना दहेज की शादी विवाह करें। गो माता की सेवा को ही सर्वोपरि मानें। (MP News)

गो माता के लिए 56 भोग परोसे

विवाह स्थल पर बारात और मेहमानों के साथ गायों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई। गायों को खिलाने के लिए आटा, विभिन्न तरह की हरी सब्जियां, चारा के साथ मिठाई आदि भी परोसी। दूल्हा ने गो माता की पूजा अर्चना की और उन्हें गो ग्रास खिलाया। इसके बाद रस्में शुरू हुई। इस अनूठी पहल की पूरे नगर में सराहना हो रही है। विशेष व्यवस्था की गई। गायों को खिलाने के लिए आटा, विभिन्न तरह की हरी सब्जियां, चारा के साथ मिठाई आदि भी परोसी। दूल्हा ने गो माता की पूजा अर्चना की और उन्हें गो ग्रास खिलाया। इसके बाद रस्में शुरू हुई। इस अनूठी पहल की पूरे नगर में सराहना हो रही है।

(Patrika.com)

सालों से गो सेवा के लिए समर्पित है परिवार

आयुष पिछले सात वर्षों से गो सेवा के लिए समर्पित है। उन्होंने पूरे नगर में अपना मोबाइल नंबर बांट रखा है, ताकि कहीं भी कोई आवारा या घायल मवेशी दिखे तो लोग तुरंत सूचना दे सकें। सूचना मिलते ही आयुष अपने सारे काम छोड़कर बाइक से कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच जाते है। वहां घायल मवेशी का प्राथमिक उपचार करते हैं और जरूरत पड़ने पर लोडिंग ऑटो से उसे अपने घर ले आते है। घर पर वे घायल पशु के पूर्ण स्वस्थ होने तक उसके आहार और उपचार की व्यवस्था करते हैं। स्वस्थ होने के बाद मवेशी को उसी स्थान पर छोड़ते हैं, जहां से उसे लाया गया था। उनकी इस सेवा भावना ने उन्हें नगर में एक अलग पहचान दिलाई है।

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फ्री में करते है गायों की सेवा, नहीं लेते एक भी रुपए

आयुष बताते हैं कि वे यह सेवा पूरी तरह निजी खर्च पर और निशुल्क करते है। कई बार उनकी सेवा देखकर लोग भावुक हो जाते है और सहयोग की इच्छा जताते हैं। ऐसे में वे नगद राशि लेने से इनकार कर देते हैं। यदि कोई मदद करना चाहता है तो उनसे दवाइयां या भूसा ले लेते है, जो सीधे पशुओं के काम आता है। बरसात के चार महीनों में वे शहर से बाहर नहीं जाते। उनका कहना है कि इस मौसम में सड़कों पर फिसलन के कारण मवेशियों के घायल होने की घटनाएं बढ़ जाती है, इसलिए वे पूरी तरह मुस्तैद रहते है।

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समाज को दिया सेवा और संस्कार का संदेश

आयुष की यह पहल न सिर्फ गो सेवा का उदाहरण है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो जीवन के हर अवसर को सेवा और संस्कार से जोड़ा जा सकता है। आयुष कहते हैं कि गो सेवा से मन को सुकून मिलता है। शादी जीवन का सबसे बड़ा अवसर है, ऐसे में गो माता को कैसे भूल सकता था। इसलिए उनके लिए भी शादी वाले गार्डन के सामने भंडारे की अलग से व्यवस्था कराई। गाय पूजन में रिश्तेदार सहित जनप्रतिनिधि हुए शामिल। (MP News)

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