जैसलमेर में 6-8 मार्च को चादर महोत्सव, मोहन भागवत करेंगे शुभारंभ, 7 मार्च को 1.08 करोड़ श्रद्धालुओं का सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ

जैसलमेर में 6-8 मार्च को चादर महोत्सव, मोहन भागवत करेंगे शुभारंभ, 7 मार्च को 1.08 करोड़ श्रद्धालुओं का सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ

जैसलमेर में 6 से 8 मार्च 2026 तक तीन दिवसीय चादर महोत्सव और दादागुरु इकतीसा पाठ का भव्य आयोजन होगा। महोत्सव का शुभारंभ मोहन भागवत करेंगे। आयोजन स्थल पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 7 मार्च को विश्वभर में एक साथ 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ का ऐतिहासिक महासंकल्प रहेगा। निर्धारित समय पर देश-विदेश में श्रद्धालु अपने-अपने स्थानों से पाठ करेंगे, जिससे वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक चेतना का संचार होगा।

871 वर्षों बाद पहली बार चादर का विधिवत अभिषेक

आयोजन समिति के अनुसार दादागुरु श्री जिनदत्तसूरी की पवित्र चादर का 871 वर्षों बाद पहली बार विधिवत अभिषेक किया जाएगा। इससे पहले जैसलमेर किले से भव्य वरघोड़ा निकालकर चादर को महोत्सव स्थल तक लाया जाएगा। महोत्सव गच्छाधिपति आचार्य मणिप्रभ सूरी की पावन निश्रा में संपन्न होगा। समिति ने इसे आस्था, एकता और आध्यात्मिक जागरण का वैश्विक अभियान बताया है।

देशभर के संतों की मौजूदगी, 20 हजार श्रद्धालु होंगे शामिल

तीन दिवसीय आयोजन में विभिन्न भारतीय परंपराओं के करीब 400 संतों की उपस्थिति रहेगी। देश-दुनिया से करीब 20 हजार श्रद्धालुओं के जैसलमेर पहुंचने की संभावना है। कार्यक्रम में धर्मसभा, प्रवचन, दादागुरु इकतीसा पाठ, चादर अभिषेक और पूजा-अर्चना होगी। शाम को सांस्कृतिक संध्या में भक्ति प्रस्तुतियां दी जाएंगी, वहीं दादागुरु के जीवन पर आधारित जीवंत नाटिका भी मंचित होगी।

तीन दिन का पूरा कार्यक्रम, 8 मार्च को आचार्य पद प्रदान

6 मार्च को गच्छाधिपति, आचार्य और उपाध्याय सहित भगवंतों का मंगल प्रवेश होगा और धर्मसभा आयोजित की जाएगी। 7 मार्च को जैसलमेर किले से चादर वरघोड़ा निकलेगा और दोपहर में चादर अभिषेक होगा। 8 मार्च को उपाध्याय महेन्द्रसागर महाराज को आचार्य पद प्रदान किया जाएगा, साथ ही गणिनी पद समारोह भी आयोजित होगा। इसी दिन चादर का ओक जल और वासक्षेप वितरण होगा।

डेडानसर मैदान में विशाल डोम, संग्रहालय भी तैयार

आयोजन को लेकर डेडानसर मैदान में एक महीने से विशाल डोम टेंट्स लगाए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी व्यवस्थाओं के साथ एक संग्रहालय भी तैयार किया जा रहा है। आयोजन समिति का कहना है कि जैसलमेर जैन समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और इस ऐतिहासिक आयोजन से शहर की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और सशक्त होगी।

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