जयपुर। फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर इस बार भद्रा रहने के कारण प्रदेश में होलिका दहन और धुलंडी की तारीखों को लेकर जारी असमंजस दूर हो गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है कि होलिका दहन फाल्गुन मास की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में होना चाहिए।
शास्त्र सम्मत दो मार्च की मध्य रात्रि बाद भद्रा पुच्छ काल में रात 1:26 से 2:38 बजे तक होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। वहीं, अगले दिन तीन मार्च को धुलंडी का पर्व मनाया जाएगा। राजस्थान सरकार ने 2 मार्च को होलिका दहन और 3 मार्च को धुलंडी का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है।
पूर्णिमा के साथ ही शुरू होगी भद्रा
ज्योतिषाचार्य पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि फाल्गुन पूर्णिमा दो मार्च की शाम 5:56 बजे से प्रारंभ होगी व इसका समापन तीन मार्च की शाम 5:08 बजे होगा। दो मार्च को ही प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद 2 घंटे 24 मिनट की अवधि) में पूर्णिमा रहेगी। इसलिए होली पर्व का निर्धारण इसी दिन से माना जाएगा।
हालांकि दो मार्च को ही पूर्णिमा के साथ शाम 5:56 बजे से भद्रा प्रारंभ होगी, जो कि तीन मार्च की सुबह 5:32 बजे तक रहेगी। भद्रा में होलिका दहन व रक्षा बंधन वर्जित है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार यदि भद्रा निशीथ काल (मध्य रात्रि) को पार करते हुए उषा काल तक चली जाए तो भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन किया जाना शास्त्रोक्त बताया गया है।
भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन शास्त्र सम्मत
ज्योतिषाचार्य पं. पुरुषोत्तम गौड़ और चंद्रमोहन दाधीच ने बताया कि जयपुर सहित राजस्थान में दो मार्च की मध्य रात्रि बाद भद्रा पुच्छ काल रात 1:26 से 2:38 बजे तक रहेगा, जो कि होलिका दहन के लिए श्रेष्ठ समय माना गया है। अत: शास्त्र सम्मत जयपुर में होलिका दहन इसी अवधि में होगा। तीन मार्च (मंगलवार) को धुलंडी मनाई जाएगी।
17 मिनट दृश्यमान होगा चंद्र ग्रहण
ज्योतिषाचार्य पं. शर्मा ने बताया कि होलिका दहन के अगले दिन ही धुलण्डी पर्व मनाया जाएगा। हालांकि, तीन मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण रहेगा। इसकी शुरुआत दोपहर 3:20 से होगी व समापन शाम 6:47 बजे होगा। सुबह 6:53 बजे से सूतक काल प्रारम्भ हो जाएगा।
वहीं, जयपुर में चंद्रोदय शाम 6:30 बजे होगा व चंद्र ग्रहण 17 मिनट दृश्यमान होगा। धुलंडी का पर्व दोपहर तीन बजे तक मनाया जाता है। अत: इस पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव नहीं रहेगा। धुलंडी पर गणगौर पूजन का समय सुबह 6 से 6.53 बजे तक रहेगा। नवविवाहिताएं इस अवधि में गौर माता का पूजन कर सकेंगी।
सिटी पैलेस में भी होलिका दहन आज
सिटी पैलेस में भी जयपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से होलिका दहन दो मार्च की मध्य रात्रि बाद होगा। यहां के बाद पूरे शहर में होली मंगलेगी।
गोविंद देवजी मंदिर: राजभोग झांकी के बाद ठाकुर जी के दरबार में होली खेलेंगे भक्त
शहर आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में भी सोमवार को रंगों और फूलों की होली खेली जाएगी। राजभोग झांकी (सुबह 10:45 से 11:30 बजे) में ठाकुर जी को गुलाल अर्पित किया जाएगा। इसके बाद भक्त ठाकुरजी के समक्ष होली खेल सकेंगे।
अगले साल फिर रहेगा यही संयोग
इससे पूर्व वर्ष 2023 में भी पूर्णिमा और भद्रा के एक साथ होने के चलते भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन हुआ था। वर्ष 2027 में भी यह संयोग फिर बनेगा।


