कटकमदाग के किसान संजीत प्रजापति की कहानी:मल्चिंग तकनीक के साथ मिश्रित खेती का किया प्रयोग, लागत घटा, मुनाफा बढ़ा‎

कटकमदाग के किसान संजीत प्रजापति की कहानी:मल्चिंग तकनीक के साथ मिश्रित खेती का किया प्रयोग, लागत घटा, मुनाफा बढ़ा‎

कभी आर्थिक तंगी और शिक्षा के अभाव से जूझता एक साधारण युवक ने‎ आज अपने क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी किसान के रूप में नई पहचान बनाया है। कटकमदाग प्रखंड के ग्राम अडरा टोला‎ सिमराकोनी निवासी संजीत प्रजापति उर्फ संजीत दिलवाला तूफानी ने संघर्षों को अवसर में बदलकर यह साबित‎ कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। जहां कभी‎ उग्रवादियों की बंदूकें गरजती थी, अब स्ट्राबेरी सहित विभिन्न तरह की फसलें लहलहा रही है।संजीत बताते हैं कि‎ बचपन आर्थिक तंगी में बीता। परिवार में शिक्षा का अभाव था, जिसके कारण वे केवल आठवीं कक्षा तक ही पढ़‎ सके। इसके बाद रोजगार की तलाश में लगभग दस वर्षों तक विभिन्न शहरों में रहकर जेसीबी चलाने और अन्य‎ मजदूरी का कार्य किया। लेकिन बाहर की कमाई से जीवन में कोई ठोस बदलाव नहीं आया। वर्ष 2020 में कोरोना‎ महामारी ने हालात और भी कठिन बना दिए।कोरोना के बाद उन्होंने अपने खेत की ओर रुख किया। वर्ष 2021 में‎ उनके गांव में एचडीएफसी बैंक से संपोषित एवं केजीवीके द्वारा संचालित समग्र ग्राम विकास परियोजना की‎ शुरुआत हुई। इसी परियोजना के तहत उन्हें ड्रिप और मल्चिंग तकनीक के साथ स्ट्रॉबेरी की खेती का प्रशिक्षण‎ मिला।‎ स्ट्रॉबेरी के साथ लहसुन और गेंदा फूल की खेती पिछले वर्ष से उन्होंने पुराने पौधों से नए पौधे तैयार कर खेती का‎ विस्तार किया। साथ ही स्ट्रॉबेरी के साथ लहसुन और गेंदा फूल की मिश्रित खेती भी शुरू की। इससे लागत में‎ कमी आई और मुनाफा बढ़ा। गेंदा और लहसुन लगाने से कीटों का प्रकोप भी कम होता है, जिससे उत्पादन बेहतर‎ हुआ है। शुरुआती दौर में कई चुनौतियां आईं, लेकिन केजीवीके के सहयोग और मार्गदर्शन से उन्होंने खेती को‎ सफल बनाया। आज वे हर साल औसतन साढ़े तीन से चार लाख तक की फसल बिक्री कर लेते हैं।‎ किसान पाठशाला बनी संजीवनी समग्र ग्राम विकास परियोजना के तहत गांव में किसान पाठशाला स्थापित की गई, जहां नए फसल, नई तकनीक‎ और जैविक खेती का प्रशिक्षण लिया। संजीत ने किसान पाठशाला की नर्सरी कक्ष का लाभ उठाकर हर साल एक‎ लाख से अधिक टमाटर, बैंगन, मिर्च, तरबूज और शिमला मिर्च के पौधों की बिक्री शुरू की है। स्ट्रॉबेरी की सफल‎ खेती के लिए उन्हें लगातार तीन वर्षों से किसान मेलों में सम्मानित और पुरस्कृत किया गया है। उन्होंने कविता-गीतों‎ के माध्यम से भी स्ट्रॉबेरी खेती को बढ़ावा देने में योगदान दिया है।‎ जानिए… कौन हैं संजीत प्रजापति‎ संजीत प्रजापति की सफलता ने आसपास के युवा किसानों को भी प्रेरित किया है। उन्होंने 8वीं तक की शिक्षा प्राप्त‎ की है। संजीत की यह कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक से खेती भी सम्मानजनक और‎ लाभकारी व्यवसाय बन सकती है। आज स्ट्रॉबेरी की खेती से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि‎ वे अपने चार बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला पा रहे हैं और आधुनिक कृषि यंत्र भी खरीद रहे हैं। उनकी पत्नी संजू‎ देवी भी खेती के कार्य में पूरा सहयोग देती हैं।‎ कभी आर्थिक तंगी और शिक्षा के अभाव से जूझता एक साधारण युवक ने‎ आज अपने क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी किसान के रूप में नई पहचान बनाया है। कटकमदाग प्रखंड के ग्राम अडरा टोला‎ सिमराकोनी निवासी संजीत प्रजापति उर्फ संजीत दिलवाला तूफानी ने संघर्षों को अवसर में बदलकर यह साबित‎ कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। जहां कभी‎ उग्रवादियों की बंदूकें गरजती थी, अब स्ट्राबेरी सहित विभिन्न तरह की फसलें लहलहा रही है।संजीत बताते हैं कि‎ बचपन आर्थिक तंगी में बीता। परिवार में शिक्षा का अभाव था, जिसके कारण वे केवल आठवीं कक्षा तक ही पढ़‎ सके। इसके बाद रोजगार की तलाश में लगभग दस वर्षों तक विभिन्न शहरों में रहकर जेसीबी चलाने और अन्य‎ मजदूरी का कार्य किया। लेकिन बाहर की कमाई से जीवन में कोई ठोस बदलाव नहीं आया। वर्ष 2020 में कोरोना‎ महामारी ने हालात और भी कठिन बना दिए।कोरोना के बाद उन्होंने अपने खेत की ओर रुख किया। वर्ष 2021 में‎ उनके गांव में एचडीएफसी बैंक से संपोषित एवं केजीवीके द्वारा संचालित समग्र ग्राम विकास परियोजना की‎ शुरुआत हुई। इसी परियोजना के तहत उन्हें ड्रिप और मल्चिंग तकनीक के साथ स्ट्रॉबेरी की खेती का प्रशिक्षण‎ मिला।‎ स्ट्रॉबेरी के साथ लहसुन और गेंदा फूल की खेती पिछले वर्ष से उन्होंने पुराने पौधों से नए पौधे तैयार कर खेती का‎ विस्तार किया। साथ ही स्ट्रॉबेरी के साथ लहसुन और गेंदा फूल की मिश्रित खेती भी शुरू की। इससे लागत में‎ कमी आई और मुनाफा बढ़ा। गेंदा और लहसुन लगाने से कीटों का प्रकोप भी कम होता है, जिससे उत्पादन बेहतर‎ हुआ है। शुरुआती दौर में कई चुनौतियां आईं, लेकिन केजीवीके के सहयोग और मार्गदर्शन से उन्होंने खेती को‎ सफल बनाया। आज वे हर साल औसतन साढ़े तीन से चार लाख तक की फसल बिक्री कर लेते हैं।‎ किसान पाठशाला बनी संजीवनी समग्र ग्राम विकास परियोजना के तहत गांव में किसान पाठशाला स्थापित की गई, जहां नए फसल, नई तकनीक‎ और जैविक खेती का प्रशिक्षण लिया। संजीत ने किसान पाठशाला की नर्सरी कक्ष का लाभ उठाकर हर साल एक‎ लाख से अधिक टमाटर, बैंगन, मिर्च, तरबूज और शिमला मिर्च के पौधों की बिक्री शुरू की है। स्ट्रॉबेरी की सफल‎ खेती के लिए उन्हें लगातार तीन वर्षों से किसान मेलों में सम्मानित और पुरस्कृत किया गया है। उन्होंने कविता-गीतों‎ के माध्यम से भी स्ट्रॉबेरी खेती को बढ़ावा देने में योगदान दिया है।‎ जानिए… कौन हैं संजीत प्रजापति‎ संजीत प्रजापति की सफलता ने आसपास के युवा किसानों को भी प्रेरित किया है। उन्होंने 8वीं तक की शिक्षा प्राप्त‎ की है। संजीत की यह कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक से खेती भी सम्मानजनक और‎ लाभकारी व्यवसाय बन सकती है। आज स्ट्रॉबेरी की खेती से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि‎ वे अपने चार बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला पा रहे हैं और आधुनिक कृषि यंत्र भी खरीद रहे हैं। उनकी पत्नी संजू‎ देवी भी खेती के कार्य में पूरा सहयोग देती हैं।‎  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *