कटिहार में 100 जोड़ों का सामूहिक विवाह:जयनगर कर्मा टोला में आदिवासी रीति-रिवाज से आयोजन, 5 हजार लोग बने गवाह, समाजसेवियों की पहल

कटिहार में 100 जोड़ों का सामूहिक विवाह:जयनगर कर्मा टोला में आदिवासी रीति-रिवाज से आयोजन, 5 हजार लोग बने गवाह, समाजसेवियों की पहल

कटिहार में मांसाही प्रखंड के जयनगर कर्मा टोला संथाली गांव में 100 जोड़ों का सामूहिक विवाह शनिवार और रविवार को संपन्न हुआ। इस समारोह में आदिवासी संस्कृति और रीति-रिवाजों का पालन किया गया। इसका आयोजन समाजसेवी भोला साह और दीपा देवी ने किया। कटिहार जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों से आए इन 100 जोड़ों ने आदिवासी परंपराओं के अनुसार विवाह किया। इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनने के लिए 5,000 से अधिक लोग उपस्थित थे। आयोजक समाजसेवी भोला साह ने बताया कि इस सामूहिक विवाह का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सहायता प्रदान करना और आदिवासी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि इस समारोह के जरिए समाज में एकता और प्रेम का संदेश दिया गया है। सामूहिक विवाह से जुड़ी तस्वीरें…
दुल्हन को पारंपरिक टोकरी में बैठाकर लाया जाता
इस विवाह समारोह की सबसे खास बात इसकी पारंपरिक रस्में थीं। इनमें दूल्हा सबसे पहले दुल्हन के भाई को पगड़ी पहनाता है, जो रिश्ते के सम्मान का प्रतीक है। इसके बाद दूल्हे को डोली में और दुल्हन को पारंपरिक टोकरी में बैठाकर लाया जाता है। डोली और टोकरी दोनों को जमीन पर न रखकर कंधों पर उठाकर सम्मानपूर्वक लाया जाता है। समारोह में उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को एक अद्भुत अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले कभी ऐसा सामूहिक विवाह नहीं देखा था और भोला साह तथा दीपा देवी की इस पहल की सराहना की। लोगों ने इसे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश बताया। कटिहार में मांसाही प्रखंड के जयनगर कर्मा टोला संथाली गांव में 100 जोड़ों का सामूहिक विवाह शनिवार और रविवार को संपन्न हुआ। इस समारोह में आदिवासी संस्कृति और रीति-रिवाजों का पालन किया गया। इसका आयोजन समाजसेवी भोला साह और दीपा देवी ने किया। कटिहार जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों से आए इन 100 जोड़ों ने आदिवासी परंपराओं के अनुसार विवाह किया। इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनने के लिए 5,000 से अधिक लोग उपस्थित थे। आयोजक समाजसेवी भोला साह ने बताया कि इस सामूहिक विवाह का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सहायता प्रदान करना और आदिवासी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि इस समारोह के जरिए समाज में एकता और प्रेम का संदेश दिया गया है। सामूहिक विवाह से जुड़ी तस्वीरें…
दुल्हन को पारंपरिक टोकरी में बैठाकर लाया जाता
इस विवाह समारोह की सबसे खास बात इसकी पारंपरिक रस्में थीं। इनमें दूल्हा सबसे पहले दुल्हन के भाई को पगड़ी पहनाता है, जो रिश्ते के सम्मान का प्रतीक है। इसके बाद दूल्हे को डोली में और दुल्हन को पारंपरिक टोकरी में बैठाकर लाया जाता है। डोली और टोकरी दोनों को जमीन पर न रखकर कंधों पर उठाकर सम्मानपूर्वक लाया जाता है। समारोह में उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को एक अद्भुत अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले कभी ऐसा सामूहिक विवाह नहीं देखा था और भोला साह तथा दीपा देवी की इस पहल की सराहना की। लोगों ने इसे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश बताया।  

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