प्रदेश में आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का दावा किया जा रहा है। इसी बीच योग प्रशिक्षकों और योग सहायकों ने अपनी पीड़ा खुलकर सामने रखी है। मध्यप्रदेश में 1346 योग कर्मी आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं और उन्हें अन्य राज्यों की तुलना में बेहद कम मानदेय मिल रहा है। कटौतियों के बाद हाथ में आने वाली राशि न्यूनतम वेतन से भी कम बताई जा रही है। योग कर्मियों का कहना है कि आर्थिक असुरक्षा के कारण वे मानसिक दबाव में काम कर रहे हैं और अब न्यायोचित मांगों पर सरकार से ठोस निर्णय की अपेक्षा है। नेशनल आयुष मिशन में आयुष्मान आरोग्य मंदिर (HWC) और योग वेलनेस सेंटर (YWC) में कार्यरत योग प्रशिक्षक और योग सहायक साल 2021 से आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्त हैं। उनका कहना है कि वे आयुष मंत्रालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप योग और आयुर्वेद के वैज्ञानिक आधार पर आमजन को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरिरत कर रहे हैं। इन केंद्रों पर नियमित योग सत्र, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, मधुमेह व उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। तय न्यूनतम वेतन मानकों से भी कम है सैलरी
योग कर्मियों का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय के अनुसार हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर योग प्रशिक्षक को 8000 रुपए और योग सहायक को 5000 रुपए प्रतिमाह मिलना चाहिए। देश के अधिकांश राज्यों में यह राशि दी भी जा रही है। लेकिन मध्यप्रदेश में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से भुगतान होने के कारण कटौतियाँ अधिक हैं। वर्तमान में योग प्रशिक्षक को कुल मिलाकर लगभग 5555 रुपए और योग सहायक को करीब 3471 रुपए प्रतिमाह ही प्राप्त हो रहे हैं। योग कर्मियों के अनुसार, यह राशि श्रम मंत्रालय द्वारा तय न्यूनतम वेतन मानकों से भी कम है। पीएफ और ईएसआई पर भी सवाल
योग प्रशिक्षकों के मानदेय से 666 रुपए और योग सहायकों से 417 रुपए भविष्य निधि (PF) के रूप में काटे जा रहे हैं। इसके अलावा ईएसआई मद में भी कटौती की जाती है, लेकिन कर्मियों का कहना है कि चार वर्षों से ईएसआई कार्ड उपलब्ध नहीं कराए गए। उनका आरोप है कि PF राशि समय पर जमा नहीं होती और न ही पारदर्शिता से जानकारी दी जाती है। इससे आर्थिक असुरक्षा और बढ़ गई है। समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग
योग कर्मियों ने उदाहरण देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में योग वेलनेस सेंटर पर पूर्णकालिक योग प्रशिक्षक को 27 हजार रुपएऔर योग सहायक को 10 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। वहीं मध्यप्रदेश में अंशकालिक और आउटसोर्स व्यवस्था के तहत बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है। उनका कहना है कि “समान कार्य के लिए समान वेतन” का सिद्धांत लागू होना चाहिए। प्रमुख मांगें


