जमुई सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। सिजेरियन ऑपरेशन में तीन घंटे की देरी के कारण एक नवजात बच्ची की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर एनेस्थेटिस्ट चिकित्सक उपलब्ध न होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो सका, जिसके बाद महिला को निजी क्लिनिक ले जाना पड़ा। यह घटना शनिवार को हुई, जब खैरा प्रखंड के खड़ूई बरियारपुर निवासी सुधांशु सिंह की पत्नी रानी देवी को प्रसव पीड़ा के बाद सदर अस्पताल लाया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन की तैयारी की और महिला को ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट कर दिया गया। सर्जन के लेट पहुंचने से महिला की तबीयत बिगड़ी परिजन रवीश कुमार सिंह के अनुसार, ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट करने के बाद लंबे समय तक न तो सर्जन पहुंचे और न ही एनेस्थेटिस्ट उपलब्ध हुए। इस दौरान महिला दर्द से कराहती रही। परिजनों ने कई बार अस्पताल कर्मियों और वरीय अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। करीब तीन घंटे बीत जाने और महिला की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे आनन-फानन में एक निजी क्लिनिक ले गए। वहां सिजेरियन ऑपरेशन किया गया, लेकिन ऑपरेशन के कुछ देर बाद ही नवजात बच्ची की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर ऑपरेशन हो जाता तो बच्ची की जान बच सकती थी। अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट नहीं था उपलब्ध इस मामले पर सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें परिजनों से फोन पर सूचना मिली थी। उन्होंने स्वीकार किया कि महिला चिकित्सक को बुलाया गया था, लेकिन एनेस्थेटिस्ट उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने कहा कि दूसरे एनेस्थेटिस्ट को आईसीयू से बुलाने की प्रक्रिया चल रही थी, तभी परिजन मरीज को लेकर चले गए। डॉ. सिंह ने बताया कि चार एनेस्थेटिस्ट की ड्यूटी तय है और ड्यूटी में लापरवाही की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने सदर अस्पताल के प्रबंधन की कार्यप्रणाली और आपातकालीन सेवाओं की तत्परता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। जमुई सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। सिजेरियन ऑपरेशन में तीन घंटे की देरी के कारण एक नवजात बच्ची की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर एनेस्थेटिस्ट चिकित्सक उपलब्ध न होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो सका, जिसके बाद महिला को निजी क्लिनिक ले जाना पड़ा। यह घटना शनिवार को हुई, जब खैरा प्रखंड के खड़ूई बरियारपुर निवासी सुधांशु सिंह की पत्नी रानी देवी को प्रसव पीड़ा के बाद सदर अस्पताल लाया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन की तैयारी की और महिला को ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट कर दिया गया। सर्जन के लेट पहुंचने से महिला की तबीयत बिगड़ी परिजन रवीश कुमार सिंह के अनुसार, ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट करने के बाद लंबे समय तक न तो सर्जन पहुंचे और न ही एनेस्थेटिस्ट उपलब्ध हुए। इस दौरान महिला दर्द से कराहती रही। परिजनों ने कई बार अस्पताल कर्मियों और वरीय अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। करीब तीन घंटे बीत जाने और महिला की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे आनन-फानन में एक निजी क्लिनिक ले गए। वहां सिजेरियन ऑपरेशन किया गया, लेकिन ऑपरेशन के कुछ देर बाद ही नवजात बच्ची की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर ऑपरेशन हो जाता तो बच्ची की जान बच सकती थी। अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट नहीं था उपलब्ध इस मामले पर सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें परिजनों से फोन पर सूचना मिली थी। उन्होंने स्वीकार किया कि महिला चिकित्सक को बुलाया गया था, लेकिन एनेस्थेटिस्ट उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने कहा कि दूसरे एनेस्थेटिस्ट को आईसीयू से बुलाने की प्रक्रिया चल रही थी, तभी परिजन मरीज को लेकर चले गए। डॉ. सिंह ने बताया कि चार एनेस्थेटिस्ट की ड्यूटी तय है और ड्यूटी में लापरवाही की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने सदर अस्पताल के प्रबंधन की कार्यप्रणाली और आपातकालीन सेवाओं की तत्परता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।


